राजस्थान की छात्र राजनीति में एक नया और आक्रामक अध्याय शुरू हो गया है. नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने दिल्ली में पदभार संभालते ही एक्शन मोड में आते हुए अपना पहला बड़ा वार किया है. इस बार निशाना बना है राजस्थान का टोंक जिला, जिसे कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट का मजबूत गढ़ माना जाता है. टोंक में एनएसयूआई की पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर नई टीम का ऐलान कर दिया गया है.
ADVERTISEMENT
टोंक में पूरी टीम बदली, नए चेहरों पर दांव
विनोद जाखड़ के निर्देश पर एनएसयूआई की नई जिला कार्यकारिणी में व्यापक बदलाव किए गए हैं. इस नई टीम में उपाध्यक्षों की नई कतार, महासचिवों की लंबी सूची और युवा जिला सचिवों को जगह दी गई है. इसके अलावा, तीन महत्वपूर्ण ब्लॉकों में भी नए ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है. जानकारों का मानना है कि यह केवल पद बांटने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आगामी चुनावों को देखते हुए जमीनी पकड़ मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति है.
हनुमान बेनीवाल नाम ने चौंकाया, इंटरनेट पर हुई चर्चा
टोंक एनएसयूआई की इस नई लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा जिला अध्यक्ष के नाम को लेकर हो रही है. टोंक एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष का नाम 'हनुमान बेनीवाल' है. जैसे ही यह सूची सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया पर लोग इसे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल से जोड़कर देखने लगे. हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि टोंक के ये छात्र नेता हनुमान बेनीवाल अलग व्यक्ति हैं और आरएलपी सांसद से उनका कोई संबंध नहीं है. नाम की इस समानता ने टोंक की राजनीति में एक अलग ही दिलचस्पी पैदा कर दी है.
विनोद जाखड़ का संदेश: 'काम करो या जगह छोड़ो'
पदभार ग्रहण करते ही जारी की गई इस पहली लिस्ट के माध्यम से विनोद जाखड़ ने संगठन के भीतर एक कड़ा संदेश भेज दिया है. उनके इस कदम से दो बातें साफ नजर आ रही हैं, पहली यह कि संगठन में निष्क्रियता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दूसरी यह कि केवल उन्हीं चेहरों को आगे लाया जाएगा जो मैदान पर सक्रिय दिखेंगे. राजस्थान की छात्र राजनीति जो पिछले कुछ समय से ठंडी मानी जा रही थी, विनोद जाखड़ के इस आक्रामक अंदाज के बाद फिर से गरमाती हुई दिखाई दे रही है.
भविष्य की राजनीति का संकेत
टोंक से शुरू हुई यह फेरबदल की प्रक्रिया अब ब्लॉक स्तर तक पहुंच चुकी है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या आने वाले समय में राजस्थान के अन्य जिलों में भी इसी तरह के बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे? एनएसयूआई का यह आक्रामक रुख आने वाले विधानसभा और लोकसभा समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है. युवाओं और सक्रिय चेहरों को जिम्मेदारी देकर संगठन ने यह साफ कर दिया है कि वह अब बैकफुट पर रहने के बजाय फ्रंटफुट पर राजनीति करेगा.
यहां देखें वीडियो
ADVERTISEMENT

