फोन पर धर्म परिवर्तन..जयपुर की बबीता कैसे बनी जैश-ए-मोहम्मद की स्लीपर सेल? जयपुर ATS की पूछताछ में कई बड़े खुलासे!

जयपुर से गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद की संदिग्ध स्लीपर सेल बबीता उर्फ खदीजा का पाकिस्तानी हैंडलर्स ने ऑनलाइन ब्रेनवॉश किया था. उसे भारतीय जवानों को हनीट्रैप में फंसाने और आत्मघाती हमले की ट्रेनिंग दी जा रही थी.

jaipur
jaipur

नितेश तिवारी

follow google news

राजस्थान की राजधानी जयपुर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है. राजस्थान एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने मिलिट्री इंटेलीजेंस के इनपुट पर कार्रवाई करते हुए रविवार को जयपुर के वाटिका इलाके से जैश-ए-मोहम्मद की एक संदिग्ध महिला स्लीपर सेल बबीता धाकड़ (37) उर्फ 'खदीजा' को हिरासत में लिया है. मूल रूप से सवाई माधोपुर की रहने वाली बबीता पिछले कुछ समय से जयपुर में अपने रिटायर्ड पिता के साथ रह रही थी. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी महिला को 27 जून तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है.

Read more!

सोशल मीडिया पर जाल और पाकिस्तान जाने की चाहत

एटीएस के एसपी मनीष त्रिपाठी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां पिछले 3-4 महीनों से बबीता की संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख रही थीं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह वॉट्सएप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सीमा पार बैठे आतंकियों के लगातार संपर्क में थी. वह डंकी रूट के जरिए अवैध तरीके से नेपाल या यूएई के रास्ते पाकिस्तान भागने की फिराक में थी.

फोन पर हुआ धर्म परिवर्तन

पूछताछ में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि पाकिस्तान के एक मौलवी ने फोन पर बबीता का धर्म परिवर्तन कराया था, जिसके बाद उसने अपना नाम बदलकर 'खदीजा' रख लिया. पाकिस्तानी हैंडलर्स ने उसे भारत विरोधी कट्टरपंथी वीडियो दिखाकर पूरी तरह से ब्रेनवॉश कर दिया था. जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी मौलवी ने उससे वादा किया था कि 'अबू-उबैदाह' नाम का शख्स उससे निकाह करेगा, जिसके लिए उसे नमाज और कुरान के नियमों का पालन करने को कहा गया था.

हनीट्रैप-आत्मघाती हमले की खतरनाक ट्रेनिंग

जांच में खुलासा हुआ है कि बबीता पिछले दो साल से आतंकी संगठनों के संपर्क में थी. उसे भारतीय सेना के जवानों को सोशल मीडिया पर हुस्न के जाल में फंसाने (Honeytrap) और उनसे खुफिया जानकारियां निकालने की बकायदा ट्रेनिंग दी गई थी. इतना ही नहीं, वह इंटरनेट पर सुसाइड अटैक (आत्मघाती हमले) से जुड़े वीडियो भी सर्च कर रही थी, जिससे एजेंसियों को शक है कि उसे किसी बड़े आत्मघाती हमले के लिए तैयार किया जा रहा था. वह देश की अन्य युवतियों को भी कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़कर उनका ब्रेनवॉश करने का प्रयास कर रही थी.

बड़े आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड्स से जुड़े तार

सुरक्षा एजेंसियों को बबीता के मोबाइल से दो सिम कार्ड मिले हैं. इसके साथ ही वह 'दुनिया धोखेबाज' नाम से एक फर्जी फेसबुक अकाउंट चला रही थी, जिसकी फ्रेंड लिस्ट में 370 से ज्यादा लोग शामिल हैं, जिनमें अधिकांश पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नागरिक हैं. बबीता के फोन से जम्मू-कश्मीर के नगरोटा सेना कैंप हमले (2016) के मास्टरमाइंड कारी जरार और साल 1999 के कुख्यात इंडियन एयरलाइंस विमान अपहरण (IC-814) के आरोपी यूसुफ अजहर उर्फ गोरी के नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध नंबर मिले हैं.

पिता बोले- 'ऐसी औलाद नरक में जाए'

पकड़े जाने के डर से बबीता ने अपने मोबाइल का बहुत सा डेटा और चैट डिलीट कर दिए थे, जिसे रिकवर करने के लिए एटीएस फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ले रही है. दूसरी तरफ, बेटी की इस करतूत से आहत होकर उसके पिता ने कड़ा रुख अपनाया है. खादी विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी पिता ने कहा कि वे गंगापुर सिटी का अपना मकान बेचकर जयपुर आए थे, लेकिन उन्हें कभी भनक नहीं लगी कि उनकी बेटी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल है. उन्होंने कहा, जो लोग देश के खिलाफ काम करते हैं, उन्हें नरक में भी जगह नहीं मिलनी चाहिए. मुझे ऐसी बेटी की कोई जरूरत नहीं है.

एटीएस अब इस बात की तस्दीक कर रही है कि बबीता सिर्फ ऑनलाइन संपर्क में थी या राजस्थान में उसके पीछे कोई बड़ा स्थानीय नेटवर्क काम कर रहा है. इसके साथ ही जयपुर में पहचान बदलकर रहने वाले और बाद में विदेश भागे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी उमर हारिस उर्फ खरगोश के पुराने मामलों से भी इस केस के कड़ियों को जोड़कर देखा जा रहा है.

 

    follow google news