Azamgarh Murder Case: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को हिला दिया. आरोप है कि अरविंद सिंह ने धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अपनी पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी. इस घटना में उसके 10 साल के बेटे की भी मौत हो गई. इसके बाद आरोपी ने तीन बच्चों को घर के अंदर बंधक बना लिया. करीब 8 घंटे तक घर के बाहर पुलिस का घेरा रहा और अंदर आरोपी हथियार लेकर बैठा था. पुलिस ने कई घंटे तक बातचीत के जरिए उसे समझाने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना.
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इसके बाद पुलिस ने घर में एंट्री की और मुठभेड़ में अरविंद सिंह घायल हो गया बाद में उसकी मौत हो गई. पुलिस ने तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आरोपी की बुजुर्ग मां शमला देवी ने आजतक से बातचीत की है. उन्होंने बताया कि उस दिन घर के अंदर क्या हुआ, विवाद कैसे शुरू हुआ और इसके बाद हालात कैसे बिगड़ते चले गए.
जानें महामृत्युंजय जाप के दौरान अचानक कैसे बिगड़ा माहौल?
आरोपी अरविंद सिंह की मां शमला देवी ने बताया कि उनके घर में पिछले तीन दिनों से लगातार महामृत्युंजय जाप और पूजा-पाठ का आयोजन चल रहा था. सब कुछ बेहद शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन तीसरे दिन यानी शाम करीब 5:30 बजे अचानक स्थिति पूरी तरह बदल गई. अरविंद ने पूजा करा रहे पंडितों के पास जाकर उनसे उनका आधार कार्ड मांगना शुरू कर दिया. पंडितों ने जब इस पर हैरानी जताई, तो अरविंद का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उसने बहसबाजी शुरू कर दी.
बीच-बचाव करने पहुंची पत्नी तो मार दी गोली
विवाद बढ़ता देख अरविंद की पत्नी तुरंत बीच-बचाव करने पहुंची. उसने अरविंद को समझाते हुए कहा कि घर आए पुरोहितों और ब्राह्मणों का इस तरह अपमान करना ठीक नहीं है. पत्नी की यह बात सुनते ही अरविंद आगबबूला हो गया. उसने बिना कुछ सोचे-समझे पिस्टल निकाली और अपनी पत्नी को ही गोली मार दी, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ी. इसके बाद वहां मौजूद तीन पुजारियों में हड़कंप मच गया. एक पुजारी जान बचाकर भाग निकला, लेकिन अरविंद ने बाकी दो पुजारियों पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं.
''अरविंद किसी की सुनने को तैयार नहीं था''- मां
वारदात के वक्त घर में मौजूद बुजुर्ग मां शमला देवी ने अपने बेटे को रोकने और अपनी बहु व पुजारियों को बचाने की जी-तोड़ कोशिश की. मां ने बताया कि जब उन्होंने गिरती हुई बहू और पंडितों को संभालने का प्रयास किया, तो उनके अपने कपड़ों और साड़ी पर खून के गहरे धब्बे लग गए. इसके बावजूद सिर पर खून सवार अरविंद किसी की सुनने को तैयार नहीं था.
बच्चों को बनाया बंधक, 8 घंटे तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
पत्नी और पुजारियों को निशाना बनाने के बाद आरोपी अरविंद सिंह ने अपने तीन मासूम बच्चों (जिनमें एक 10 साल का बेटा और 10 महीने की दूधमुंही बच्ची शामिल थी) को कमरे के अंदर बंद कर लिया और उन्हें बंधक बना लिया. सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और पूरे घर को घेर लिया. पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर और खिड़की के जरिए करीब 8 घंटे तक अरविंद को समझाने और दरवाजा खोलने की अपील की, लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी.
एनकाउंटर में ढेर हुआ सनकी आरोपी
काफी देर तक समझाने-बुझाने के बाद जब कमरे के भीतर से अचानक गोलियों की आवाज आई, तो पुलिस ने बिना देर किए फोर्स एंट्री की. पुलिस के अंदर घुसते ही आरोपी ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से आरोपी अरविंद सिंह ढेर हो गया. वहीं, इस पूरी दुखद घटना में एक बच्चे की भी गोली लगने से मौत होने की खबर है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत फोरेंसिक जांच कर रही है.
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