राम मंदिर की व्यवस्था पर चंपत राय की चिट्ठी, सामने आई कई अहम बातें

संजय शर्मा

20 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 20 2026 3:45 PM)

चंपत राय की चिट्ठी में राम मंदिर की व्यवस्थाओं और निर्माण से जुड़ी जानकारी दी गई है. इसमें निःशुल्क दर्शन पास, प्रसाद, बुजुर्गों और दिव्यांगों की सुविधाओं का उल्लेख है.

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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से जुड़ी व्यवस्था और मंदिर निर्माण को लेकर महासचिव चंपत राय की एक चिट्ठी सामने आई है. इसमें मंदिर की व्यवस्थाओं, आर्थिक पारदर्शिता, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और निर्माण प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं की जानकारी दी गई है. चिट्ठी में दावा किया गया है कि मंदिर ट्रस्ट की सेवाओं में पारदर्शिता और निःशुल्क व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है.

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दर्शन और आरती पास समेत कई सेवाएं मुफ्त

चंपत राय के मुताबिक, ट्रस्ट की ओर से दर्शन पास, आरती पास और प्रसाद जैसी सेवाओं के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता. मंदिर के अर्चक मुख्य रूप से भगवान राम की पूजा, राग-भोग और धार्मिक पाठ की सेवाओं में लगे रहते हैं. श्रद्धालुओं को दर्शन कराने या पूजा करवाकर दक्षिणा लेने की व्यवस्था मंदिर के अर्चकों की जिम्मेदारी नहीं है. मंदिर परिसर से निकलने वाले प्रत्येक दर्शनार्थी को भगवान का प्रसाद पैकेट भी निःशुल्क दिया जाता है.

बैंक खातों में चेक बुक नहीं, ऑनलाइन होता है भुगतान

चिट्ठी में आर्थिक व्यवस्था को लेकर भी विस्तार से जानकारी दी गई है. बताया गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के खाते स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं. ट्रस्ट ने इन खातों के लिए चेक बुक नहीं ली है.

चिट्ठी में दी गई जानकारी के अनुसार, भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम और आरटीजीएस से किया जाता है. नकद लेन-देन नहीं होता. ट्रस्ट से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन में सरकारी नियमों का पालन करने का दावा किया गया है.

जीएसटी, टीडीएस, रजिस्ट्री और स्टांप फीस, लेबर सेस, पीएफ और ईएसआई जैसे सभी सरकारी कर और शुल्क जमा किए जाने की बात भी चिट्ठी में कही गई है.

दो स्तर पर होता है ऑडिट

ट्रस्ट के खातों की जांच को लेकर भी जानकारी दी गई है. चिट्ठी के मुताबिक, आंतरिक अंकेक्षण दिल्ली की एक ऑडिट फर्म करती है. इसके बाद वैधानिक ऑडिट दिल्ली की दूसरी प्रतिष्ठित फर्म वी. शंकर अय्यर द्वारा किया जाता है. चंपत राय ने इसे आर्थिक व्यवस्था में पारदर्शिता का हिस्सा बताया है.

भीड़ के बावजूद दो घंटे में दर्शन का दावा

चिट्ठी में मंदिर में दर्शन व्यवस्था का भी उल्लेख है. इसमें कहा गया है कि देश के अन्य मंदिरों की तुलना में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को कम समय में व्यवस्थित दर्शन कराने की व्यवस्था है.

भीड़ के समय भी सामान्य दर्शन में अधिकतम करीब दो घंटे लगने का दावा किया गया है. हालांकि, जो श्रद्धालु मंदिर परिसर के सभी प्रमुख हिस्सों को देखना चाहते हैं, उन्हें अतिरिक्त समय देना पड़ता है. इनमें लोअर प्लिंथ पर रामायण प्रसंग, परिक्रमा मार्ग के मंदिर, शेषावतार मंदिर, सप्त मंदिर, कुबेर टीला और बलिदानी स्मारक शामिल हैं.

बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए सुगम दर्शन

न्यास की ओर से बुजुर्ग, दिव्यांग और शारीरिक रूप से अस्वस्थ श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध होने की बात कही गई है. जरूरतमंद श्रद्धालु निःशुल्क व्हीलचेयर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

तीर्थ यात्री सेवा केंद्र और राम कचहरी ऑफिस से दस्तावेज दिखाकर 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, दिव्यांग, शारीरिक रूप से अस्वस्थ लोग, गर्भवती महिलाएं और पांच साल से छोटे बच्चों की माताएं निःशुल्क सुगम दर्शन पास ले सकती हैं. उनके साथ एक व्यक्ति को भी यह सुविधा मिलती है. चिट्ठी में कहा गया है कि इसके लिए किसी प्रभाव या पहचान की जरूरत नहीं है.

भजन-कीर्तन के लिए भी निःशुल्क व्यवस्था

मंदिर परिसर में भजन, कीर्तन, सुंदरकांड, संगीत और नृत्य सेवा करने वाले समूहों के लिए भी व्यवस्था की जाती है. इच्छुक समूहों को कार्यक्रम के लिए जरूरी सुविधा निःशुल्क देने की बात कही गई है. कार्यक्रम के बाद उनके लिए मंदिर दर्शन की व्यवस्था भी की जाती है.

2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद खुला मंदिर निर्माण का रास्ता

चंपत राय ने चिट्ठी में राम मंदिर निर्माण की पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 2019 के सर्वसम्मत फैसले के बाद मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ.

चिट्ठी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भारत सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र नाम से स्वतंत्र ट्रस्ट का गठन किया. इसमें कुल 15 ट्रस्टियों की व्यवस्था की गई. इसमें निर्मोही अखाड़े के लिए एक स्थान और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए एक स्थान सुरक्षित रखा गया.

स्थानीय जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के प्रतिनिधियों को पदेन न्यासी बनाया गया. मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के तौर पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी नृपेन्द्र मिश्रा का नाम भी चिट्ठी में दिया गया है. वरिष्ठ अधिवक्ता केशव पारासरन को संस्थापक न्यासी बताया गया है. इसके अलावा उडुपी, पुणे, प्रयागराज और हरिद्वार से संतों, अयोध्या के एक संत और अन्य न्यासियों को भी शामिल किए जाने का उल्लेख है.

एलएंडटी और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का चयन

चिट्ठी में मंदिर निर्माण के लिए कंपनियों के चयन की प्रक्रिया का भी जिक्र है. इसमें कहा गया है कि स्वर्गीय अशोक सिंहल के सुझावों को नृपेन्द्र मिश्रा के सामने रखा गया. इन्हीं सुझावों के आधार पर मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो को चुना गया.

परियोजना सलाहकार यानी पीएमसी के तौर पर टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को चुने जाने की जानकारी भी दी गई है.

मंदिर के वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा का चयन अशोक सिंहल ने 1986 में किया था. बाद में भी उन्हीं को मंदिर वास्तुकार के रूप में रखा गया. परिसर के दूसरे भवनों के निर्माण के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म को चुना गया. इसके प्रमुख जय काकतीकर बताए गए हैं.

मंदिर निर्माण समिति में हर बड़े फैसले का दावा

चंपत राय की चिट्ठी में मंदिर निर्माण समिति की बैठकों का भी उल्लेख है. इसमें कहा गया है कि नृपेन्द्र मिश्रा ने अपनी सहायता के लिए कुछ लोगों को समिति से जोड़ा. इनमें पूर्व एनबीसीसी चेयरमैन अनूप मित्तल भी शामिल थे.

चिट्ठी के अनुसार मंदिर निर्माण समिति की बैठक सामान्य तौर पर हर महीने होती थी. कुछ समय तक बैठक 15 दिन में एक बार भी हुई. इसमें मंदिर निर्माण से जुड़े फैसले लिए जाते थे. दावा किया गया है कि समिति में निर्णय के बिना कोई काम आगे नहीं बढ़ाया गया.

चिट्ठी में यह भी कहा गया है कि मंदिर निर्माण से जुड़े सभी फैसलों में नृपेन्द्र मिश्रा की प्रमुख भूमिका रही.

कोरोना काल से जून 2026 तक मंदिर निर्माण

चंपत राय ने मंदिर निर्माण की गति का श्रेय भी नृपेन्द्र मिश्रा को दिया है. चिट्ठी में कहा गया है कि जून 2020 में कोरोना काल के दौरान शुरू हुआ पत्थरों से बना विशाल मंदिर जून 2026 तक समाज को समर्पित हो गया.

चिट्ठी के अनुसार निर्माण के दौरान जब भी कोई तकनीकी या दूसरी बड़ी समस्या सामने आई, नृपेन्द्र मिश्रा ने देश के विशेषज्ञों को अयोध्या बुलाकर उनकी सलाह ली. उनके सुझावों के आधार पर समस्याओं का समाधान किया गया. इसमें यह भी कहा गया है कि कई विशेषज्ञों ने सेवाभाव से अपनी राय दी और ट्रस्ट से कोई पारिश्रमिक नहीं लिया.

अनूप मित्तल की भूमिका का भी जिक्र

चिट्ठी में पूर्व एनबीसीसी चेयरमैन अनूप मित्तल की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है. उन्हें मंदिर निर्माण समिति का सदस्य और सिविल इंजीनियर बताया गया है.

चंपत राय के मुताबिक अनूप मित्तल इंजीनियरिंग से जुड़े मामलों में नृपेन्द्र मिश्रा के सलाहकार रहे. चिट्ठी में यह भी कहा गया है कि नृपेन्द्र मिश्रा से जुड़े कई लिखित कार्य अनूप मित्तल तैयार करते थे.

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