उत्तर प्रदेश की सियासत में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के सबसे प्रमुख और प्रखर राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद आसिम वकार ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली. आसिम वकार की गिनती उत्तर प्रदेश के उन मुस्लिम नेताओं में होती है जो टीवी बहसों और जनसभाओं में बेहद आक्रामक और बेबाक शैली के लिए जाने जाते हैं.
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कौन हैं सैयद आसिम वकार?
सैयद आसिम वकार उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक जाना-माना और चर्चित चेहरा हैं. वे करीब 10 सालों से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से जुड़े हुए थे और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में काम कर रहे थे. ओवैसी जब भी उत्तर प्रदेश में अपने राजनीतिक अभियान चलाते थे, तो आसिम वकार उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों और अग्रिम पंक्ति के रणनीतिकारों में से एक होते थे. मीडिया में AIMIM का पक्ष बेहद मजबूती से रखने के कारण वे मुस्लिम मतदाताओं और राजनीतिक हलकों में एक अलग पहचान रखते हैं.
20 साल सपा में रहने के बाद ओवैसी के साथ आए थे वकार
आसिम वकार का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है. ओवैसी की पार्टी में शामिल होने से पहले वे लगभग 20 वर्षों तक समाजवादी पार्टी (SP) के साथ जुड़े रहे. सपा में लंबा वक्त बिताने के बाद जब ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपना आधार बढ़ाना शुरू किया, तो आसिम वकार AIMIM का हिस्सा बन गए. लगभग एक दशक तक उन्होंने ओवैसी के मुख्य प्रवक्ता के रूप में पार्टी की नीतियों और बयानों को जनता के बीच पहुंचाया.
अब क्यों छोड़ा ओवैसी का साथ और चुनी कांग्रेस?
कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद आसिम वकार ने अपने इस फैसले के पीछे की वजह बताई. उन्होंने कहा कि AIMIM में रहने के दौरान उन्हें अहसास हुआ कि वहां नाम बीजेपी से लड़ने का लिया जाता है, लेकिन असल में लड़ाई कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ लड़ी जाती है, जिससे बीजेपी को सीधा फायदा मिलता है. उन्होंने साफ कहा कि वे किसी टिकट या पद के लालच में नहीं आए हैं, बल्कि देश और संविधान को बचाने के लिए राहुल गांधी के निडर नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कांग्रेस में शामिल हुए हैं.
यूपी चुनाव और मुस्लिम राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आसिम वकार का कांग्रेस में जाना AIMIM के लिए एक बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है. वकार की मुस्लिम वोट बैंक और मीडिया स्पेस में अच्छी पकड़ मानी जाती है. कांग्रेस उनके जरिए यूपी में मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपने खोए हुए आधार को फिर से हासिल करने की कोशिश में है. वहीं, ओवैसी के लिए यूपी में अपनी पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और प्रवक्ता का जाना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.
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