तीर्थराज पुष्कर में उस समय आस्था और राजनीति का संगम देखने को मिला जब राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की. इस दौरान वसुंधरा राजे ने न केवल महाराज का आशीर्वाद लिया, बल्कि मंच से पुष्कर की पवित्रता और विदेशी सैलानियों के पहनावे को लेकर एक ऐसी अपील की, जो अब चर्चा का विषय बन गई है. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.
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'पुष्कर को नंबर-1 बनाने का संकल्प'
वसुंधरा राजे ने धीरेंद्र शास्त्री की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि हम सभी चाहते हैं कि राजस्थान नंबर-1 बने और इस मुकुट का सबसे चमकता हीरा पुष्कर राज हो. उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि महाराज के चरण यहां पड़े हैं. राजे ने स्थानीय लोगों से अपील की कि पुष्कर की चिंता केवल सरकार की नहीं, बल्कि यहां के हर एक व्यक्ति की होनी चाहिए.
ड्रेस कोड और धार्मिक मर्यादा पर सवाल
राजे ने विदेशों का उदाहरण देते हुए मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर 'ड्रेस कोड' की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने दूसरे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि, मुस्लिम देशों में मस्जिदों या मंदिरों में जाने के लिए एक ड्रेस कोड होता है. चर्च में जाना हो तो सिर ढकना और सही कपड़े पहनना जरूरी होता है. लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि जब सैलानी उन देशों में नियमों का पालन कर सकते हैं, तो हमारे देश और हमारी परंपराओं का सम्मान यहां क्यों नहीं कर सकते? जो लोग बाहर जाकर अनुशासित रहते हैं, वे यहां आकर मर्यादा क्यों भूल जाते हैं?
स्वच्छता के लिए जनता को टोका
वसुंधरा राजे ने पुष्कर सरोवर और यहां के कुंडों की सफाई पर जोर देते हुए जनता से सीधा संवाद किया. उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या वे अपने तीर्थ को साफ रखने का संकल्प लेंगे? उन्होंने कहा कि पिछले 12-15 सालों से वे यही बात कह रही हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि समाज इन चुनौतियों को स्वीकार करें और तीर्थ क्षेत्र में गंदगी को पूरी तरह खत्म करें.
धीरेंद्र शास्त्री का 'पक्का' निश्चय
मंच से बागेश्वर बाबा ने भी लोगों को 'दृढ़ निश्चय' रहने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि सफलता उसी को मिलती है जिसका संकल्प पक्का होता है. वसुंधरा राजे ने महाराज की बातों को दोहराते हुए कहा कि पुष्कर को स्वच्छ और मर्यादित बनाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है.
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