शादी की, 5 बच्चे हुए, नई पहचान भी बना ली…ओमप्रकाश से सलीम बने शख्स के साथ ऐसे क्या हुआ कि 40 साल बाद लौटना पड़ा गांव

Bareilly News: बरेली का 15 साल का ओमप्रकाश घर छोड़कर दिल्ली गया और वहां धर्म बदलकर सलीम बनकर नई जिंदगी शुरू कर ली. शादी, बच्चे और सेट हो चुकी जिंदगी के बीच अचानक SIR सर्वे की दस्तावेजी जांच ने उसकी पहचान को लेकर सवाल खड़े कर दिए. इस दौरान रिकॉर्ड नहीं मिलने पर वो मजबूर होकर 40 साल बाद अपने गांव लौट आया. यहां उसका बैंड-बाजे के साथ स्वागत किया गया.

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कृष्ण गोपाल राज

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UP News: बरेली से 40 साल पहले एक 15 साल का लड़का ओमप्रकाश घर छोड़कर दिल्ली पहुंचता है और यहां आकर नया जीवन शुरू करता है. इसी के तहत वो नाम और धर्म बदल लेता है. नाम रखता है सलीम. उधर गांव वाले उसे मरा हुआ मान चुके थे. लेकिन इधर सलीम दिल्ली को ही अब अपना घर मान चुका था. उसने अपने सारे दस्तावेज यहीं के बना लिए. समय के साथ उसने एक मुस्लिम महिला से शादी भी कर ली, जिससे उसके 5 बच्चे हुए. यहां तक तो सलीम की जिंदगी ठीक चल रही थी, लेकिन अचानक एक घटना ने सब कुछ बदलकर रख दिया और सलीम को मजबूर होकर अपने पैतृक गांव लौटना पड़ा.

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इस बीच गांव में जैसे ही यह खबर फैली कि ओमप्रकाश वापस आ गया है तो माहौल भावुक हो उठा. परिवार वालों ने बैंड-बाजे बजवाकर उसका स्वागत किया और उसे फूल-मालाएं पहनाई गई.40 साल बाद घर लौटे ओमप्रकाश उर्फ सलीम को देखकर उसके गांव वाले भी हैरान रह गए. लेकिन अब सवाल है आखिर वो कौन सी वजह थी जिसने 40 साल बाद ओमप्रकाश को दोबारा अपने गांव लौटने पर मजबूर कर दिया और उसे क्यों इतना बड़ा फैसला लेना पड़ा. चलिए इन्हीं सब सवालों का जवाब जानते हैं इस खबर में…

क्या है पूरा मामला?

ओमप्रकाश उर्फ सलीम यूपी के बरेली का रहने वाला है. लेकिन घर छोड़ने के बाद वो दिल्ली में रहने लगा. यहां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सर्वे के दौरान एक हैरान और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है. दरअसल, 40 साल पहले ओमप्रकाश (15 वर्षीय) नामक एक युवक घर से भागकर दिल्ली चला गया था. यहां पहुंचने के बाद उसने अपना नाम बदलकर सलीम रख लिया. उम्र बढ़ी तो कुछ समय बाद उसने एक मुस्लिम महिला से शादी कर ली. दाेनों के पांच बच्चे हुए. इसमें चार बेटियां और एक बेटा शामिल है. इनमें से वो अपनी तीन बेटियों की शादी भी कर चुका है. सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन एक दिन SIR सर्वे करने वाले कुछ लोग उसके घर पहुंचे.इस दौरान सलीम से उसके पैदाइशी दस्तावेज और मूल पहचान के रिकॉर्ड मांगे गए. उसने ये सभी डाक्यूमेंट उपलब्थ करवा दिए. लेकिन उसके रिकॉर्ड वेरिफिकेशन से मेल नहीं खा रहा था. बस यही से उसने गांव लौटने का फैसला किया.

अपने लोगों से मिलकर बहुत खुशी हुई.- ओमप्रकाश 

गांव पहुंचते ही ओमप्रकाश का उसकी बहनों और रिश्तेदारों ने स्वागत किया. मिठाइयां बांटी गई,  बैंड-बाजे बजाए गए, फूल मालाएं पहनाई गई. गांव में खुशी का माहौल हो गया. ओमप्रकाश ने कहा, '40 साल बाद अपने गांव लौटा हूं, पहले बहन के घर गया. यहां बहुत बदलाव हो गया है. तब मिट्टी के मकान थे, कच्चे रास्ते थे. अब सब पक्के घर और सड़कें हो गई हैं. अपने लोगों से मिलकर बहुत खुशी हुई.'

अब गांव में ही स्थाई रूप से रहने की योजना

ओमप्रकाश ने बताया कि वो दिल्ली में टेंट हाउस में करता था. लेकिन अब वो स्थायी तौर पर अपने ही गांव में ही रहने की योजना बना रहे हैं. फिलहाल अब ओमप्रकाश अपने मूल नाम और पहचान के कागजात गांव से ही बनवाने  में जुट गए हैं. इसके अलावा उन्होंने अपने दादा और चाचा के नाम पर मौजूद 16 बीघा पैतृक जमीन की स्थिति को भी देखना शुरू कर दिया है.

ओमप्रकाश की ये कहानी अब पूरे गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है. गांव के लोग इस घटना को किसी चमत्कार से कम नहीं' बता रहे हैं. उनका मानना है कि 40 साल पहले बिछड़ा हुआ उनका बेटा केवल दस्तावेजों की जांच की वजह से ही सही, लेकिन वापस अपने घर और परिवार के पास लौट आया.

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