Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गांवों की सरकार बनाने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. भले ही राज्य में पंचायत चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान अभी बाकी है, लेकिन बीजेपी ने चुनावी बिगुल बजाते हुए बड़ा सांगठनिक अभियान शुरू कर दिया है. पार्टी सिर्फ राजधानी या प्रदेश स्तर पर बैठकें करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अपने बड़े नेताओं को सीधे जिलों में उतारकर कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलने की रणनीति पर काम कर रही है.
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बीजेपी के वरिष्ठ नेता 30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक प्रदेश के करीब 23 संगठनात्मक जिलों का दौरा करेंगे और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करेंगे. इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य बूथ स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक संगठन को पूरी तरह सक्रिय करना और आने वाले पंचायत चुनाव के लिए मजबूत रणनीति तैयार करना है.
इन दिग्गजों को मिली जिम्मेदारियां
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ अगले 3 दिनों में 5 प्रमुख जिलों का दौरा करेंगे. वे 30 सितंबर को टोंक और अजमेर, 1 अक्टूबर को ब्यावर व भीलवाड़ा और 2 अक्टूबर को राजसमंद में जिला संगठन व कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी संवाद करेंगे.
वहीं, बीजेपी के नए प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया का पदभार संभालने के बाद यह पहला बड़ा जिला दौरा होगा. संजय भाटिया 30 सितंबर को खैरथल-तिजारा व अलवर और 1 अक्टूबर को भरतपुर व दौसा का दौरा कर पंचायत चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करेंगे.
संगठन महामंत्री अजय कुमार को कुल 6 जिलों की कमान सौंपी गई है. वे 30 सितंबर को जयपुर उत्तर और जयपुर दक्षिण, 1 अक्टूबर को चूरू व बीकानेर और 2 अक्टूबर को श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ में कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे. इसके अलावा राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और उदयपुर का दौरा करेंगे, जबकि सह-प्रभारी कुलजीत सिंह चहल झुंझुनू, सीकर और कोटपूतली-बहरोड़ में सांगठनिक बैठकें करेंगे.
निकाय चुनाव के बाद अलर्ट मोड में क्यों है BJP?
हाल ही में संपन्न हुए राजस्थान नगर निकाय चुनाव में बीजेपी ने 309 निकायों में से लगभग दो-तिहाई में अपना बोर्ड बनाया है और 10 में से 9 नगर निगमों में जीत दर्ज की है. हालांकि, निकाय चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोट शेयर का अंतर 1 फीसदी से भी कम रहा था. इसी बारीक अंतर को देखते हुए पार्टी ग्रामीण इलाकों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती.
इसके साथ ही, निकाय चुनाव के दौरान टिकट वितरण, बागियों और स्थानीय असंतोष जैसी जो कमियां सामने आई थीं, उन पर रिपोर्ट तैयार कर बीजेपी चुनाव से पहले सुधार करने की कोशिश में जुट गई है. शहरों के बाद अब गांवों की चौपाल पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.
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