बड़े बेटे को मिली यूपी पुलिस की वर्दी, तो छोटे का तिरंगे में लिपटा आया शव...बागपत की ये कहानी जान पसीज जाएगा दिल!

Baghpat News: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से दिल को झकझोर देने वाली कहानी सामने आई है, जहां एक ही परिवार में एक बेटे को यूपी पुलिस की वर्दी मिली, तो दूसरे बेटे का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा. जानिए बागपत के इस वीर सपूत की शहादत, परिवार का दर्द और गांव की आंखें नम कर देने वाली पूरी कहानी.

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मनुदेव उपाध्याय

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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के लमगांव से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर पत्थर दिल भी रो पड़े. एक ही घर के दो बेटों की किस्मत ने ऐसा क्रूर खेल खेला कि जिस दिन परिवार में बड़े बेटे की सफलता की खुशियां मनाई जानी थी, उसी दिन छोटे बेटे की शहादत की खबर ने घर को मातम में बदल दिया. खबर के फैलते ही घर के साथ-साथ पूरे गांव में माहौल अचानक से बदल गया और लोगों की आंखें नम हो गई. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.

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एक को मिली 'वर्दी', दूसरे को मिला 'कफन'

लमगांव निवासी मोहित चौहान और सोहित चौहान, दो भाई थे. बड़े भाई मोहित चौहान का चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में हुआ था और रविवार को उनकी पासिंग आउट परेड थी. पिता अपने बड़े बेटे के कंधे पर वर्दी और सितारों की चमक देखने के लिए कार्यक्रम में शामिल होने गए थे. लेकिन उसी समय उन्हें खबर मिली कि उनका छोटा बेटा सोहित चौहान, जो भारतीय सेना में अग्निवीर था, देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया है.

अरुणाचल प्रदेश में बर्फीले तूफान ने छीना घर का लाडला

सोहित चौहान भारतीय सेना की 'थ्री ग्रेनेडियर' यूनिट में अग्निवीर के पद पर तैनात थे. साल 2023 में भर्ती हुए सोहित रविवार को अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी पर थे. पेट्रोलिंग के दौरान अचानक आए भीषण बर्फीले तूफान की वजह से एक भारी पेड़ उनके ऊपर गिर गया, जिसकी चपेट में आने से उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया. जिस बेटे ने गरीबी से लड़कर सेना की वर्दी पहनी थी, वह तिरंगे में लिपटकर घर लौटा.

पूरा गांव फूट-फूटकर रोया, शहीद को दी गई अंतिम विदाई

जब सोहित का पार्थिव शरीर पैतृक गांव लमगांव पहुंचा, तो माहौल गमगीन हो गया. मां अपने कलेजे के टुकड़े के तिरंगे को सीने से लगाकर बिलखती रही, वहीं पिता पत्थर बने अपने वीर सपूत को निहारते रहे. श्मशान घाट पर सेना के जवानों ने सोहित को गार्ड ऑफ ऑनर दिया और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई. इस दौरान सोहित चौहान अमर रहें और इंकलाब जिंदाबाद के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा.

शहीद के दर्जे और मदद की मांग

सोहित एक छोटे किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनकी शहादत पर पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि सोहित को शहीद का दर्जा दिया जाए और उनके माता-पिता के लिए पेंशन व अन्य सरकारी सहायता सुनिश्चित की जाए. सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने भी परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. एक ही आंगन में एक तरफ वर्दी की चमक और दूसरी तरफ तिरंगे में लिपटी शहादत की इस तस्वीर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है.

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