बस्ती जिले में रिश्तों की आड़ में रची गई एक खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है. जिस खाकी पर इलाके में सुरक्षा का जिम्मा था, वही खाकी इस बार ब्लैकमेलिंग के एक शातिराना जाल में उलझकर खामोश हो गई. वाल्टरगंज थाने के इंचार्ज सूर्य प्रकाश सिंह की संदिग्ध खुदकुशी के तार अब एक ऐसे 'हनीट्रैप' गैंग से जुड़ गए हैं, जो पहले दोस्ती का ढोंग रचाता था और फिर अश्लील तस्वीरों-वीडियो के दम पर जिंदगी नरक बना देता था. पुलिस ने इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य आरोपी महिला, उसके पिता और एक वकील को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है.
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प्यार का नाटक और फिर ब्लैकमेलिंग का खेल
मामले की तह तक जाने पर जो कहानी सामने आई, वह किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है. गिरोह की मास्टरमाइंड 32 साल की प्रियंका चौधरी थी. गंधार गांव की रहने वाली प्रियंका पिछले 10 सालों से अपने पति से अलग रह रही थी और मुंबई में स्पा व ब्यूटी पार्लर में काम कर चुकी थी.
पुलिस के मुताबिक प्रियंका की कार्यप्रणाली बिल्कुल तय थी, जिसमें वह सबसे पहले लोगों से जान-पहचान बढ़ाकर अपनी मीठी-मीठी बातों से उनका भरोसा जीतती थी. इसके बाद नजदीकियां बढ़ाकर अंतरंग पल बिताने के दौरान छिपकर उनकी तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड कर लेती थी, और फिर शिकार के जाल में पूरी तरह फंसते ही अपना असली रंग दिखाकर समाज व परिवार में बदनाम करने की धमकी देकर लाखों रुपये की वसूली शुरू कर देती थी.
101 मिनट पहले आई वो आखिरी कॉल...
29 अगस्त को जब वाल्टरगंज थाना प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह का शव उनके सरकारी आवास पर फंदे से लटकता मिला, तो हर कोई सन्न रह गया. मामले में मोड़ तब आया जब 5 सितंबर को उनके बेटे संदीप सिंह ने कोतवाली में पिता को आत्महत्या के लिए उकसाने की FIR दर्ज कराई.
डीआईजी संजीव त्यागी की अगुआई में जब पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और कॉल डिटेल्स की खंगाली, तो चौंकाने वाली बात सामने आई. मौत वाले दिन दोपहर 1:41 बजे आरोपी वकील विजय प्रकाश यादव ने इंस्पेक्टर को फोन किया था. इसके कुछ ही देर बाद उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया. साफ है कि उस आखिरी बातचीत में ऐसा दबाव बनाया गया, जिसे इंस्पेक्टर बर्दाश्त नहीं कर सके.
अस्पताल चौराहे से दबोचे गए तीनों मास्टरमाइंड
पुलिस टीम ने जाल बिछाकर आरोपी प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव को शहर के हॉस्पिटल चौराहे से गिरफ्तार कर लिया है.
शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि यह गिरोह सिर्फ इंस्पेक्टर तक सीमित नहीं था, बल्कि कई और संभ्रांत लोग भी इनके शिकार बन चुके हैं. फिलहाल पुलिस आरोपियों के मोबाइल, बैंक अकाउंट्स और कॉल रिकॉर्ड्स को स्कैन कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि इस नेटवर्क के तार बस्ती के बाहर और कहां-कहां फैले हुए हैं.
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