उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बलिया की रहने वाली सीमा राजभर की खूब चर्चा हो रही है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी देते हुए सपा महिला सभा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है. जूही सिंह ने अपना पद छोड़ते हुए अखिलेश यादव के निर्देश पर सीमा राजभर के नाम का ऐलान किया, जिसके बाद से ही पूर्वांचल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है.
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कौन हैं सीमा राजभर और क्या है उनका राजनीतिक सफर?
सीमा राजभर बलिया के एक साधारण परिवार से आती हैं और उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है. राजनीति में वे हमेशा से सक्रिय रही हैं और अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से की थी. ओम प्रकाश राजभर ने उन्हें बलिया जिला महिला मोर्चा का अध्यक्ष भी बनाया था, लेकिन 2022 में उन्होंने सुभासपा का साथ छोड़ दिया. सीमा राजभर ने उस वक्त ओम प्रकाश राजभर पर परिवारवाद और कार्यकर्ताओं के शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद वे अपने 40 समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गई थीं.
अखिलेश यादव की 'PDA' पॉलिटिक्स में फिट बैठता चेहरा
अखिलेश यादव लगातार पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों (PDA) को एकजुट करने की राजनीति कर रहे हैं. सीमा राजभर की नियुक्ति इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. इससे पहले अखिलेश यादव ने फूलन देवी की बहन रुक्मणी देवी (निषाद समाज) को भी इसी तरह महिला मोर्चा में महत्वपूर्ण पद दिया था. सीमा राजभर को पहले राष्ट्रीय सचिव बनाया गया और अब सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपना यह दर्शाता है कि सपा राजभर समुदाय में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है.
ओम प्रकाश राजभर के लिए कितनी बड़ी चुनौती?
उत्तर प्रदेश में लगभग 4% राजभर मतदाता हैं, जिनका प्रभाव पूर्वांचल के वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और आजमगढ़ जैसे करीब 18 जिलों में काफी ज्यादा है. ओम प्रकाश राजभर फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन सीमा राजभर के जरिए अखिलेश यादव इस वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं. सपा की इस नई टीम में जहां निषाद समाज से उपाध्यक्ष हैं, वहीं राजभर समाज से अब राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. देखना दिलचस्प होगा कि सीमा राजभर पूर्वांचल के राजभर वोट बैंक को कितना प्रभावित कर पाती हैं और क्या वे ओम प्रकाश राजभर के लिए एक बड़ा खतरा साबित होंगी.
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