ठप पड़ा पाली का कपड़ा उद्योग! गैस की कमी और युद्ध की मार ने तोड़ी व्यापारियों की कमर, लॉकडाउन जैसे बने हालात

Pali textile industry crisis: राजस्थान के पाली में कपड़ा उद्योग गहरे संकट में है. गैस की भारी कमी और मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते साड़ी रंगाई-छपाई यूनिट्स ठप हो गई हैं, जिससे हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है. फैक्ट्रियां बंद होने से बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो गया है और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. जानिए पूरी कहानी.

Pali textile industry crisis
Pali textile industry crisis

भारत भूषण जोशी

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राजस्थान का औद्योगिक केंद्र पाली इन दिनों गहरे संकट से गुजर रहा है. जिले के प्रमुख कपड़ा उद्योग, विशेषकर साड़ियों और साड़ी फॉल्स की रंगाई-छपाई का काम, गैस की भारी किल्लत के कारण ठप हो गया है. गैस आधारित सैकड़ों फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद होने से न केवल व्यापार प्रभावित हुआ है, बल्कि हजारों प्रवासी मजदूर एक बार फिर 'लॉकडाउन' की तरह अपने घरों को लौटने पर मजबूर हैं.

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मशीनें बंद, मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट

पाली की कपड़ा इकाइयों में झारखंड, यूपी और बिहार जैसे राज्यों से आए हजारों श्रमिक काम करते हैं. गैस की सप्लाई बाधित होने से पिछले 15-20 दिनों से फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं. काम न होने के कारण लगभग 50% से 70% मजदूर अब तक पलायन कर चुके हैं या जाने की तैयारी में हैं. झारखंड से आए एक श्रमिक ने बताया कि वे पिछले 2 साल से यहां काम कर रहे थे, लेकिन अब काम बंद होने की वजह से गांव जाकर खेती-बाड़ी करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है.

व्यापारियों को दोहरा नुकसान: गैस और युद्ध की मार

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, पाली में लगभग 250 से 300 ऐसी मशीनें हैं जो पूरी तरह से कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर निर्भर हैं. एक मशीन पर रोजाना करीब 5 सिलेंडरों की खपत होती है, लेकिन अब गैस मिल ही नहीं रही है. इसके अलावा, इजराइल और इराक के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल, जैसे कलर और केमिकल्स के दामों में जबरदस्त उछाल आया है. व्यापारियों का कहना है कि वे भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं और यदि सरकार ने जल्द ही गैस की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की, तो यह उद्योग पूरी तरह गर्त में चला जाएगा.

सरकार से राहत की उम्मीद

पाली का कपड़ा उद्योग काफी हद तक लेबर ओरिएंटेड है. व्यापारियों को डर है कि यदि मजदूर एक बार गांव चले गए, तो उन्हें वापस बुलाना और उत्पादन को पटरी पर लाना बहुत मुश्किल होगा. उद्योगपतियों और श्रमिकों ने सरकार से गुहार लगाई है कि गैस की किल्लत को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि हजारों परिवारों का चूल्हा जलता रहे और पाली का यह ऐतिहासिक उद्योग जिंदा बच सके.

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