जोधपुर की जेल में मर्डर केस में सजा काट रहे मूलाराम और सीमा को ऐसे हुई मोहब्बत, अब शादी के लिए कोर्ट ने दी परमिशन

नितेश तिवारी

• 09:49 AM • 17 Jul 2026

जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे दो कैदियों, मूलाराम और सीमा को राजस्थान हाई कोर्ट ने शादी करने की ऐतिहासिक इजाजत दे दी है. खेत में काम करते-करते दोनों में प्यार हुआ था. कोर्ट ने इसे अनुच्छेद 21 के तहत उनका मौलिक अधिकार माना है.

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जोधपुर की खुली जेल में सजा काट रहे दो कैदियों की अनोखी प्रेम कहानी अब शादी के मंडप तक पहुंचने वाली है. हत्या के अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा भुगत रहे मूलाराम और सीमा को राजस्थान हाई कोर्ट ने शादी करने की मंजूरी दे दी है. कोर्ट का मानना है कि सजा काटने के बावजूद कैदियों को नई जिंदगी शुरू करने का हक है. आगामी 22 जुलाई को जेल परिसर में ही दोनों सात फेरे लेंगे.

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खेत में काम करते-करते हुआ प्यार

नागौर के रहने वाले मूलाराम पड़ोसी की हत्या के मामले में 2017 से जेल में हैं, जबकि महाराष्ट्र की रहने वाली सीमा अपने पति की हत्या के आरोप में 2019 से उम्रकैद काट रही हैं. अच्छे आचरण की वजह से दोनों को जोधपुर की मंडोर ओपन जेल (खुली जेल) में भेजा गया था. यहां कैदी सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश करते हैं और दिन में खेती का काम करते हैं. इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई, दोस्ती बढ़ी और फिर प्यार हो गया. दोनों पिछले कुछ समय से जेल के क्वार्टर में लिव-इन रिलेशनशिप में भी रह रहे थे.

हाई कोर्ट का ऐतिहासिक और मानवीय फैसला

जब दोनों ने साथ रहने का फैसला किया, तो मूलाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट में शादी की इजाजत के लिए अर्जी लगाई. हाई कोर्ट की डबल बेंच ने इस पर एक बेहद मानवीय फैसला सुनाया. अदालत ने साफ कहा कि दो बालिग व्यक्तियों का आपसी सहमति से शादी करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई कैदी सजा काट रहा है, उसे इस बुनियादी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. यह कदम उनके सुधार और समाज में दोबारा शामिल होने की प्रक्रिया को मजबूत करेगा.

जेल में सजेगा मंडप, आएंगे 21 मेहमान

हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद अब 22 जुलाई को मंडोर ओपन जेल में शादी की रस्में निभाई जाएंगी. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, शादी का पूरा खर्च दूल्हा यानी मूलाराम खुद उठाएगा. सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए जेल परिसर में पंडित सहित दोनों पक्षों के अधिकतम 21 लोगों को ही शामिल होने की अनुमति दी गई है. यह अनोखी शादी इस बात का एक बड़ा उदाहरण बन गई है कि सलाखों के पीछे भी सुधार और नई शुरुआत की गुंजाइश हमेशा बची रहती है.