Nita Kanwar Sarpanch: राजस्थान के टोंक जिले की नटवाड़ा ग्राम पंचायत से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आई है. यहाँ की चर्चित सरपंच नीता कंवर को पंचायती राज विभाग ने उनके पद से मुक्त कर दिया है. नीता कंवर पर पद का दुरुपयोग करने, बिना कोरम के ग्राम सभा में फैसले लेने और सरकारी संपत्तियों को अवैध तरीके से नीलाम करने के गंभीर आरोप लगे हैं.
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कौन हैं नीता कंवर?
नीता कंवर का जन्म 1981 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हुआ था. वह 2001 में भारत आईं और लंबे इंतजार के बाद 2019 में उन्हें सीएए (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता मिली. इसके बाद 2020 में उन्होंने टोंक की नटवाड़ा पंचायत से चुनाव लड़ा और सरपंच बनीं. पाकिस्तान से आकर भारत में सरपंच बनने की उनकी कहानी ने तब खूब सुर्खियां बटोरी थीं.
क्या हैं आरोप?
जांच में सामने आया कि नीता कंवर ने सरपंच और प्रशासक रहते हुए कई नियमों को दरकिनार किया. मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
1. अवैध नीलामी: बिना सक्षम स्तर की स्वीकृति के राजकीय भवनों को गिराकर उनकी नीलामी की गई.
2. नियमों की अनदेखी: ग्राम सभा का कोरम (न्यूनतम उपस्थिति) पूरा किए बिना ही नीलामी के बड़े निर्णय पारित कर दिए गए.
3. राजस्व को हानि: बिना अनुमति सरकारी जमीनों और सामानों को बेचकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया.
4. अवैध निर्माण: पक्के निर्माण कार्यों के लिए भी जरूरी प्रशासनिक स्वीकृतियां नहीं ली गईं.
कैसे हुई कार्रवाई?
हाल ही में पीएचईडी मंत्री कन्हैया लाल चौधरी के टोंक दौरे के दौरान ग्रामीणों ने सरपंच के खिलाफ शिकायत सौंपी थी. इसके बाद जिला परिषद के सीईओ परशुराम धानका ने मामले की गहन जांच की. जांच रिपोर्ट में सभी आरोप सही पाए जाने पर पंचायती राज विभाग ने उन्हें पदच्युत करने का आदेश जारी किया. साथ ही, धारा 38 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें भविष्य के लिए भी अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
कभी प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करने और सीएए की सफलता का चेहरा बनीं नीता कंवर के लिए यह एक बड़ा झटका है. इस प्रशासनिक एक्शन ने न केवल पंचायत की सियासत बल्कि राजस्थान की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है.
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