राजस्थान के जयपुर से एक बेहद खौफनाक और मां-बेटी के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने वाली वारदात सामने आई है. जयपुर के प्रतापनगर इलाके में एक 23 साल की सगी बेटी ने सरकारी नौकरी और करोड़ों रुपए की संपत्ति हड़पने के लिए अपनी ही विधवा मां की 7 लाख रुपए की सुपारी देकर बेरहमी से हत्या करवा दी. वकालत की पढ़ाई कर रही बेटी ने इस पूरी वारदात को एक सामान्य 'हिट एंड रन' सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की थी. हालांकि, पुलिस की पैनी नजर और सीसीटीवी फुटेज ने इस रूह कंपा देने वाली साजिश का पर्दाफाश कर दिया.
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पिता की मौत के बाद अनुकंपा की नौकरी बनी विवाद की जड़
यह पूरा मामला जयपुर की एयरपोर्ट कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार से जुड़ा है. करीब ढाई साल पहले लोअर कोर्ट में एलडीसी के पद पर कार्यरत विजय वशिष्ट उर्फ विजय शर्मा ने यहां अपना मकान बनवाया था, जहां वह अपनी पत्नी नीरज शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और एक मानसिक रूप से दिव्यांग बेटे के साथ रहते थे. करीब एक साल पहले विजय शर्मा का निधन हो गया, जिसके बाद अनुकंपा नियुक्ति का सवाल उठा.
शुरुआत में मां अपनी बेटी आयुषी को नौकरी दिलाने के लिए तैयार थी, लेकिन नीरज शर्मा के भाई (जो खुद लोअर कोर्ट में एलडीसी हैं) ने उन्हें समझाया कि वह खुद पढ़ी-लिखी हैं और दिव्यांग बेटे की देखभाल के लिए उन्हें यह नौकरी ले लेनी चाहिए, जबकि आयुषी अभी आगे पढ़ सकती है. इसके बाद नीरज शर्मा ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी स्वीकार कर ली, जिससे 24 साल की आयुषी बेहद नाराज हो गई और घर छोड़कर अपने पिता के पुराने घर में रहने चली गई.
चचेरे भाई और ताऊ के साथ मिलकर रची साजिश
घर छोड़ने के बाद आयुषी ने अपने ताऊ मोहन स्वरूप शर्मा के बेटे बलराम के साथ एलएलबी में दाखिला लिया और दोनों साथ रहने लगे. इसी दौरान आयुषी ने अपनी मां की हत्या की योजना बनाई. उसने बलराम को लालच दिया कि अगर वह उसका साथ देगा तो आगरा रोड स्थित करीब 5 करोड़ रुपये की 5 बीघा जमीन और भरतपुर में करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की 4 बीघा जमीन उसे दिला दी जाएगी. आयुषी का मानना था कि मां की मौत के बाद जयपुर के दोनों मकानों पर उसका अधिकार हो जाएगा और उसे अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी भी मिल जाएगी. इसके बाद दोनों ने यह योजना बलराम के पिता मोहन शर्मा को बताई और मिलकर फैसला लिया गया कि नीरज शर्मा को कार से कुचलकर मौत के घाट उतारा जाएगा ताकि घटना महज एक सड़क हादसा लगे.
मां को घर से बाहर निकालने के लिए किए करती थी टोटके
पुलिस जांच में सामने आया कि इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने से करीब एक महीने पहले भी थार गाड़ी से नीरज शर्मा को उनके ही घर के बाहर कुचलने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह बच गईं. इस घटना के बाद नीरज को अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा था और उन्होंने अपने भाई को इस बारे में बताया. सुरक्षा के लिए नीरज ने घर से निकलना बंद कर दिया, पूरे घर में जाली लगवा दी और बाहर चार सीसीटीवी कैमरे भी लगा दिए. जब नीरज का घर से निकलना बंद हो गया, तो शातिर बेटी आयुषी ने उन्हें बाहर निकालने के लिए अजीबोगरीब टोने-टोटके करने शुरू कर दिए. वह घर की सीढ़ियों पर जलता हुआ नारियल, नींबू-मिर्च और लाल रंग का सिंदूर फेंकने लगी ताकि नीरज घबराकर या देखने के लिए घर से बाहर निकलें और उन पर हमला किया जा सके.
आरोपी बेटी के चेहरे पर नहीं कोई पछतावा
आखिरकार 4 जुलाई को हत्यारों को मौका मिल गया. उस दिन नीरज शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को लेकर फिजियोथैरेपिस्ट के पास गई थीं, तभी आयुषी ने फोन कर उन्हें किसी जरूरी काम के बहाने घर बुलाया. नीरज जब घर लौट रही थीं, तभी 60 फीट रोड पर मोटरसाइकिल से रेकी कर रहे हमलावरों के इशारे पर उन पर तेज रफ्तार स्कॉर्पियो गाड़ी चढ़ा दी गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस ने महज दो-तीन दिनों के भीतर ही इस पूरी खौफनाक साजिश का पर्दाफाश कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. हैरान करने वाली बात यह है कि गिरफ्तारी के बाद भी कलयुगी बेटी आयुषी के चेहरे पर अपनी मां की मौत का कोई पछतावा नजर नहीं आया. पुलिस पूछताछ में वह लगातार उलझाने वाले जवाब देती रही और मीडिया के कैमरों के सामने भी उसने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी.
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