उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों और मुलाकातों के अपने सियासी मायने होते हैं. हाल ही में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव मथुरा में आध्यात्मिक गुरु गोस्वामी पुंडरीक महाराज से मुलाकात करने पहुंचे. इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आते ही सियासी गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई है। वजह यह है कि कुछ समय पहले ही अखिलेश यादव ने पुंडरीक महाराज को लेकर पुलिस-प्रशासन और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला था, लेकिन अब वे खुद उनका आशीर्वाद लेते और कथा में शिरकत करते दिखे हैं.
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अखिलेश यादव ने क्या कहा?
मथुरा में पुंडरीक महाराज से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं सबसे पहले स्वामी जी का आशीर्वाद लेने आया हूं और कथा में शामिल होकर आयोजक परिवार को बधाई देता हूं. साधु-संतों के दर्शन और उनसे मिलने का सौभाग्य हर किसी को मिलता है. वे हमारी धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं.
राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को अखिलेश यादव की उस रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जिसके तहत वे सॉफ्ट हिंदुत्व और सनातन धर्म के प्रति अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं.
जब गार्ड ऑफ ऑनर पर खड़ा हुआ था विवाद
इस मुलाकात के बीच वह पुराना मामला भी चर्चा में आ गया है, जब बस्ती जिले में पुलिस लाइन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पुंडरीक महाराज को यूपी पुलिस द्वारा 'गार्ड ऑफ ऑनर' (सलामी) दिया गया था.
उस वक्त अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस घटना पर सवाल उठाते हुए लिखा था, "जब पूरा पुलिस महकमा सलामी में व्यस्त रहेगा तो प्रदेश का अपराधी मस्त रहेगा. उत्तर प्रदेश पुलिस काम करने के बजाय बेतुके कामों में लगी है. भाजपा राज में अपराध और माफिया राज पर लगाम लगाने के बजाय 'सलामी-सलामी' खेला जा रहा है.
उस समय पुलिस प्रशासन का कहना था कि पुलिसकर्मी तनाव और डिप्रेशन से जूझ रहे थे, जिसके निवारण और अध्यात्म के लिए पुंडरीक महाराज का सत्र आयोजित कराया गया था. हालांकि, अखिलेश यादव ही नहीं बल्कि बसपा प्रमुख मायावती और आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद ने भी तब इस मामले पर सवाल खड़े किए थे.
कौन हैं ऑक्सफोर्ड से पढ़े पुंडरीक महाराज?
वृंदावन के रहने वाले गोस्वामी पुंडरीक महाराज आध्यात्मिक जगत का एक प्रमुख चेहरा हैं. उनके परिवार का एक समृद्ध आध्यात्मिक इतिहास रहा है.
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता श्रीभूति कृष्ण गोस्वामी और दादा श्री अतुल कृष्ण गोस्वामी प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता रहे हैं. परंपरा के अनुसार वे अपने परिवार के 38वें आचार्य हैं.
- शिक्षा: उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से समाजशास्त्र की पढ़ाई की और आगे की पढ़ाई के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय चले गए.
- 20 साल की उम्र में संभाली गद्दी: मात्र 20 वर्ष की आयु में उनके पिता का निधन हो गया. उस समय वे इंग्लैंड में थे, जिसके बाद उन्हें देश लौटना पड़ा और उन्होंने अपने परिवार की आध्यात्मिक विरासत संभाली. उन्होंने 7 साल की उम्र में ही पहला सार्वजनिक भाषण दे दिया था.
जिस गुरु की पुलिस सलामी पर कभी अखिलेश यादव आक्रामक रुख अपना रहे थे, आज उनके दर पर पहुंचकर आशीर्वाद लेने की यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में सॉफ्ट हिंदुत्व की नई बहस छेड़ चुकी है.
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