UP में चंद्रशेखर आजाद ने फूंका चुनावी बिगुल, 45 उम्मीदवारों की पहली सूची में ब्राह्मण-ठाकुर की नो एंट्री

कुमार अभिषेक

01 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 1 2026 9:07 AM)

चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी ने 2027 के यूपी चुनाव के लिए 45 प्रभारियों की सूची जारी की है, जिसमें दलित, ओबीसी और मुस्लिम प्रत्याशियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है और सवर्णों को स्थान नहीं दिया गया है.

चंद्रशेखर आजाद
चंद्रशेखर आजाद
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं. भीम आर्मी प्रमुख और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने अपने 45 विधानसभा प्रभारियों (संभावित उम्मीदवारों) की पहली सूची जारी कर चुनावी बिगुल फूंक दिया है. चंद्रशेखर की इस पहली लिस्ट ने राज्य के सियासी समीकरणों को गर्मा दिया है.

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दलित, ओबीसी और मुस्लिम पर फोकस

चंद्रशेखर आजाद की पहली लिस्ट में बहुजन राजनीति के 85 बनाम 15 के फॉर्मूले पर केंद्रित दिखती है. जारी किए गए 45 नामों में 18 दलित, 16 ओबीसी (पिछड़े वर्ग), 10 मुस्लिम और 01 सिख शामिल हैं. इस पहली लिस्ट में सामान्य (सवर्ण) वर्ग के किसी भी उम्मीदवार को जगह नहीं दी गई है. हाथरस सीट से हाल ही में बीजेपी छोड़ पार्टी में शामिल हुए आदित्य प्रकाश वर्मा को प्रभारी बनाया गया है.

'एकला चलो' की राजनीति और सपा-कांग्रेस की बढ़ीं मुश्किलें

चंद्रशेखर आजाद के इस कदम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि वह फिलहाल उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. हालांकि चंद्रशेखर ने पहले कहा था कि भाजपा को हराने के लिए उनके दरवाजे समान विचारधारा वाले दलों के लिए खुले हैं, लेकिन पहली ही सूची में 45 प्रत्याशियों के ऐलान ने समाजवादी पार्टी (सपा) और इंडिया गठबंधन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.

यदि चंद्रशेखर आजाद और मायावती (बसपा) दोनों ही अकेले चुनाव लड़ते हैं, तो राज्य में दलित, मुस्लिम और पिछड़ा (PDA) वोट बैंक बंटेगा. विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के इस वोट बिखराव का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिल सकता है.

भदोही का नाम बदलने पर मायावती ने की योगी सरकार की तारीफ

इसी बीच, उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक और दिलचस्प मोड़ देखने को मिला. योगी आदित्यनाथ सरकार ने वाराणसी के पास स्थित भदोही जिले का नाम बदलकर पुन 'संत रविदास नगर' करने का फैसला किया है. मायावती ने अपने शासनकाल में दिए गए इस नाम को वापस बहाल करने पर योगी सरकार का आभार जताया और इस कदम की खुलकर तारीफ की.

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