जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के सबसे बड़े बच्चों के अस्पताल 'जेके लोन' में उस वक्त मातम और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई, जब महज 15 दिन के एक नवजात बच्चे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. ईद की खुशियां इस परिवार के लिए मातम में बदल गईं और अस्पताल परिसर जंग का मैदान बन गया. परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में घोर लापरवाही के साथ-साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के भी गंभीर आरोप लगाए हैं.
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अस्पताल में 'जंग' जैसा माहौल
बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. अस्पताल के आईसीयू और वार्ड में परिजनों ने जमकर हंगामा किया. स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा, लेकिन आक्रोशित लोगों और पुलिस के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की भी हुई. परिजनों का आरोप है कि आईसीयू में कोई स्टाफ मौजूद नहीं था और बच्चे लावारिस हालत में पड़े थे.
बुर्का और हिजाब पर विवाद
पीड़ित परिवार ने एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला आरोप लगाया है. परिजनों के अनुसार, जब वे बच्चे की देखभाल के लिए वार्ड में जा रहे थे, तो नर्सिंग स्टाफ ने महिलाओं को बुर्का और हिजाब उतारने के लिए मजबूर किया. परिजनों का कहना है कि स्टाफ ने धार्मिक आधार पर भेदभाव किया, जिससे विवाद और अधिक बढ़ गया.
इलाज में लापरवाही के आरोप
पीड़ित पिता, जिन्होंने खुद इस अस्पताल में तीन साल काम किया है, ने बताया कि बच्चे को समय पर ऑक्सीजन नहीं दी गई. उनका आरोप है कि बच्चे को 24 घंटे में सात बार इंट्यूबेट (Intubate) किया गया, जिसे एक 15 दिन का मासूम सहन नहीं कर पाया. परिजनों का कहना है कि वे एक उम्मीद लेकर राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल आए थे, लेकिन यहां डॉक्टरों ने फोन पर व्यस्त रहकर और लापरवाही बरतकर उनके बच्चे की जान ले ली.
अस्पताल और पुलिस का रुख
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बच्चे को 19 मार्च को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था. जांच में पाया गया कि बच्चा जन्म से ही दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था, जिससे उसके शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो रही थी. डॉक्टरों का दावा है कि उन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका. फिलहाल, पुलिस में मामला दर्ज करा दिया गया है और जांच जारी है.
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