सचिन पायलट के जोधपुर दौरे ने बढ़ाई सियासी हलचल, स्वागत में उमड़ा गहलोत खेमा, पुराने दिग्गज भी आए साथ

Rajasthan Politics: सचिन पायलट के जोधपुर दौरे में बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता पहुंच. खास बात यह रही कि पूर्व सीएम अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले नेता भी उनके स्वागत में दिखे.

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जोधपुर में बदला कांग्रेस का सियासी मिजाज, सचिन पायलट के स्वागत में उमड़ा गहलोत खेमे का भी हुजूम

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस महासचिव और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के जोधपुर दौरे ने सियासी संकेत साफ कर दिए हैं. जिस जोधपुर को कभी अशोक गहलोत का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां पायलट के स्वागत में बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता पहुंचे.

बुधवार सुबह जैसे ही सचिन पायलट जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचे, वहां सैकड़ों कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई. फूल-मालाओं और नारों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया गया. खास बात यह रही कि इस बार स्वागत करने वालों में वे चेहरे भी शामिल थे, जो लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं.

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कौन-कौन स्वागत करने पहुंचा?

पूर्व शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सैयद अंसारी भी एयरपोर्ट पर मौजूद दिखे, जो करीब 17-18 वर्षों तक इस पद पर रहे. उनके अलावा जोधपुर शहर जिला अध्यक्ष ओमकार वर्मा, देहात जिला अध्यक्ष और भोपालगढ़ विधायक गीता बरवड़, फलौदी जिला अध्यक्ष सलीम नागोरी, पूर्व विधायक महेंद्र बिश्नोई, कांग्रेस नेता परशुराम विश्नोई, जयंती विश्नोई और पूर्व सांसद प्रत्याशी मुन्नी देवी गोदारा सहित कई वरिष्ठ नेता स्वागत के लिए पहुंचे.

इसके साथ ही राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के वर्तमान अध्यक्ष निर्मल चौधरी भी अपने समर्थकों के साथ पायलट को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे. आमतौर पर पायलट के दौरों में नजर न आने वाले कई नेता इस बार खुलकर उनके समर्थन में दिखे.

बाड़मेर के धोरीमन्ना पहुंचे पायलट

एयरपोर्ट पर छोटी मुलाकात के बाद सचिन पायलट सड़क मार्ग से बाड़मेर के धोरीमन्ना रवाना हुए, जहां वे पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी की जन आक्रोश रैली में शामिल हुए. इसके बाद शाम को जोधपुर लौटे पहुंचा.

मनरेगा योजना पर उठाए सवाल

मीडिया से बातचीत में सचिन पायलट ने प्रदेश की मौजूदा सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सरकार दो साल में जनता को गिनाने लायक कोई बड़ा काम नहीं कर पाई है. उन्होंने मनरेगा योजना में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि जब 100 दिन का रोजगार ठीक से नहीं मिल रहा, तो 125 दिन का वादा कैसे पूरा होगा.

क्या है इसके सियासी मायने

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जोधपुर जैसे क्षेत्र में गहलोत समर्थक माने जाने वाले नेताओं की पायलट के साथ मौजूदगी कांग्रेस के भीतर बदलते शक्ति संतुलन की ओर इशारा करती है. यह दौरा आने वाले समय में पार्टी की अंदरूनी राजनीति और नेतृत्व को लेकर अहम संकेत दे सकता है.

 

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