उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक कप चाय ने जबरदस्त उबाल ला दिया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा फतेहपुर के एक चर्चित चाय वाले, आर्यन यादव की दुकान पर चाय पीना अब एक बड़े सियासी विवाद का केंद्र बन गया है. इस मामले में न केवल सरकारी विभाग (फूड एंड सेफ्टी) की एंट्री हुई है, बल्कि अब यह ठाकुर बनाम मुस्लिम और बीजेपी बनाम सपा की एक जटिल लड़ाई में तब्दील हो चुका है.
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क्या है पूरा घटनाक्रम?
- 20 फरवरी: अखिलेश यादव फतेहपुर में एक कार्यकर्ता की शादी में शामिल होने पहुंचे थे. लौटते समय उन्होंने फतेहपुर घोष के चौकी चौराहा पर यूट्यूबर आर्यन यादव की दुकान पर रुककर चाय पी.
- 15 अप्रैल: अखिलेश के चाय पीने के करीब पौने दो महीने बाद अचानक फूड एंड सेफ्टी विभाग की टीम आर्यन यादव की दुकान पर छापेमारी करती है और चाय के सैंपल लेती है.
- मारपीट का मामला: छापेमारी के दो दिन बाद आर्यन यादव के साथ स्थानीय मुस्लिम युवकों ने मारपीट की. आर्यन ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ सुल्तानपुर घोष थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराई.
- अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस: मामला गरमाने पर अखिलेश यादव ने लखनऊ में आर्यन यादव को बुलाया, उसे सम्मानित किया और बीजेपी के पूर्व मंत्री धुन्नी सिंह पर गंभीर आरोप लगाए.
अखिलेश यादव और धुन्नी सिंह के बीच 'आर-पार'
लखनऊ में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने आर्यन यादव के साथ हुई कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया. उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी के पूर्व मंत्री धुन्नी सिंह का नाम लिया और उन पर कछुआ तस्करी, खनन और शराब तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगाए.
धुन्नी सिंह का पलटवार: अखिलेश के आरोपों पर धुन्नी सिंह ने फतेहपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्हें खुली चुनौती दी. उन्होंने कहा कि अखिलेश 10 दिन के भीतर इन आरोपों को सिद्ध करें, अन्यथा वे मानहानि का दावा करेंगे.
मुस्लिम समाज की नाराजगी और पुतला दहन
इस पूरे मामले में एक नया मोड़ तब आया जब स्थानीय मुस्लिम समाज के लोगों ने अखिलेश यादव का पुतला फूंका. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि:
अखिलेश यादव ने केवल एक पक्ष (आर्यन यादव) की बात सुनी और मुस्लिम समाज का पक्ष जाने बिना उन्हें अपराधी घोषित कर दिया. एक मामूली हाथापाई को हिंदू-मुस्लिम रंग देकर क्षेत्र की 'गंगा-जमुनी तहजीब' को खराब करने की कोशिश की गई है. पीडीए (PDA) का नारा देने वाले अखिलेश अल्पसंख्यकों की बात नहीं सुन रहे हैं.
अपर्णा यादव और पोस्टर विवाद
रिपोर्ट में अपर्णा यादव के हालिया विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया गया है. महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर लखनऊ की सड़कों पर प्रदर्शन के दौरान सपा के झंडे और पोस्टर जलाए गए, जिसमें कथित तौर पर अखिलेश यादव का भी चित्र था. इस घटना ने भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी है.
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