थप्पड़कांड के बाद बदला माहौल! समरावता गांव में 2 साल बाद हुई वोटिंग, लेकिन सरकार से नाराजगी अब भी बरकरार

मनोज तिवारी

• 04:55 PM • 04 Nov 2026

राजस्थान के टोंक जिले के चर्चित समरावता गांव में 2 साल पुराने थप्पड़कांड और चुनाव बहिष्कार के बाद इस बार ग्रामीणों ने विकास की आस में मतदान किया.

टौंक के समरावता गांव में उपचुनाव
टौंक के समरावता गांव में उपचुनाव
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राजस्थान के टोंक जिले का चर्चित समरावता गांव जो 2 साल पहले हुए उपचुनावों के दौरान नरेश मीणा के 'थप्पड़कांड' और मतदान बहिष्कार के कारण देशभर की सुर्खियों में आया था, एक बार फिर चर्चा में है.

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हाल ही में हुए चुनावों (पंचायती राज/स्थानीय निकाय) के दौरान समरावता गांव के ग्रामीणों ने अपने रुख में बड़ा बदलाव दिखाया है. साल 2024 के देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव में जहां पूरे गांव ने मतदान का बहिष्कार किया था और महज 2 वोट पड़े थे, वहीं इस बार लोकतंत्र के इस पर्व में गांव के लोग उत्साह के साथ मतदान केंद्र पहुंचकर अपने वोट का इस्तेमाल कर रहे हैं.

2 साल पुरानी मांग अब भी जारी

हालांकि मतदान में भाग लेने के बावजूद ग्रामीणों का आक्रोश पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. समरावता के मतदाताओं का कहना है कि वे गांव के विकास, सड़कों और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखकर वोट डाल रहे हैं. लेकिन, अपनी ग्राम पंचायत को देवली के बजाय उनियारा पंचायत समिति में शामिल करने की पुरानी मांग पर वे आज भी कायम हैं.

ग्रामीणों ने कहा, "हमने विकास की सोच के साथ मतदान किया है, लेकिन पंचायत समिति बदलने को लेकर हमारी मांग और धरना-प्रदर्शन अब भी मजबूती से जारी है. जब तक सरकार हमारी बात नहीं मानती, हम अपनी आवाज उठाते रहेंगे .'

महिलाओं और बुजुर्गों ने भी निभाई भागीदारी

कचरावाता ग्राम पंचायत स्थित मतदान केंद्र पर समरावता गांव के बुजुर्ग, युवा और महिलाएं भी वोट डालने पहुंचीं. गांव की बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि गांव की सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी और बुनियादी सुविधाओं की है. सही जनप्रतिनिधि का चुनाव करके ही गांव का विकास संभव है, इसी सोच के साथ इस बार ग्रामीण वोटिंग के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं.

वोटिंग की सुचारू और शांतिपूर्ण प्रक्रिया से चुनावी अधिकारी भी राहत महसूस कर रहे हैं, क्योंकि 2 साल पहले की तरह इस बार हिंसा या बहिष्कार का माहौल नहीं है.

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