Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के आरोपों को लेकर इन दिनों राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय विवादों में घिरे हैं. इस पूरे मामले पर अब चंपत राय के भाई सुनील बंसल सामने आए हैं और उन्होंने विरोधियों पर जमकर हमला बोला है. बिजनौर में चंपत राय के पुश्तैनी घर पर जब हमारे सहयोग 'आज तक' ने उनसे बात की तो उन्होंने चंपत राय के जीवन, उनकी संपत्ति और इस्तीफे के सस्पेंस को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाली बातें बताई.
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सुनील बंसल ने चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उनका पचास साल का जीवन पूरी तरह ईमानदार और पारदर्शी रहा है. उन्होंने दावा किया कि चंपत राय के साथ विश्वासघात हुआ है. उनके मुताबिक, जिन लोगों को चंपत राय ने विश्वास में लिया था, उन्हीं लोगों ने उनका भरोसा तोड़कर अपना निजी फायदा उठाया. उन्होंने साफ किया कि जो लोग इस मामले में पकड़े गए हैं, उन्हें एसआईटी ने पकड़ा है और अब इस पूरे मामले की जांच एसआईटी ही कर रही है.
चंपत राय को पद से हटाने के लिए विपक्ष की बड़ी साजिश
चंपत राय के भाई ने इस पूरे विवाद के पीछे विपक्ष का हाथ बताया है. उनका कहना है कि यह सब हिंदुत्व, भाजपा और चंपत राय के परिवार को बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश है. विपक्ष चाहता है कि चंपत राय किसी भी तरह से ट्रस्ट के महासचिव की गद्दी से हट जाएं ताकि वे उस जगह पर अपना आदमी बैठा सकें. उन्होंने कहा कि इसी वजह से चंपत राय पर लगातार झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं.
1980 में ही घर-परिवार से तोड़ लिया था नाता
पारिवारिक रिश्तों को लेकर सुनील बंसल ने एक भावुक खुलासा किया. उन्होंने बताया कि चंपत राय ने साल 1980 में ही घर-परिवार से अपना नाता तोड़ लिया था. वे आरएसएम कॉलेज में फिजिक्स के लेक्चरार थे, जहां से उन्होंने इस्तीफा देकर अपना पूरा जीवन दान कर दिया. इसके बाद से उनका परिवार से कोई संबंध नहीं रहा. भाई ने बताया कि चंपत राय उनका फोन तक नहीं उठाते हैं. साल-दो साल में कभी भूलकर फोन उठा लिया तो सिर्फ राजी-खुशी पूछते हैं. वह आखिरी बार साल 2014 में एक बच्चे की शादी में सिर्फ दो घंटे के लिए आए थे और पिछले दस सालों से अपने घर तक नहीं आए हैं.
विपक्ष को खुली चुनौती चंपत राय की संपत्ति पर चलाओ बुलडोजर
अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस को खुली चुनौती देते हुए सुनील बंसल ने कहा कि अगर विपक्ष का यह आरोप सच है कि चंपत राय ने पैसा इकट्ठा किया है, तो वे इसके सबूत लेकर आएं. उन्होंने कहा कि विपक्ष चंपत राय की कथित संपत्ति को अपने नाम कर ले और देश में उनकी जहां भी संपत्ति है, उस पर बुलडोजर चलवा दे. उन्होंने आगे दावा किया कि चंपत राय के पास संपत्ति के नाम पर सिर्फ एक थैला, एक कुर्ता और एक धोती है. वे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह अपना जीवन जीते हैं.
इस्तीफे की खबरों पर सस्पेंस और नैतिकता की बात
पिछले दो दिनों से मीडिया में चल रही चंपत राय के इस्तीफे की खबरों पर उनके भाई ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है. यह सब खबरें सिर्फ चैनलों पर ही दिखाई जा रही हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर चंपत राय ने अपना इस्तीफा दिया भी होगा, तो उन्होंने ऐसा सिर्फ अपनी नैतिकता के आधार पर किया होगा. दूसरी तरफ, इस मामले पर ट्रस्ट के गोपाल राव ने भी बयान दिया है कि ऐसा लगता है जैसे प्रचार माध्यम चंपत राय का इस्तीफा लेकर ही मानेंगे.
प्रोफेसर से राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव बनने का सफर
आपको बता दें कि चंपत राय ने फिजिक्स से एमएससी करने के बाद बिजनौर के धामपुर में स्थित आरएसएम डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में काम शुरू किया था. वह अपने छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे. बाद में उन्होंने संघ और विश्व हिंदू परिषद के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया और पूर्णकालिक प्रचारक बन गए. अयोध्या में राम मंदिर के संघर्ष से लेकर उसके निर्माण तक में उनकी बहुत बड़ी भूमिका रही है, जिसके बाद वह इस ट्रस्ट के महासचिव पद तक पहुंचे.
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