विनोद जाखड़ कैसे बने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष? निर्मल चौधरी की 'रील्स' पड़ीं भारी या मुकेश भाकर से अनबन बनी रोड़ा?
Vinod Jakhad NSUI President: एनएसयूआई (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर विनोद जाखड़ की नियुक्ति के बाद राजस्थान की छात्र राजनीति में हलचल तेज हो गई है. जानिए कैसे राहुल गांधी और कन्हैया कुमार की पैरवी, दलित प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक समीकरणों ने विनोद जाखड़ को दिलाई बड़ी जिम्मेदारी.

पिछले कई दिनों से कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर चल रहे सस्पेंस पर विनोद जाखड़ की नियुक्ति के साथ ही विराम लग गया है. लेकिन इस नियुक्ति के बाद राजस्थान की छात्र राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है कि आखिर निर्मल चौधरी रेस में पिछड़ क्यों गए और विनोद जाखड़ ने बाजी कैसे मारी. आइए विस्तार से समझते हैं पूरी बात.
विनोद जाखड़ की ताजपोशी के पीछे के 'पावर फैक्टर्स'
विनोद जाखड़ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं:
राहुल गांधी की नजरों में आना: पिछले दिनों एक पोस्टर फाड़ने के विवाद में जब विनोद जाखड़ जेल गए, तब वे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी की नजरों में आए. उनके जुझारूपन को पार्टी ने सराहा.
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कन्हैया कुमार की पैरवी: बताया जा रहा है कि विनोद जाखड़ के नाम की मजबूती से पैरवी कन्हैया कुमार ने की थी, जिसका उन्हें सीधा लाभ मिला.
दलित कार्ड और राजस्थान का प्रतिनिधित्व: राजस्थान से पहली बार किसी दलित चेहरे को एनएसयूआई का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. कांग्रेस ने इसके जरिए एक बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश की है.
निर्मल चौधरी का 'रील' अंदाज बना राह का रोड़ा?
राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष निर्मल चौधरी इस पद के लिए काफी उत्साहित और आशान्वित नजर आ रहे थे. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका 'रील्स' बनाने का अंदाज और सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा सक्रियता बड़े नेताओं को रास नहीं आई. यही अंदाज उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा माना जा रहा है.
मुकेश भाकर और यूथ टीम से बढ़ती दूरियां
एक समय मुकेश भाकर ही निर्मल चौधरी के सबसे बड़े समर्थक थे और उन्हें चुनाव जिताने में अहम भूमिका निभाई थी. लेकिन हाल के दिनों में मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया और अभिमन्यु पूनिया जैसे युवा नेताओं के साथ निर्मल चौधरी के रिश्ते ठीक नहीं रहे. चर्चा है कि इन नेताओं ने भी निर्मल को आगे बढ़ने से रोकने में भूमिका निभाई, क्योंकि उन्हें निर्मल की राजनीति करने का तरीका पसंद नहीं आ रहा था.
अब यूथ कांग्रेस की बारी, सचिन पायलट टीम की नजरें
विनोद जाखड़ के अध्यक्ष बनने के बाद अब सबकी नजरें राजस्थान यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष चुनाव पर हैं. इसमें डेगाना से आने वाले कार्तिक चौधरी ने अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है. उन्हें सचिन पायलट के साथ-साथ मुकेश भाकर और अभिमन्यु पूनिया की पूरी टीम का समर्थन हासिल है. अब देखना यह होगा कि क्या निर्मल चौधरी इस रेस में उतरते हैं या किसी अन्य पद के लिए दावेदारी करेंगे.
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