Jaipur crime: 'जब उसने पापा को भी...' आयुषी पर मां ही नहीं अब पिता की भी हत्या का आरोप, मामा ने बताई सनसनीखेज कहानी

शरत कुमार

10 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 10 2026 6:01 PM)

neeraj sharma murder case: जयपुर के प्रतापनगर इलाके में 45 वर्षीय एनडीसी क्लर्क नीरज शर्मा हत्या मामले में नया मोड़ आया है. आरोपी आयुषी के मामा राकेश शर्मा के नए दावे ने कहानी में नया मोड़ ला दिया है. मामा की दावा है कि जीजा की मौत के पीछे भी आयुषी और उसका चचेरा भाई बलराम था. जानें क्या है नई कहानी.

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आयुषी के मामा राकेश शर्मा के नए दावे ने कहानी में दिया एक और मोड़.
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न्यूज़ हाइलाइट्स

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मामा का दावा- आयुषी ने मां से कहा था कि पिता को मार डाला तो तुम क्या चीज हो.

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आयुषी ने पुलिस से बताया- मेरा बचपन बहुत खराब था. मां केवल भाई को प्यार करती थी.

सरकारी नौकरी और करोड़ों की संपत्ति में अंधी हो चुकी विधवा मां की ह हत्या की आरोपी आयुषी के मामले में एक बड़ा आपडेट सामने आया है. मामले में आयुषी के मामा के नए दावों से सबके पांवों तले जमीन खिसक चुकी है. मामा का दावा है कि आयुषी ने नौकरी और संपत्ति के लिए केवल मां की हत्या नहीं कराई है बल्कि पिता को तो उसने पहले ही मौत की नींद सुला चुकी है. मामा के दावे से पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है. यही नहीं मामा राकेश शर्मा ने इस पूरे दावे के पीछे की कहानी भी बताई है. 

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दरअसल हत्या की आरोपी आयुषी के मामा राकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि वो अपने चचेरे भाई बलराम के साथ मिलकर पिता विजय शर्मा को अप्रैल 2025 में ही मार चुकी है. राकेश शर्मा ने बताया कि आयुषी की पिता की तबीयत खराब थी. आयुषी उनका इलाज नहीं होने दे रही थी. तब चचेरा भाई बलराम उसी घर में रहता था जहां विजय शर्मा, उनकी पत्नी निरज शर्मा, बेटी आयुषी और एक फिजिकल चैलेंज्ड बेटा रहता था. 

पिता ठीक हो गए फिर भी आयुषी नहीं मानी- मामा 

राकेश शर्मा का दावा है कि उनके जीजा विजय शर्मा जब ठीक हो गए तब भी आयुषी उनके पूरी तरह ठीक होने के लिए उन्हें हॉस्पीटल में एडमिट कराना चाहती थी. उसने एक दिन कहा कि वो एक डॉक्टर से बात करके आई है. फिर चचेरे भाई बलराम के साथ पिता को जबरन घर से ले गई. कहां ले गई किसी को कुछ पता नहीं चला. 3 महीने हो गए किसी को कुछ खबर नहीं. मां हर रोत पूछती थी पर आयुषी बताती नहीं थी. बस कहती कि इलाज चल रहा है. मां रोने लगी तो उसने कहा कि दिल्ली रोड पर निम्स में एडमिट हैं. वो हॉस्पीटल काफी दूर है. 

मां की बेबसी, दिव्यांग बेटे को छोड़कर नहीं जा पाई 

निरज शर्मा की अपनी बेबसी थी. वो अपने दिव्यांग बेटे की सेवा में लगी रहती थी. हालात ऐसे थे कि वे उसे एक पल के लिए भी छोड़कर नहीं जा पाती थीं. आयुषी ने इन्हीं मजबूरियों का फायदा उठाया. मामा राकेश शर्मा ने बताया कि एक दिन अचानक आयुषी का मैसेज उनके पास आया. उसने में उसने बताया कि पापा निविक अस्पताल के आईसीयू में हैं. 

जीजा के 90 फीसदी बॉडी पार्ट्स फेल हो गए- राकेश 

राकेश शर्मा ने बताया कि जब वो निविक अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर ने हैरान करने वाली बात बताई. विजय शर्मा के 90 फीसदी अंग डैमेज हो गए थे. इधर आयुषी उन्हें घर ले गई, जहां उनकी मौत हो गई. वो आनन-फानन में चचेरे भाई बलराम शर्मा की मदद से शव गांव ले गई और अंतिम संस्कार करवा दिया. 

जब नौकरी और संपत्ति की बात बोली तो हुई शंका- राकेश शर्मा 

आयुषी के मामा ने बताया कि जब उसने ये कहा कि पिता की जगह वो सरकारी नौकरी के लिए एप्लाई करने जा रही है. साथ ही उसने ये भी कहा कि सभी संपत्ति को उसके नाम कराना होगा. ये सुनते ही राकेश शर्मा का माता ठनका. उन्होंने अपनी बहन नीरज शर्मा से कहा कि बेटी आयुषी के चाल-चलन ठीक नहीं है. उसे कोई गाइड कर रहा है. दरअसल इन सबके पीछे बलराम था. 

पिता चाहते थे बेटी और भतीजा बड़े वकील बने 

आयुषी के पिता विजय शर्मा ने बेटी और भतीजे बलराम को एलएलबी करा रहे थे. उनका सपना था कि दोनों बड़े वकीन बनें.  चूंकि खुद विजय शर्मा राजस्थान हाईकोर्ट में कोर्ट मास्टर थे. वहां उनकी तूती बोलती थी. वे चाहते थे कि घर के बच्चे भी कानून की पढ़ाई कर इसी क्षेत्र में अपना कॅरियर संवारें और परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाएं . 

जब पिता को मार डाला तो तुम क्या चीज हो ? 

विजय शर्मा के साथ मामा राकेश शर्मा भी हाईकोर्ट में एलडीसी थे. मामा राकेश शर्मा ने बताया कि कि आयुषी ने मां के साथ एक दिन झगड़े में कहा था कि जब पापा की भोजन नली की पाइप निकाल कर मार डाली तो तुम क्या चीज .हो दो दिनों में अंदर मार डालूंगी. बेटी के इस धमकी के बाद निरज शर्मा ने व्हाट्सएप पर स्टेटस डाला कि अब तो दो दिन की जिंदगी बची है. 

क्या आयुषी ने केवल नौकरी और संपत्ति के लिए ये सब किया ? 

अब सवाल ये है कि 23 साल की बेटी आयुषी ने केवल नौकरी और संपत्ति के लिए मां को मार डाला और कथित रूप से पिता को भी मरने दिया. पुलिस की पूछताछ में आयुषी ने बताया कि उसकी मां नीरज शर्मा का पूरा ध्यान दिव्यांग बेटे पर रहता था. मां उसे उसकी कभी बनी नहीं. मां का प्यार उसके लिए न के बराबर था. आयुषी जब भी मां को देखती तो गुस्से से भर जाती थी. आयुषी का आरोप है कि मां उसे अक्सर खुद से दूर रखती थी. मामा और नाना का घर में दखल बहुत ज्यादा था.

दादी, ताऊ और चचेरे भाई के करीब रही आयुषी 

आयुषी ने बताया कि वो दादी, ताऊ और चचेरे भाई बलराम के करीब रही. हालांकि वो अपने दिव्यांग भाई से नफरत नहीं करती थी. धीरे-धीरे कब वो मां की दुश्मन बन गई पता ही नहीं चला. भाई बलराम के साथ अक्सर वो मां को मारने की योजना बनाती थी. इन्हीं बातों के ईर्द-गिर्द इनकी चर्चाएं होती थीं. 

सुपारी किलर ने क्या बताया 

इस पूरे मामले में सुपारी किलर हेमंत शर्मा ने बताया कि वो नीरज शर्मा को मारना नहीं चाहता था. दो दिन पहले आयुषी और बलराम जिद् करने लगे कि कि 7 लाख रूपए दे दिए हैं और सारा इंतजाम कर दिया है तो देरी क्यों कर रहे हो. डीसीपी रंजीता शर्मा ने कहा कि बलराम को पकड़ने के लिए पुलिस की टीम लगी हुई है. नीरज शर्मा के परिजनों ने जो शिकायत दी है उस पर जांच की जा रही है. आयुषी ने मां को मरने के पीछे प्रॉपर्टी और मां से नफरत को कारण बताया है. 

हार्डकोर अपराधी जैसे शातिर है आयुषी- पुलिस 

पुलिस का मानना है कि आयुषी LLB फाइनल ईयर की छात्रा है. ऐसे में वो बेहद चालाक और स्ट्रॉन्ग माइंड की है. एक हार्डकोर अपराधी की तरह शॉर्प है और कानूनी दांव-पेंच भी समझती है. वो कह रही है कि बचपन काफी खराब रहा है. जब ये पूछा जाता है कि कैसे खराब रहा है तो वो खामोश हो जाती है. अब पुलिस उससे मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ करेगी. 

क्या है ये पूरा मामला ?  

ये घटना 3 जुलाई 2026 की है. जयपुर के प्रताप नगर इलाके में दिव्यांग बेटे को कोचिंग छोड़कर घर लौट रहीं कोर्ट में एलडीसी यानी क्लर्क की नौकरी करने वाली 45 वर्षीय नीरज शर्मा की सड़क हादसे में मौत हो गई. उन्हें एक स्कॉर्पियो ने पीछे से जोरदार टक्कर मारी. टक्कर इतनी भयानक थी कि वो हवा में उछलकर करीब 100 फीट दूर जा गिरीं. तब कार की स्पीड 130 किमी से ज्यादा रही होगी. 

पहले हादसा पर मामा की शिकायत ने बदला केस 

पुलिस ने पहले इसे हिट एंड रन केस माना. जब आयुषी के मामा राकेश शर्मा ने पुलिस से शिकायत की और भांजी आयुषी के साथ ही उसके घर के अन्य सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए तो पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की. CCTV खंगालने के बाद पता चला कि ये हिट एंड रन नहीं बल्कि जानबूझकर टक्कर मारी गई है. यहीं से केस की परतें खुलनी शुरू हो गईं. 

चंकि आयुषी के पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति पर मां नीरज शर्मा ने कोर्ट में एलडीसी की नौकरी कर ली. ये नौकरी आयुषी लेना चाहती थी. वो मानने लगी कि मां उसके कॅरियर में रोड़ा बन गई. यही नहीं पिता की संपत्ति को लेकर मां से उसका आए दिन विवाद होता था. 

कैसे रची साजिश 

आयुषी ने चचेरे भाई बलराम ऊर्फ रवि के साथ हत्या का प्लान बनाया. उसने भरतपुर के एक बदमाश हेमंत शर्मा को हायर किया और 7 लाख की सुपारी दी. हेमंत ने नीरज शर्मा की रेकी शुरू कर दी. पहले उसने किराए पर लिए गए थार से टक्कर मारने की कोशिश की. बात नहीं बन पाई तो उसने स्कॉर्पियो से घटना को अंजाम दिया. आरोपी ने घटना के दिन भी मृतका नीरज शर्मा की रेकी की थी. 

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