Rajasthan Nikay Chunav Re-Poll Result: राजस्थान निकाय चुनाव के तहत जयपुर, कोटा और जोधपुर की 9 सीटों पर हुए पुनर्मतदान (री-पोल) के नतीजे सामने आ चुके हैं. 16 सितंबर को हुए मतदान के बाद घोषित नतीजों में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 9 में से 6 सीटों पर परचम लहराया है. वहीं बीजेपी केवल 3 सीटों पर ही सिमट कर रह गई है. इन नतीजों में सबसे बड़ा झटका सत्ताधारी बीजेपी को राजधानी जयपुर में लगा है, जहां पुनर्मतदान वाले सभी 4 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों ने कब्जा जमा लिया है.
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जयपुर के सभी 4 वार्डों में लहराया कांग्रेस का परचम, वोटों का अंतर बढ़ा
नगर निगम जयपुर के वार्ड संख्या 9, 18, 25 और 34 के 5 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ था. घोषित परिणामों के अनुसार वार्ड 9 से कांग्रेस, वार्ड 18 से कांग्रेस की वंदिता शर्मा, वार्ड 25 से कांग्रेस की रेखा देवी और वार्ड 34 से कांग्रेस के सुरेश यादव ने शानदार जीत दर्ज की है. यद्यपि जयपुर नगर निगम में बीजेपी को पहले ही स्पष्ट बहुमत मिल चुका है, लेकिन री-पोल के नतीजों ने कांग्रेस के वोट बैंक में बड़ी बढ़त बना दी है.
कोटा में 2-2 पर छूटा मुकाबला, सुकेत में भी जीती कांग्रेस
कोटा नगर निगम और कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका की कुल 4 सीटों पर भी पुनर्मतदान के नतीजे घोषित किए गए. यहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली और दोनों ही दलों ने 2-2 सीटों पर कब्जा किया.
कोटा नगर निगम के वार्ड नंबर 44 और वार्ड 87 (पुष्पा चौधरी) से बीजेपी ने जीत दर्ज की. वहीं वार्ड नंबर 11 से कांग्रेस की कमलेश कुमारी जीतीं. इसके अतिरिक्त कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका के वार्ड नंबर 4 से कांग्रेस के मोहम्मद रफीक ने 117 वोटों के अंतर से चुनाव जीता.
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जोधपुर में बीजेपी के हेमाराम चौधरी जीते, पार्षदों का आंकड़ा हुआ 45
जोधपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 50 में हुए री-पोल के नतीजे बीजेपी के लिए राहत भरे रहे. यहां बीजेपी के प्रत्याशी हेमाराम चौधरी ने 87 वोटों से जीत हासिल की.
इस जीत के साथ ही जोधपुर नगर निगम में बीजेपी के विजयी पार्षदों का आंकड़ा 44 से बढ़कर 45 हो गया है. पहले यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों 44-44 सीटों की बराबरी पर थे, लेकिन इस नतीजे ने बीजेपी को मनोवैज्ञानिक बढ़त दिला दी है.
25 सितंबर को होने वाले मेयर चुनाव पर टिकी नजरें
पुनर्मतदान के इन 9 नतीजों के आने के बाद अब सभी राजनीतिक दलों की नजरें 25 सितंबर को होने वाले मेयर, सभापति और उपाध्यक्ष के चुनावों पर टिक गई हैं. निकाय बोर्ड बनाने के लिए एक-एक पार्षद का वोट बेहद निर्णायक माना जा रहा है, ऐसे में इन नतीजों ने सियासी गलियारों में हलचल काफी बढ़ा दी है.
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