Government officers suspended Rajasthan: राजस्थान में सरकारी कुर्सी पर बैठकर जनता को परेशान करने वाले और रिश्वतखोरी के दलदल में डूबे अफसरों-कर्मचारियों के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक ऐसी चेतावनी जारी की है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में भूचाल ला दिया है. अगर आप सरकारी नौकरी में हैं, जनता को बेवजह चक्कर कटवा रहे हैं, फाइलों को दबाकर बैठे हैं या भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ा सबक है. भजनलाल सरकार ने साफ कर दिया है कि अब करप्शन की कोई 'एक्सपायरी डेट' नहीं होगी यानी रिटायरमेंट के बाद भी न तो आप जेल जाने से बच पाएंगे और न ही आपकी पेंशन सुरक्षित रहेगी.
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नौकरी भी गई और पेंशन भी डूबी: आंकड़ों ने चौंकाया
भजनलाल सरकार द्वारा जारी किए गए प्रशासनिक आंकड़े बेहद हैरान करने वाले हैं. सरकार ने केवल चेतावनी देने के बजाय इस बार अंतिम और बेहद सख्त कार्रवाई का रास्ता चुना है. अब तक की कार्रवाई का ब्योरा इस प्रकार है:
20 अधिकारी-कर्मचारी बर्खास्त: करप्शन और अनुशासनहीनता के गंभीर मामलों में 20 लोगों की नौकरी पूरी तरह से छीन ली गई है.
332 कर्मचारी सस्पेंड: अलग-अलग विभागों में भ्रष्टाचार के दोषी पाए जाने पर 332 कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है.
17 अफसरों की आजीवन पेंशन बंद: सबसे बड़ा झटका उन अधिकारियों को लगा है जो यह सोचते थे कि रिटायरमेंट के बाद उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. सरकार ने 17 भ्रष्ट अधिकारियों की शत-प्रतिशत (100%) पेंशन पर आजीवन रोक लगा दी है.
108 मामलों में मुकदमा चलाने की मंजूरी: सरकार ने 108 मामलों में अभियोजन की स्वीकृति दे दी है, यानी अब इन अधिकारियों पर कोर्ट में केस चलेगा.
577 मामलों की जांच जारी: भ्रष्टाचार से जुड़े 577 मामलों की गहन जांच अभी भी चल रही है, जिसमें ऑल इंडिया सर्विसेज (IAS/IPS/RAS) से जुड़े 9 बड़े मामले भी शामिल हैं.
इन बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज
सरकार के इस हंटर की जद में कई रसूखदार नाम भी आए हैं. जिन अधिकारियों पर सेवा से हटाने और सख्त कार्रवाई की गाज गिरी है, उनमें:
1. नरसिंह (आरएएस अधिकारी)
2. पीआर खींची (उपनिदेशक)
3. सुनील व्यास (सहायक आचार्य)
4. प्रियंका दिवाकर (प्रवक्ता)
5. शीना लोकेश (कृषि अधिकारी)
सहित कई विभागों के अधिकारी शामिल हैं. इन सभी पर दोष साबित होने के बाद विभाग ने सख्त एक्शन लिया है.
'या तो ईमानदारी, या सरकारी कुर्सी छोड़ो'-सीएम
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ब्यूरोक्रेसी को कड़ा और सीधा संदेश दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकारी नौकरी जनता की सेवा के लिए है, किसी की 'जागीरदारी' चमकाने के लिए नहीं. फाइलों को अटकाना, सरकारी धन का दुरुपयोग करना और अपनी जवाबदेही से भागना अब राजस्थान में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मुख्यमंत्री का रुख साफ है या तो पूरी ईमानदारी से काम कीजिए, अन्यथा सरकारी कुर्सी और उससे मिलने वाली सुविधाएं छोड़ने के लिए तैयार रहिए.
इस ऐतिहासिक कार्रवाई के बाद अब राजस्थान की जनता के बीच यह बड़ी चर्चा है कि क्या वाकई सूबे में भ्रष्टाचार मुक्त शासन की शुरुआत हो चुकी है? इस बड़ी कार्रवाई पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.
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