Rajasthan Education Department Order Controversy: राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाली, टपकती छतों और जर्जर इमारतों की तस्वीरें लगातार सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और विवादास्पद आदेश जारी किया है. माध्यमिक शिक्षा विभाग की तरफ से जारी नए फरमान के तहत अब राज्य के सभी 64,000 सरकारी स्कूलों में किसी भी बाहरी व्यक्ति, मीडियाकर्मी या रिपोर्टर के बिना प्रिंसिपल (संस्था प्रधान) की पूर्व अनुमति के प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.
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रिपोर्टर के कैमरे पर मारा हाथ, मीडिया को रिपोर्टिंग से रोका
हाल ही में जब संवाददाता शरद कुमार जयपुर के बगरू स्थित एक सरकारी स्कूल में बदहाली और जर्जर छतों का जायजा लेने पहुंचे, तो वहां मौजूद स्टाफ ने कैमरे पर हाथ मारकर उन्हें वीडियोग्राफी करने से रोक दिया. स्टाफ का कहना था कि ऊपर से सख्त आदेश हैं कि बिना परमिशन कोई भी वीडियो नहीं बना सकता.
क्या है शिक्षा विभाग का नया आदेश?
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि:
- प्रिंसिपल या संस्था प्रधान की लिखित इजाजत के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं करेगा.
- बिना अनुमति के शिक्षकों या छात्रों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पूरी तरह बैन होगी.
- यदि कोई बिना अनुमति के फोटो या वीडियो बनाता पाया जाता है, तो प्रिंसिपल तुरंत पुलिस को बुलाकर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं.
सरकार और शिक्षा मंत्री का तर्क है कि यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और निजता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो.
जर्जर छतों के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे
विपक्ष और मीडिया का आरोप है कि सरकार जन अल्फा (छात्रों) के प्रदर्शनों और स्कूलों की बदहाली के उजागर होने से डर गई है. जयपुर के स्कूलों में छतों से पानी टपकने, पपड़ियां गिरने और रस्सियों से बेंच बांधकर बच्चों को दूर रखने जैसी तस्वीरें सामने आई हैं. वहीं बाड़मेर के सीमावर्ती इलाके में झोपड़ी में चल रहे स्कूल की वीडियो भी निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने उजागर की थी. अलवर में भी छात्रों ने स्कूलों की खराब हालत को लेकर उग्र प्रदर्शन किया था.
राज्य में 20,000 स्कूल जर्जर हालत में
पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के कार्यकाल में मरम्मत न होने के कारण राज्य के करीब 20,000 स्कूल बेहद जर्जर स्थिति में हैं. हालांकि, मौजूदा भजनलाल सरकार ने स्कूलों के जीर्णोद्धार के लिए 12,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, लेकिन इसमें करीब एक साल का समय लगेगा. ऐसे में जब तक सुधार कार्य पूरे नहीं होते, तब तक मीडिया पर पाबंदी लगाने के इस फैसले को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
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