आजाद समाज पार्टी (कांसीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना (उत्तर प्रदेश) से सांसद चंद्रशेखर आजाद की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं. गाजियाबाद की एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने करीब 8 साल पुराने मारपीट के एक मामले में चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant - NBW) जारी कर दिया है. यह कार्रवाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान लगातार गैर-हाजिर रहने और समन की तामील न होने के कारण की गई है.
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क्या है 8 साल पुराना पूरा मामला?
यह पूरा मामला गाजियाबाद के साहिबाबाद पुलिस स्टेशन का है. आरोप है कि 2018 में एक शादी समारोह के दौरान भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और उनके समर्थकों का एक व्यक्ति से विवाद हो गया था, जिसमें थप्पड़ मारने और मारपीट करने का आरोप लगा था.
पीड़ित धर्मेंद्र (निवासी ग्राम नूरपुर) की शिकायत पर साहिबाबाद थाने में आईपीसी की धारा 332 और 305 समेत विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी. मामले की जांच के बाद पुलिस ने चंद्रशेखर आजाद और उनके सहयोगी गुलजार सिद्दीकी के खिलाफ चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी.
कोर्ट में पेश न होने पर NBW जारी
पीड़ित पक्ष के वकील भजन लाल गौतम के अनुसार, मामला दर्ज होने और चार्जशीट दाखिल होने के बाद से ही चंद्रशेखर आजाद कोर्ट की कार्यवाहियों में शामिल नहीं हो रहे थे. बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद उनकी ओर से कोई उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई.
कोर्ट ने मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट जारी किया है. पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने अब अभियुक्त के उपस्थित न होने की स्थिति में कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रार्थना पत्र भी कोर्ट में दे दिया है.
अब आगे क्या होगा?
यदि चंद्रशेखर आजाद अगली नियत तिथि पर अदालत के समक्ष पेश नहीं होते हैं या इस वारंट पर उच्च अदालत से राहत प्राप्त नहीं करते हैं, तो पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करना होगा। वहीं, कोर्ट कुर्की की दिशा में भी आदेश जारी कर सकती है.
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