Azamgarh Murder Case: नशा, अकेलापन और दिमागी अस्वस्थता... जानिए ग्रामीणों ने आरोपी अरविंद सिंह के बारे में क्या बताया

राजीव कुमार

• 02:18 PM • 23 Sep 2026

Azamgarh Murder Case: आजमगढ़ के अतरौलिया में तीन लोगों की हत्या करने वाले आरोपी अरविंद सिंह को लेकर ग्रामीणों ने बड़े खुलासे किए हैं. गांव वालों के मुताबिक भाई के कत्ल के बाद से अरविंद मानसिक रूप से परेशान रहता था और गांजा-भांग का नशा करता था. बच्चों को बंधक बनाए जाने के बाद मौके पर कमांडो फोर्स बुलाई गई.

अरविंद को लेकर ग्रामीणों ने किए चौंकाने वाले दावे
अरविंद को लेकर ग्रामीणों ने किए चौंकाने वाले दावे
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Azamgarh Murder Case: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के शंभूपुर गांव में घटना ने सभी को हैरान कर दिया है. यहां घर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के चौथे दिन अचानक अरविंद सिंह नाम के शख्स ने अपनी पत्नी और पूजा करा रहे पुजारियों पर गोलियां चला दीं. इस सनसनीखेज वारदात में तीन लोगों की जान चली गई. इस बीच अब घटना के बाद आरोपी अरविंद सिंह को लेकर उसके गांव के लोगों ने कई चौंकाने वाली बातें बताई हैं.

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भाई की हत्या के बाद बदल गया था व्यवहार

घटनास्थल पर मौजूद गांव के लोगों ने बताया कि आरोपी अरविंद सिंह का दिमागी संतुलन पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रहा था. ग्रामीणों के अनुसार, कुछ समय पहले उसके भाई का मर्डर हुआ था. उस हादसे के बाद से ही अरविंद पूरी तरह डिस्टर्ब रहने लगा था. उसने गांव के लोगों से मिलना-जुलना एकदम बंद कर दिया था. इसके साथ ही वह गांजा और भांग जैसे नशों की गिरफ्त में आ चुका था और ज्यादातर अकेला ही रहता था.

गांव के बुजुर्ग अशोक सिंह और पंकज सिंह ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस घटना से पूरे गांव में मातम और दहशत का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति अपनी ही पत्नी और घर में आए पुरोहितों पर गोली चला सकता है, तो उसकी मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. इस वारदात से गांव की बदनामी भी हुई है और लोग गहरे सदमे में हैं.

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3 मासूम बच्चों को बनाया बंधक, मौके पर पहुंची स्पेशल कमांडो फोर्स

वारदात को अंजाम देने के बाद अरविंद सिंह ने अपने तीन मासूम बच्चों को घर के कमरे में बंद कर लिया और उन्हें बंधक बना लिया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आजमगढ़ के एसएसपी और वाराणसी जोन के एडीजी खुद मौके पर पहुंचे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल कमांडो फोर्स और एटीएस की टीमों को भी मौके पर तैनात किया गया.

किसी रिस्क के बिना सुरक्षित रेस्क्यू पर रहा प्रशासन का जोर

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए काफी सावधानी बरती गई. सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को खारिज करते हुए पुलिस ने स्पष्ट किया कि कमांडो की मदद से बेहद सतर्कता के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया ताकि किसी मासूम को कोई नुकसान न पहुंचे. फिलहाल पुलिस बल पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर रहा है.

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