राजस्थान में पंचायत चुनाव की आहट क्या हुई, गांवों की चौपालों से ज्यादा रौनक अब सोशल मीडिया पर दिखने लगी है. पहले जब किसी को चुनाव लड़ना होता था तो सुबह-सुबह बड़े-बुजुर्गों के पैर छूने निकलते थे, चौपालों पर जाकर घंटों बैठते थे और हाथ जोड़कर वोट मांगते थे. लेकिन इस बार का चुनावी माहौल बिल्कुल जुदा है. अब नेतागिरी का पूरा ठेका मानों AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और रील्स बनाने वालों ने ले लिया है.
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सोशल मीडिया खोलते ही आपको हर दूसरा बंदा सरपंच पद का दावेदार दिखेगा. अपनी एक फोटो उठाई, AI से उस पर सफेद कड़क कुर्ता-पजामा चिपकाया, बैकग्राउंड में समर्थकों की काल्पनिक भीड़ लगाई और बन गए नेताजी! पोस्टरों की ऐसी बाढ़ आई है कि समझ नहीं आता कौन सच में चुनाव लड़ रहा है और कौन सिर्फ लाइक-कमेंट्स बटोरने का मज़ा ले रहा है.
मेट्रो लाऊंगा, बारात के लिए ट्रेन रुकवाऊंगा
गांव के चुनावी अखाड़े में इस बार जो वादे किए जा रहे हैं, उन्हें सुनकर किसी का भी सिर घूम जाए. सरपंच पद के प्रत्याशियों के वादे गाँव की नालियों और रास्तों से बहुत आगे निकल चुके हैं. हाल ही में एक वीडियो जमकर वायरल हुआ, जिसमें एक भावी सरपंच जी ने कुंवारों का दर्द पकड़ लिया. वादा भी ऐसा-वैसा नहीं, बल्कि सीधे यह ऐलान कि अगर वे जीते तो दूसरे राज्यों जैसे यूपी और बिहार से बहुएं लाकर गाँव के कुंवारों की शादी करवाएंगे! हद तो तब हो गई जब बारात ले जाने के लिए गाँव में स्पेशल ट्रेन तक लगवाने की बात कह दी गई.
हालाँकि, बाद में इसे हंसी-मज़ाक का कंटेंट बताया गया, लेकिन वादों का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा. कोई गाँव में सीधा 'मेट्रो' दौड़ाने का वादा ठोक रहा है, तो कोई मुख्य लाइन की सुपरफास्ट ट्रेनों का स्टॉपेज अपने गाँव में कराने का दावा कर रहा है. चुनावी मैदान में हर कोई खुद को सरपंच कम और देश का कैबिनेट मंत्री ज्यादा समझ रहा है.
'काम न करूं तो घर के बाहर धरना दे देना'
चुनावी रंग में रंगी इस जंग में कुछ प्रत्याशी अनोखे अंदाज में भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं. एक प्रत्याशी का वीडियो खूब सुर्खियां बटोर रहा है, जिसमें वे सीना ठोककर ग्रामीणों से कह रहे हैं- "अगर जीतने के बाद मैं काम न करूं, तो सीधे आकर मेरे घर के सामने धरना दे देना!" वहीं कुछ लोग गाँव को रातों-रात 'स्मार्ट सिटी' बनाने के ख्वाब बेच रहे हैं.
चुनाव लड़े न लड़े, रील्स और ट्रेंड नहीं छूटना चाहिए!
सबसे मजेदार बात यह है कि सोशल मीडिया पर पोस्टरों का यह जलवा सिर्फ असली प्रत्याशियों तक सीमित नहीं है. जिन्हें चुनाव का 'च' भी नहीं मालूम, वे भी AI की मदद से अपनी रोबदार तस्वीरें बनाकर 'भावी सरपंच' लिखे पोस्टर चेप रहे हैं.
इसके साथ ही इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रील्स बनाने वालों की तो मानों लॉटरी लग गई है. कॉमेडी रील्स के जरिए दिखाया जा रहा है कि कैसे एक-एक घर से चार-चार लोग सरपंच बनने का सपना पाल चुके हैं.
कुल मिलाकर देखा जाए तो राजस्थान के गांवों में इस बार पंचायत चुनाव का खुमार थोड़ा अलग ही लेवल पर है. डिजिटल क्रांति, AI के जादू, अतरंगी वादों और मजेदार रील्स के तड़के ने इस बार के चुनावी माहौल को बेहद दिलचस्प और मनोरंजक बना दिया है.
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