Charchit Chehra: कौन हैं आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद, जिन्हें मायावती ने सौंपी कमान? जानिए इस फैसले के पीछे की कहानी

न्यूज तक डेस्क

• 12:30 PM • 08 Sep 2026

Charchit Chehra Ishan Anand: बसपा प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद को किनारे कर उनके छोटे भाई ईशान आनंद को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड छोड़कर 15 राज्यों के संगठन की समीक्षा और मुख्य सेक्टर प्रभारी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. लंदन से लॉ की पढ़ाई कर चुके 27 वर्षीय ईशान अब बीएसपी के नए Gen Z चेहरे के तौर पर नजर आ रहे हैं. जानिए कौन हैं ईशान आनंद और इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी.

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मायावती ने ईशान आनंद को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी!
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब-जब ये माना गया कि अब बहुजन समाज पार्टी बीएसपी की कहानी खत्म हो चुकी है, तब-तब मायावती ने अपने फैसलों से पूरे देश को हैरान किया है. 2007 में उन्होंने ब्राह्मण+दलित का ऐसा सोशल इंजीनियरिंग का ऐसा फॉर्मूला निकाला था जिसने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक राजनीति हिला दी थी. लेकिन आज, साल 2026 में मायावती यूपी की सड़कों पर नहीं, बल्कि अपने घर के भीतर एक ऐसी उत्तराधिकारी इंजीनियरिंग कर रही हैं, जिसने पूरी बीएसपी के कैडर को सन्नाटे में डाल दिया है. 

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एक भतीजे को पहले राजा बनाना, फिर उसे अपरिपक्व कहकर अर्श से फर्श पर पटक देना. और अब अचानक लंदन से पढ़कर लौटे दूसरे भतीजे के सिर पर ताज रख देना! अभी कौन ये डिकोड कर सकता है कि बहन मायावती की इस उत्तराधिकारी इंजीनियरिंग के ब्लूप्रिंट का असली खेल क्या है? कौन हैं ईशान आनंद जो अपने ही सगे भाई और चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद का पावरफुल बुआ के हाथों हुआ तख्तापलट देखते-देखते तख्त के नए वारिस घोषित हो गए? उत्तर प्रदेश की राजनीति के इस पावरफुल उलटफेर के चलते देश की राजनीति के रातोंरात चर्चित चेहरा बन गए हैं ईशान आनंद. आइए विस्तार से जानते हैं उनकी पूरी कहानी.

आकाश का काम ईशान को सौंपा!

राजनीति में उत्तराधिकारी चुने जाते हैं लेकिन इतने गाजे-बाजे के साथ नहीं. मायावती तो वो हस्ती हैं जिनके फैसले किसी पार्टी बैठक, कार्यसमिति या कार्यकारिणी में लिए नहीं जाते. जो उन्होंने सोचा वही बीएसपी की लाइन होती है लेकिन उत्तराधिकारी खासकर भतीजे आकाश आनंद को लेकर उन्होंने सब मिलाकर तीसरी बार खुद ही अपना फैसला पलटा है. तीसरी बार आकाश आनंद को इस तरह के कोप का सामना करना पड़ा है.

7 सितम्बर 2026 को मायावती ने ईशान आनंद को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड छोड़कर देश के 15 राज्यों के संगठन की समीक्षा करने और मुख्य सेक्टर प्रभारी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. दिलचस्प बात यह है कि यह वही काम है जो अब तक आकाश आनंद संभाल रहे थे.

ईशान राज्यों का दौरा करेंगे, पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठकें करेंगे और वहां की संगठन की रिपोर्ट तैयार करके अपने पिता और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को सौंपेंगे. विदेश से पढ़े बीएसपी के मॉडर्न Gen Z फेस बनेंगे जो चंद्रशेखर आजाद जैसे युवा दलित नेताओं के असर को काउंटर करने और पढ़े-लिखे दलित युवाओं को पार्टी से जोड़ने का काम करेंगे. वैसे यही सब आकाश आनंद को भी करना था. लोग इसे उत्तराधिकारी बदलने की तरह देख रहे हैं लेकिन मायावती पिछले साल जनवरी में कह चुकी हैं कि अपने जीवनकाल में कभी उत्तराधिकारी का नाम नहीं बताने वाली.

पहले से ही मायावती कर रही थी प्लानिंग?

जनवरी 2025 में जब बुआ मायावती ने ईशान आनंद का परिचय अपने कैडर से कराया था जब कहां किसी को भनक थी कि वो आकाश आनंद को आगे रखकर प्लान बी पर भी काम कर रही हैं. दलित युवाओं और पढ़े-लिखे कैडर को साधने के लिए मायावती का नया साइलेंट वेपन ईशान बनने वाले हैं. जन्मदिन के मौके पर ईशान पहली बार पार्टी और किसी राजनीतिक मंच पर दिखे थे.

इसके बाद पार्टी के कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंसों और बैठकों में भी शामिल हुए. बीएसपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और समीक्षा बैठकों में उनकी मौजूदगी से जरा-जरा सी हवा लग रही थी कि आगे उन्हें कोई बड़ी भूमिका मिल सकती है. डेढ साल में बुआ ने ऐसी छलांग लगवाई कि पार्टी में वो सीधे नंबर 3 पर आ गए. 

कौन हैं ईशान आनंद?

27 साल के ईशान आनंद, मायावती के भाई और बीएसपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के छोटे बेटे हैं. आकाश आनंद के सगे छोटे भाई हैं. ईशान की लाइफ जर्नी और पहचान अब तक विशुद्ध रूप से नॉन-पॉलिटिकल रही है. उन्होंने स्कूलिंग नोएडा, दिल्ली से की. लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर से लॉ की पढ़ाई की. पढ़ाई पूरी कर भारत लौटने के बाद, वे किसी राजनीतिक दलदल से दूर रहकर अपने परिवार के रियल एस्टेट और होटल बिजनेस को संभाल रहे थे. उनके सामने ही बुआ ने बड़े भाई आकाश को बीएसपी का भविष्य घोषित किया था. ईशान आनंद की शादी नोएडा के बिजनेसमैन परिवार की बेटी से 24 अप्रैल 2025 को हरियाणा में हुई. ईशान आनंद की लव मैरिज हुई है और उन्होंने अंतरजातीय विवाह किया है. उनकी ससुराल वाले पंजाबी खत्री परिवार के हैं. हालांकि उनकी फैमिली लाइफ के बारे में अभी बहुत सीमित जानकारियां सार्वजनिक हैं.

बसपा और मायावती का सफर!

बीएसपी के संस्थापक कांशीराम थे जिनसे 1977 की एक मुलाकात ने मायावती की जिंदगी बदल दी. तब वो स्कूल टीचर हुआ करती थी. आईएएस बनने की तैयारी किया करती थी. कांशीराम ने उनकी जिंदगी की दशा और दिशा ये कहते हुए बदल दी कि तुम्हें एक दिन ऐसी नेता बनाऊंगा कि आईएएस फाइलें लेकर तुम्हारे आगे-पीछे घूमेंगे. मायावती सारे सपने भूलकर पिता के विरोध के बाद भी एक सूटकेस लेकर कांशीराम के साथ बहुजन आंदोलन के लिए निकल पड़ीं. 14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की स्थापना हुई, तो मायावती संस्थापक सदस्य बनीं. सचमुच कांशीराम ने मायावती को ऐसा तराशा कि वो न केवल बहुजन आंदोलन की सबसे बड़ी चेहरा बनीं बल्कि वो उस मुकाम पर पहुंचीं कि यूपी जैसे राज्य के आईएएस फाइलें लेकर उनके पीछे चलने लगे. 

बसपा में आनंद कुमार का कद

मायावती बहुजन आंदोलन और राजनीति के लिए समर्पित हुईं कि उन्होंने परिवार बनाने का इरादा भी छोड़ दिया. शादी नहीं की. अपना कोई परिवार नहीं बनाया. पिता प्रभु दास और मां रामरती की फैमिली ट्री को ही अपना मान लिया. मायावती की फैमिली ट्री में 6 भाई, 2 बहनें हैं. मायावती छठें नंबर पर हैं. आनंद कुमार परिवार के सबसे छोटे भाई हैं जो आज से नहीं, बरसों से बरस से मायावती के सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगी हैं. आकाश और ईशान आनंद कुमार के ही बेटे हैं. जिनकी अदला-बदली करके मायावती बीएसपी के लिए भविष्य का नेता तलाश रही हैं.

पार्टी में आनंद कुमार की हैसियत सुपर बॉस की है. आनंद कुमार कभी नोएडा अथॉरिटी में क्लर्क हुआ करते थे. जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं, तो उन्होंने नौकरी छोड़कर रियल एस्टेट, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कदम रखा और बड़े बिजनेसमैन बनते गए लेकिन खुद को हमेशा हेडलाइन, लाइमलाइट से दूर रखा. पार्टी और मायावती की लाइफ में उनका रोल परम विश्वसनीय बैक-एंड मैनेजर का है. कभी खुद चुनाव नहीं लड़े लेकिन कहा जाता है कि पार्टी के कागजी काम से लेकर फंड मैनेजमेंट तक सब कुछ उनके जिम्मे होता है. 

आकाश और ईशान को लेकर पॉलिटिकल इंजीनियरिंग!

बहन मायावती का ऐसा अटूट विश्वास जीता कि आज पार्टी के भीतर कोई भी बड़ा रणनीतिक फैसला आनंद कुमार की सहमति के बिना नहीं होता. राजनीतिक रसूख का नतीजा है कि मायावती ने उनके दोनों बेटों, पहले आकाश आनंद और अब ईशान आनंद को बीएसपी के भविष्य की कमान सौंपकर अपनी पारिवारिक और पॉलिटिकल इंजीनियरिंग को आगे बढ़ाया है. मायावती के पास आनंद कुमार के बच्चों में ही बीएसपी का फ्यूचर लीडर तलाश करना मजबूरी बन चुका है.

कुछ समय पहले तक जिस आकाश आनंद को मायावती ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, जिन्हें भविष्य का बीएसपी प्रमुख माना जा रहा था आज उनकी राजनीतिक हैसियत सिर्फ एक बीएसपी समर्थक की रह गई है. आकाश आनंद को दूध की मक्खी की तरह किनारे कर, मायावती ने अब अपने भाई आनंद कुमार के छोटे बेटे यानी ईशान आनंद को 15 राज्यों का जिम्मा सौंपकर पार्टी रिवाइवल की नई इंजीनियरिंग शुरू कर दी है. आकाश आनंद पर बार-बार 'अपरिपक्व' होने का ठप्पा लगाने से भी परहेज नहीं किया. 

आकाश आनंद पर क्यों भड़की मायावती?

मायावती की राजनीति पर नजर रखने वाले हैरान होंगे कि जो बुआ कल तक आकाश के आक्रामक तेवरों पर तालियां बजा रही थीं, वो इतनी नाराज क्यों हो गईं कि पूरे परिवार का पावर बैलेंस ही बदल दिया? एक थ्योरी ये है कि आकाश आनंद के आक्रामक भाषणों से मायावती असहज हुईं. दूसरी चर्चित थ्योरी है उनके ससुराल की. डॉ. अशोक सिद्धार्थ बीएसपी के राज्यसभा सांसद रहे. मार्च 2023 में उनकी बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ से आकाश की शादी हुई. 

अशोक सिद्धार्थ और मायावती का परिवार एक-दूसरे के लिए अनजान नहीं थे. पेशे से डॉक्टर अशोक सिद्धार्थ तीन दशकों से पार्टी से जुड़े रहे. शादी के बाद ऐसी कहानियां बनने लगीं कि अशोक सिद्धार्थ ने दामाद आकाश आनंद के प्रभाव का इस्तेमाल कर संगठन के भीतर टिकट बंटवारे में दखल देना और अपनी एक समानांतर युवा लॉबी खड़ी करना शुरू किया जिससे मायावती बेहद असहज होने लगीं. 

मायावती को लगा कि ससुर-दामाद की जोड़ी पार्टी के मिशन पर हावी हो रही है, जिसके चलते उन्होंने मार्च 2025 में आकाश को हटाते हुए आरोप लगाया कि वे अपने ससुर के प्रभाव में आकर 'अहंकारी और स्वार्थी' हो गए हैं. हालांकि, सितंबर 2025 में सार्वजनिक माफीनामे के बाद दोनों की वापसी हुई, लेकिन आदतों में सुधार न होने और महाराष्ट्र जैसे चुनावों में मनमानी करने के कारण 2 अगस्त को मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया और इसके ठीक एक महीने बाद आकाश आनंद को भी सभी पदों से मुक्त कर समधी के पूरे दखल को जड़ से खत्म कर दिया लेकिन आकाश के बुरे दिन खत्म नहीं हुए.

ईशान को चुनने की वजह क्या?

मायावती ने सार्वजनिक बयानों में आकाश आनंद की पत्नी प्रज्ञा का नाम तो नहीं लिया लेकिन वो लड़की कहकर गुस्सा निकाला कि अशोक सिद्धार्थ अपनी बेटी प्रज्ञा के जरिए आकाश आनंद को अपने पूरी तरह प्रभाव में ले चुके हैं. मायावती की नजर में आकाश आनंद की शादी के बाद परिवार और संगठन में जो भी दूरियां आईं, उसकी असली वजह डॉ. प्रज्ञा सिद्धार्थ और उनके पिता ही हैं. आकाश बुआ से ज्यादा अपनी पत्नी और ससुर के प्रभाव में काम कर रहे थे. मायावती को अंदेशा था कि प्रज्ञा अपने पिता अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक स्वार्थों से मुक्त नहीं हो पा रही हैं, जिसके कारण आकाश का राजनीतिक करियर खराब हो रहा था. मायावती अब जिस भतीजे ईशान आनंद को चुना है उनकी पत्नी, ससुराल वाले पूरी तरह गैर-राजनीतिक है.

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मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को क्यों हटाया? असली कहानी जानिए...