राजस्थान बोर्ड 12वीं के नतीजे 31 मार्च को सुबह 10 बजे जारी हुए. हर तरफ छात्र-छात्राओं में उत्साह दिखा पर श्रीगंगानगर के एक घर में उदासी छाई थी. 93 फीसदी अंक लाने वाली होनहार निकिता अब इस दुनिया में नहीं थी. बेटी का रिजल्ट आया तो मां-पिता रो पड़े. मां कभी अपनी प्यारी बेटी की तस्वीरों के साथ रोती दिखी तो कभी उसकी किताबें देखकर. पिता बिटिया रानी की किताबों में खो गए. शायद वो किताबों में छपे अक्षरों में बेटी नकिता का अश्क ढूंढने की कोशिश कर रहे थे.
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अज निकिता होती तो कितना खुश होती. पूरा परिवार कितना खुश होता. परिवार उसके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दे रहा होता. बेटी ने बहुत मेहनत की थी. पूरी लगन से पढ़ाई की. मां-पिता को उम्मीद थी कि प्रतिभावान बेटी टॉप करेगी. हुआ भी कुछ ऐसा ही. निकिता ने 93 फीसदी अंक तो ला दिया पर वो इस दिन को देखने के लिए जिंदा नहीं रह पाई. वो पढ़ाई की जंग तो जीत गई पर पीलिया के रोग से हार गई. मां-पिता ने उसे बचाने की बहुत कोशिश की पर 20 मार्च को वो सबको रोता छोड़कर चली गई.
निकिता के माता-पिता ने क्या बताया?
निकिता श्री गंगानगर के राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय 7 KND रावला में पढ़ाई करती थी. वो कला वर्ग की छात्रा थी. मन में बड़े ख्वाब पाले हुए वो पढ़ाई कर रही थी. परीक्षा के दौरान ही वो बीमार हो गई. पिता ने बताया कि उसने बुखार में ही एग्जाम दिया. इसके बाद परिजन उसका इलाज कराने के लिए अस्पताल ले गए. वहां डॉक्टर ने बीकानेर जाने को कहा. वहां जांच में पता चला कि नकिता को पीलिया हो गया है. इलाज के दौरान की मौत हो गई.
निकिता के पिता मंगल सिंह और माता चरनजीत कौर ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में बहुत ही होनहार थी, लेकिन भगवान को कुछ और मंजूर था. निकिता की दो ओर बहनें हैं जिसमें एक बड़ी बहन भिंदर कौर अपने ननिहाल में बीएसटीसी कर रही है. छोटी बहन निशु 10वीं कक्षा पास की है. छोटा भाई अरमान सिंह जो 8वीं पास कर 9वीं कक्षा में गया है. निकिता के माता पिता मजूदरी करते है.
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