Sachin Pilot on NSUI National President: राजस्थान के छात्र नेता विनोद जाखड़ ने शनिवार को एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अपना पदभार संभाल लिया है. इस कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने इसे राजस्थान के युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर बताया. नेताओं का कहना है कि विनोद जाखड़ एक साधारण दलित परिवार से आते हैं और उन्होंने छात्रों के हितों के लिए लंबा संघर्ष किया है. तमाम विरोधों और पुलिस केस के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. कांग्रेस नेतृत्व विशेषकर मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और कन्हैया कुमार का आभार व्यक्त किया गया कि उन्होंने एक जमीनी कार्यकर्ता पर भरोसा जताते हुए उसे पूरे देश की जिम्मेदारी सौंपी है.
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विरोध की आवाज को दबा रही है सरकार
कार्यक्रम के दौरान युवक कांग्रेस के नेताओं और उदयभान की गिरफ्तारी का मुद्दा भी गरमाया रहा. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मौजूदा सरकार विरोध प्रदर्शनों से इतनी घबरा गई है कि वह दमन की राजनीति पर उतर आई है. नेताओं ने तर्क दिया कि दुनिया के बड़े आयोजनों जैसे जी20 या जी77 में भी विरोध होता है लेकिन भारत सरकार मुट्ठी भर युवाओं के प्रदर्शन से डर गई. उदयभान को जेल में डालना और उन पर गंभीर धाराएं लगाना यह दर्शाता है कि सरकार असहनशील हो गई है और वह विपक्षी आवाजों को कुचलना चाहती है.
अमेरिका के साथ कृषि डील पर घेरा
केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ जो कृषि समझौता किया है वह भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है. आरोप लगाया गया कि इस डील में भारत के बाजार अमेरिका के लिए खोल दिए गए हैं जहां उन्हें जीरो टैरिफ की सुविधा मिलेगी जबकि हमारे ऊपर टैक्स का बोझ रहेगा. इससे कपास, सोयाबीन और मक्का उगाने वाले किसानों को भविष्य में भारी नुकसान होगा. कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि जैसे भूमि अधिग्रहण कानून और तीन काले कानूनों को वापस लेना पड़ा था वैसे ही इस किसान विरोधी फैसले के खिलाफ भी देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा.
महापुरुषों का नाम मिटाने की कोशिश
यूनिवर्सिटी से राजीव गांधी और इंदिरा गांधी के नाम हटाने के फैसले पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी गई. कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा की 'छोटी मानसिकता' करार दिया. उन्होंने कहा कि 11 साल सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा के मन से द्वेष और ईर्ष्या की भावना खत्म नहीं हुई है. राजीव गांधी ने युवाओं के लिए जो काम किए हैं उन्हें इतिहास से नहीं मिटाया जा सकता. नाम बदलने की राजनीति से लोगों के दिलों से नेताओं की यादें कम नहीं की जा सकतीं.
विदेश नीति और केजरीवाल पर तंज
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्रा और इजराइल-इरान संघर्ष पर भी सवाल उठाए गए. नेताओं का कहना है कि भारत की विदेश नीति अब राष्ट्रहित के बजाय 'व्यक्तिगत छवि' बनाने का माध्यम बन गई है. उन्होंने कहा कि विदेश नीति किसी नेता के निजी रिश्तों पर नहीं बल्कि देश के लाभ पर आधारित होनी चाहिए. वहीं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बरी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि केजरीवाल आज भले ही खुशी मना रहे हों लेकिन उन्होंने शीला दीक्षित और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं पर जो झूठे आरोप लगाए थे उसका जवाब कौन देगा.
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