राजस्थान के सीकर जिले में बुधवार को एक भीषक सड़क हादसा हुआ. फतेहपुर शेखावाटी के पास एक तेज रफ्तार कार और ट्रक की भिड़ंत के चलते एक ही परिवार की 7 महिलाओं की जान चली गई. ये सभी महिलाएं एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार से लौट रही थीं. इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है.
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हादसे में एक ही परिवार की मां, बेटी, तीन पुत्रवधुओं, देवरानी और जेठ के बेटे की बहू सहित सात महिलाओं की जान चली गई, जबकि एक युवती और ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए.
घर से सिर्फ 5 किलोमीटर पहले हादसा
रघुनाथपुरा गांव के रहना वाला यह परिवार लक्ष्मणगढ़ में मोहिनी देवी की ननद के दाह संस्कार में शामिल होकर लौट रहा था. गांव पहुंचने से महज पांच किलोमीटर पहले यह दर्दनाक हादसा हो गया. परिवार के सभी लोग कुल चार गाड़ियों में सफर कर रहे थे. 3 गाड़ियों में पुरुष थे और एक गाड़ी में सभी महिलाएं सवार थी. महिलाओं की कार पीछे चल रही थीं. शाम करीब चार बजे हरसावा गांव के पास उनकी कार हादसे का शिकार हो गई.
दो मिनट पहले किया था ओवरटेक
परिजनों के अनुसार महिलाओं की कार पहले सबसे पीछे चल रही थी. करीब दो मिनट पहले ड्राइवर ने पुरुषों की गाड़ी को ओवरटेक कर आगे निकाला. कुछ ही देर बाद हरसावा गांव के पास कार अनियंत्रित हो गई और सीधे ट्रक से टकरा गई.
ओवरटेक करने के चक्कर में हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार चालक ने एक वाहन को ओवरटेक करने की कोशिश की तो वह अनियंत्रित हो गई. कार पहले एक पिकअप से टकराई और फिर सामने से आ रहे ट्रक में जा घुसी. टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और महिलाएं अंदर ही फंस गईं. स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला लेकिन सात महिलाओं की जान नहीं बचाई जा सकी.
इन महिलाओं ने गंवाई जान
हादसे में 80 वर्षीय मोहिनी देवी, उनकी बहुएं चंदा देवी, तुलसी देवी, बरखा देवी, आशा देवी, संतोष देवी और बेटी इंदिरा की मौत हो गई. कार ड्राइवर वसीम और एक अन्य युवती सोनू गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. परिजनों का कहना है कि ड्राइवर को गाड़ी धीरे चलाने की हिदायत दी गई थी लेकिन वह तेज रफ्तार से गाड़ी चल रहा था.
परिवार की अपनी कार थी, ड्राइवर चला रहा था गाड़ी
परिजनों ने बताया कि परिवार फिल्टर पानी और वाहन कारोबार से जुड़ा है. हादसे का शिकार हुई कार परिवार की अपनी थी लेकिन चालक वसीम को किराये पर रखा गया था.
अंतिम संस्कार में करीब 16 लोग गए थे, जिनमें आठ महिलाएं थीं. महिलाओं को अलग सुविधा देने के लिए उन्हें अलग कार में बैठाया गया था, जो बाद में हादसे का शिकार हो गई.
सुरेंद्र पर टूटा दुखों का पहाड़
हादसे में सुरेंद्र नाम के परिजन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. दो साल पहले उन्होंने एक सड़क हादसे में अपने बेटे को खो दिया था. अब इस हादसे में उनकी मां, पत्नी और भाभी की मौत हो गई, जबकि बेटी सोनू जिंदगी और मौत से जूझ रही है.
गांव में नहीं जले चूल्हे, सीएम ने जताया दुख
रघुनाथपुरा गांव में इस सामूहिक मौत की खबर मिलते ही सन्नाटा पसर गया. किसी भी घर में रात को खाना नहीं बना. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है. प्रशासन ने घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं.
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