Rajasthan weather news: राजस्थान में गर्मी का तेवर और तीखा होता जा रहा है. मौसम केंद्र जयपुर (IMD) द्वारा जारी ताजा अपडेट के अनुसार, राज्य के अधिकांश हिस्सों में आगामी एक सप्ताह तक मौसम पूरी तरह से शुष्क रहने की संभावना है. इसके साथ ही सूर्यदेव के तीखे तेवरों के चलते अधिकतम तापमान में अभी 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की और बढ़ोतरी होने के प्रबल संभावना है. तेज गर्मी से मची हाय-तौबा के बीच इस बात का इंतजार होने लगा है कि कब मिलेगी आसमान से बरसती आग से राहत? कब आएगा मानसून (monsoon update). मौसम विभाग ने मानसून को लेकर एक आपडेट दिया है.
ADVERTISEMENT
इन इलाकों में चलेगी भीषण 'हीटवेव'
मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में राज्य का मौसम शुष्क रहा, जबकि कुछ इलाकों में रात का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया यानी 'उष्ण रात्रि' (Warm Night) और 'हीटवेव' (लू) की स्थिति बनी रही. पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश भागों में और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में आने वाले दिनों में कहीं-कहीं गंभीर हीटवेव (लू) चलने की आशंका जताई गई है.
पिलानी सबसे गर्म, सिरोही में रही थोड़ी राहत
पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्थान में सर्वाधिक अधिकतम तापमान पिलानी (चित्तौड़गढ़) में 46.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं, सबसे कम न्यूनतम तापमान सिरोही में 22.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे वहां रात के समय मामूली राहत रही.
19 से 22 मई तक धूलभरी आंधी का अलर्ट
भीषण गर्मी और लू के साथ-साथ अब प्रदेशवासियों को धूलभरी हवाओं का भी सामना करना पड़ेगा. मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, राज्य के अधिकांश भागों में 19 मई से 22 मई के दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज और धूलभरी हवाएं चलने की संभावना है. दोपहर के समय घर से बाहर निकलने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
मानसून को लेकर क्या है अपडेट (Monsson update)
राजस्थान में आमतौर पर मानसून 25 जून को पूर्वी राजस्थान में एंटर करता है. वहीं पश्चिमी राजस्थान में ये जुलाई के पहले सप्ताह में एंट्री लेता है. चूंकि भारतीय मानसून की दक्षिण-पूर्वी ब्रांच अंडमान-निकोबार के सभी द्वीपों पर बरसते हुए बंगाल की खाड़ी में प्रवेश कर चुकी है. माना जा रहा है कि इस बार मानसून की एंट्री पहले ही हो सकती है. हालांकि मौसम विभाग के जयपुर केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने कहा कि राजस्थान को लेकर मौसम विभाग अभी लगातार ट्रैक कर रहा है. यहां मानसून की कब एंट्री होगी इसे लेकर जल्द अपडेट आएगा.
इधर 5 दिन पहले केरल के तट से टकराएगा मानसून
इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) 5 दिन पहले ही केरल के तट से टकरा सकता है. ऐसे में इस मानसून के 20 जून तक यानी 5 दिन पहले ही राजस्थान पहुंचने की संभावना है. उधर बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी हवाएं गंगा के मैदानी इलाकों के नमी से बोझिल होकर राजस्थान की तरफ बढ़ेंगी. राजस्थान पहुंचते-पहुंचते ये अरावली पर्वत मालाओं से टकराकर जबरदस्त बारिश कराएंगी. ये बारिश मुख्यतया जयपुर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर संभाग में होगी.
राजस्थान में मानसून की किन शाखाओं से होती है बारिश ?
राजस्थान में मानसून की दो शाखाएं बारिश के लिए जिम्मेदार होती हैं. एक पश्चिम बंगाल की शाखा और दूसरी अरब सागर की मानसून शाखा. माना जाता है कि राजस्थान में अच्छी बारिश के लिए बंगाल की खाड़ी वाली शाखा ही जिम्मेदार है. अरब सागर से आने वाला मानसून पहले तो दस्तक दे देता है पर बारिश उतनी नहीं करा पाता. जहां तक राजस्थान के मरुस्थल हिस्से का सवाल है तो वो मानसून की दोनों शाखाओं के असर से महरूम रह जाता है.
पश्चिमी राजस्थान (थार मरुस्थल) क्यों रह जाता है सूखा?
अरब सागर से उठने वाला मानसून सबसे पहले दक्षिण-पश्चिम दिशा (बांसवाड़ा, डूंगरपुर के रास्ते) से प्रवेश करता है. अरब सागर से उठने वाली मानसूनी हवाएं राजस्थान में बारिश तो कराना चाहती हैं, लेकिन राज्य में स्थित अरावली पर्वतमाला (Aravalli Range) की स्थिति इनके बिल्कुल समांतर (Parallel) है. अरावली से टकराने के बजाय उसके सहारे-सहारे बिना पानी बरसाए सीधे उत्तर में हिमाचल और पंजाब की तरफ निकल जाती हैं. इसलिए ये शाखा बेहद कम बारिश करा पाती है.
जहां तक बंगाल की खाड़ी से आनी वाली मानसूनी हवाओं का सवाल है तो ये अरावली को पार करके पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) की तरफ बढ़ता है. उस वक्त तक हवाओं की नमी लगभग खत्म हो चुकी होती है. अरावली का यह हिस्सा 'रेन शैडो एरिया' (Rain Shadow Region) यानी वृष्टि छाया क्षेत्र बन जाता है. साथ ही, थार मरुस्थल की अत्यधिक गर्मी के कारण हवाओं की बची नमी भी वाष्पीकृत हो जाती है, जिससे वहां बहुत कम बारिश होती है.
राजस्थान में कब मिलेगी आसमानी आग से राहत ?
सवाल ये है कि राजस्थान में आसमान से बरसती आग से राहत कब मिलेगी. चूंकि मानूसन इस बार 5 दिन पहले दस्तक दे सकता है. केरल में 26 मई तक मानसून पहुंच सकता है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि प्री मानसून की बारिश जून के पहले या दूसरे सप्ताह से देखने को मिल सकता है. इससे बीच-बीच में गर्मी से निजात मिलने की संभावना बन सकती है.
ADVERTISEMENT


