Basti news: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां इशहाक अली नाम के एक बुजुर्ग कफन ओढ़कर कलेक्ट्रेट चैंबर के सामने फर्श पर लेट गए. उन्हें इस हालत में देखकर वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के होश उड़ गए. बुजुर्ग से जब ऐसा करने की वजह पूछी गई तो पूरे दफ्तर में हड़कंप मच गया. इशहाक अली ने अधिकारियों से कहा ''साहब, मुझे कागजों में जिंदा कर दीजिए.'' अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक बुजुर्ग को इस तरह कफन ओढ़कर विरोध करना पड़ा? क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी, आइए जानते हैं विस्तार से…
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सबसे पहले जानिए पूरा मामला
यह पूरा मामला लालगंज थाना क्षेत्र के बानपुर गांव का है. पीड़ित बुजुर्ग इशहाक अली ने बताया कि वे स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारी थे. रिकॉर्ड के अनुसार इशहाक अली संतकबीर नगर के नाथनगर सीएचसी में स्वीपर के पद पर तैनात थे. 31 दिसंबर 2019 को वो रिटायर हो गए. हैरानी की बात ये है कि राजस्व विभाग ने रिटायरमेंट से सात साल पहले यानी साल 2012 में ही उन्हें कागजों में मृत घोषित कर दिया था. इसी को ठीक करने के लिए लगातार वे ऑफिसों के चक्कर काट रहे थे, जब उनकी किसी ने नहीं सुनी तो उन्हें कफन ओढ़कर कलेक्ट्रेट आफिस के सामने लेट गए.
यहां पहुंचकर वे कहने लगे कि ''साहब मुझे जिंदा कर दीजिए, मैं सरकारी कागजों में मर चुका हूं. पीड़ित बुजुर्ग का आरोप था कि वे पिछले 14 साल से सरकारी कागजों में मृत हैं, उन्होंने कहा कि इसे लेकर मैने लगातार शिकायतें की. अपने जिंदा होने के सबूत भी दिए, लेकिन अभी तक मैं सरकारी कागजों में जिंदा नहीं हो सका, तो साहब अब मुझे आप जिंदा कर दीजिए.
जमीन हड़पने के लिए रची गई साजिश- इशहाक
इशहाक अली का आरोप है कि तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ललित कुमार मिश्रा ने अपने पद का दुरुपयोग किया. उन्होंने 2 दिसंबर 2012 को सरकारी फाइलों में इशहाक की मौत दर्ज कर दी. बुजुर्ग की मौत की झूठी रिपोर्ट लगते ही उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि गाटा संख्या 892 को गांव की ही एक महिला शाहिदुन्निशा के नाम पर दर्ज कर दिया गया. पीड़ित का कहना है कि उनकी जमीन ही उनकी पहचान है और इसे हड़पने के लिए उन्हें जीते जी मार दिया गया.
राजस्व रिकॉर्ड में मृत, स्वास्थ्य विभाग से लेते रहे पेंशन
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि साल 2012 से 2019 के बीच जब राजस्व विभाग की फाइलों में इशहाक अली स्वर्गवासी हो चुके थे उसी दौरान स्वास्थ्य विभाग उन्हें हर महीने वेतन दे रहा था. रिटायरमेंट के बाद अब उन्हें सरकार की ओर से पेंशन भी मिल रही है. बुजुर्ग ने अधिकारियों से सवाल किया कि अगर वह मर चुके हैं तो बैंक उन्हें पेंशन कैसे दे रहा है.
उपजिलाधिकारी से जांच और कार्रवाई का मिला आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी सदर शत्रुघ्न पाठक ने बताया कि एक बुजुर्ग व्यक्ति उनके पास आए हैं जो खुद को जीवित बता रहे हैं. उन्होंने माना कि ये गंभीर प्रकरण है. इसमें बड़ी लापरवाही हुई है. एसडीएम ने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी और जो भी कर्मचारी इसमें दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिससे पीड़ित बुजुर्ग को न्याय मिल सके और उन्हें कागजों में दोबारा जिंदा किया जा सके.
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