राजधानी जयपुर के एक निजी स्कूल में छात्र प्रिंस सोनी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. परिजनों और मृतक छात्र के साथियों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण प्रिंस की जान चली गई. घटना के विरोध में छात्र-छात्राओं और परिजनों ने स्कूल परिसर के बाहर बैनर और पोस्टर लेकर जमकर प्रदर्शन किया और न्याय की मांग की.
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गले में फंसा पेटीज का टुकड़ा
परिजनों और साथी छात्रों के अनुसार, घटना लंच टाइम के दौरान हुई. प्रिंस ने जल्दी-जल्दी में पेटीज खाई थी, जिसका एक हिस्सा उसके गले में अटक गया. इसके बाद प्रिंस को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और वह पानी पीने के लिए भागा. परिजनों का आरोप है कि छात्र तड़पता रहा और मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन स्कूल स्टाफ ने उसे तुरंत पास के अस्पताल ले जाने के बजाय करीब 48 मिनट तक स्कूल के सोफे पर ही लिटाकर रखा.
मृतक छात्र की मां ने रोते हुए बताया कि स्कूल से महज 50 मीटर की दूरी पर अस्पताल स्थित था और स्कूल में गाड़ियां भी मौजूद थीं, फिर भी बच्चे को अस्पताल नहीं पहुंचाया गया. स्कूल प्रशासन ने माता-पिता को फोन कर फोर-व्हीलर गाड़ी लेकर आने को कहा और घटना की गंभीरता को छुपाए रखा. जब तक परिजन पहुंचे, तब तक छात्र की सांसें थम चुकी थीं.
'हमें इंसाफ चाहिए', स्कूल संचालकों की गिरफ्तारी की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों और परिजनों का कहना है कि अगर स्कूल समय रहते प्रिंस को अस्पताल पहुंचा देता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी. परिजनों की मांग है कि स्कूल प्रशासन और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और स्कूल को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए.
पुलिस की कार्रवाई और जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है. पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और स्कूल संचालकों, शिक्षकों व प्रत्यक्षदर्शी छात्रों से पूछताछ की जा रही है. पुलिस का कहना है कि मामले के सभी साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है और जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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