राजस्थान की राजधानी जयपुर से ठगी की एक ऐसी कहानी सामने आई है जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है. जयपुर पुलिस ने अरुण कुमार नाम के एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जिसे लोग अब 'नटवरलाल' कहने लगे हैं. इस आरोपी ने फर्जी डिग्री, नकली सरकारी मोहरों और सचिवालय के अधिकारी की झूठी पहचान के दम पर दर्जनों लोगों को अपना शिकार बनाया.
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ENO खाकर जहर का नाटक और पुलिस से फरार
अरुण कुमार कितना शातिर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब फरवरी 2025 में ब्रह्मपुरी पुलिस उसे पकड़ने पहुंची, तो उसने तुरंत 'इनो' (ENO) खा लिया. इनो खाते ही उसके मुंह से झाग निकलने लगा, जिसे देखकर पुलिस और आसपास के लोग घबरा गए कि उसने जहर खा लिया है. इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर वह मौके से फरार हो गया था. पुलिस ने उस पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसके बाद अब उसे कड़ी मशक्कत के बाद दबोचा गया है.
ठगी का 'प्रोफेशनल' तरीका
आरोपी साइंस बैकग्राउंड से है और उसने नर्सिंग की पढ़ाई की है. वह गूगल से सरकारी लेटर के फॉर्मेट डाउनलोड करता और उन्हें हूबहू असली नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) की तरह एडिट कर देता था. वह पीड़ितों को सचिवालय के कमरों की फोटो भेजकर यकीन दिलाता था कि उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक है. ठगी को पुख्ता करने के लिए वह पीड़ितों के परिजनों से स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट भी करता था कि अगर नौकरी नहीं लगी तो वह डबल पैसे वापस करेगा.
सट्टे की लत ने बनाया अपराधी
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि अरुण कुमार को ऑनलाइन सट्टेबाजी की बुरी लत लग गई थी. सट्टे के कर्ज को चुकाने के लिए उसने ठगी का रास्ता चुना. उसने न केवल जयपुर बल्कि झुंझुनू और अन्य जिलों के बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये वसूले. पुलिस ने उसके पास से बड़ी मात्रा में फर्जी डिग्रियां, नकली मोहरें और फर्जी सरकारी आदेश बरामद किए हैं. फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसने अब तक कुल कितने लोगों को चूना लगाया है.
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