Rajasthan News: भीलवाड़ा में एक मंदिर ऐसा भी है जिसमें संतोषी माता की पूजा कोई पुजारी नहीं, बल्कि पुलिस के जवान करते हैं. इस परंपरा के पीछे की वजह भी काफी रोचक है. दरअसल, साल 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भीलवाड़ा पुलिस के कई जवानों की ड्यूटी सीमावर्ती क्षेत्रों में आंतरिक सुरक्षा के लिए लगी थी. ड्यूटी पर जाते समय वे पुलिस लाइन स्थित संतोषी माता के दर्शन करके गए थे और युद्ध समाप्ति के बाद सकुशल अपने घर लौटे. उसके बाद संतोषी माता मंदिर के प्रति भीलवाड़ा पुलिस के जवानों की अगाध श्रद्धा हो गई.
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इस वजह से पिछले 58 सालों से माता रानी की सेवा, पूजा और आरती कोई मंदिर का पुजारी नहीं, बल्कि पुलिस लाइन में तैनात सिपाही ही करते हैं. भीलवाड़ा पुलिस लाइन के संतोषी माता मंदिर में दोनों नवरात्रों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और यहां कृष्ण जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसे कई धार्मिक त्योहार भी बड़े ही उल्लास के साथ मनाए जाते हैं.
58 साल से पुलिस के पास है संतोषी माता मंदिर की व्यवस्था
मंदिर के पुजारी और भीलवाड़ा पुलिस के हेड कांस्टेबल जमना लाल ने बताया कि 1965 में बने संतोषी माता के इस मंदिर की संपूर्ण व्यवस्था पुलिस विभाग देखता है. यहां पुलिस के जवान और आमजन बड़ी श्रद्धा के साथ आते हैं और प्रतिदिन सुबह-शाम आरती होती है. इस मंदिर का अध्यक्ष उस समय भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात अधिकारी होता है जिसकी देखरेख में सभी व्यवस्थाएं संचालित होती है.
माता रानी की पूजा-श्रृंगार के लिए 2 सिपाहियों की लगी हुई है ड्यूटी
मंदिर के पुजारी हेड कांस्टेबल जमना लाल ने कहा कि साल 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय पुलिसकर्मियों की आंतरिक सुरक्षा में ड्यूटी लगी थी. तब वे यहां से मां के दर्शन करके गए थे और सकुशल लौटे. यहां मां के दरबार में आने वाले सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है. इस मंदिर की सेवा पूजा और आरती के लिए हेड कांस्टेबल जमुनालाल और सिपाही महेश की ड्यूटी लगी हुई है.
भीलवाड़ा के एसपी आदर्श सिद्धू कहते हैं कि भीलवाड़ा पुलिस लाइन ग्राउंड में संतोषी माता का ये मंदिर केवल पुलिस परिवार ही नहीं बल्कि भीलवाड़ा शहर के समस्त लोगों की आस्था का केंद्र है. इस मंदिर को पुलिस द्वारा ही मेंटेन किया जाता है जिससे पुलिस लाइन में पॉजिटिव एनवायरनमेंट बना रहता है और संतोषी मां का आशीर्वाद हमें मिलता रहता है जिससे हम अच्छा काम करते हैं.
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