उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई सुगबुगाहट तेज हो गई है. बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है. इन अटकलों को हवा तब मिली जब खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बृजभूषण शरण सिंह को लेकर एक बड़ा बयान दिया. लंबे समय से बीजेपी से नाराज चल रहे बृजभूषण और अखिलेश यादव की एक-दूसरे के प्रति बढ़ती नरमी राज्य की राजनीति में किसी बड़े उलटफेर का संकेत दे रही है.
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बृजभूषण को लेकर क्या बोले अखिलेश यादव
जब मीडिया ने अखिलेश यादव से सीधा सवाल किया कि क्या बृजभूषण शरण सिंह समाजवादी पार्टी का दामन थामने वाले हैं, तो अखिलेश यादव ने बेहद सधे हुए और दिलचस्प अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह का जिक्र करते हुए उन्हें 'हमारे नेता' और 'गोंडा के नेता' कहकर संबोधित किया. अखिलेश ने कहा कि राजनीति में कब क्या मोड़ आ जाए और कैसी परिस्थितियां बन जाएं, इसके बारे में भविष्य ही बेहतर बता सकेगा. उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी के भीतर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के लोग काफी पीड़ित और अपमानित महसूस कर रहे हैं और वे वर्तमान सरकार का साथ छोड़ना चाहते हैं.
बृजभूषण शरण सिंह के बदले हुए तेवर
पिछले कुछ समय से बृजभूषण शरण सिंह के तेवरों में बीजेपी के प्रति तल्खी और अखिलेश यादव के प्रति तारीफ साफ देखी जा रही है. हाल ही में बिहार के भागलपुर में उन्होंने एक विवादित बयान देते हुए कहा था कि अगर वह अपनी पार्टी पर बोझ बन गए हैं, तो उन्हें बता दिया जाए. वह साल 2027 या 2029 के चुनावों में इसका फैसला कर देंगे. इतना ही नहीं, उन्होंने अखिलेश यादव की सुचिता की राजनीति की भी जमकर सराहना की है.
अखिलेश यादव के बड़प्पन के मुरीद हुए पूर्व सांसद
बृजभूषण शरण सिंह ने हाल ही में अखिलेश यादव द्वारा बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल का हालचाल जानने के लिए अस्पताल जाने के कदम की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने वहां जाकर अपने बड़प्पन का परिचय दिया है और यह राजनीति की एक स्वस्थ परंपरा है. उन्होंने अखिलेश यादव को इस पहल के लिए साधुवाद भी दिया. बृजभूषण का यह बदला हुआ रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे 2009 से 2014 के बीच समाजवादी पार्टी के सांसद रह चुके हैं और उनका सपा के साथ पुराना नाता रहा है.
सियासी मायने और भविष्य की संभावनाएं
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव द्वारा बृजभूषण को अपना नेता बताना महज एक बयान नहीं, बल्कि एक बड़ा सियासी संकेत हो सकता है. बीजेपी और बृजभूषण शरण सिंह के बीच फिलहाल बहुत बेहतर संबंध नहीं दिख रहे हैं, ऐसे में उनके पुराने घर (सपा) की ओर लौटने की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता. अब देखना यह होगा कि गोंडा के इस बाहुबली नेता का अगला कदम उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्या नया मोड़ लेकर आता है.
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