यूपी के एक छोटे गांव से भारतीय वायुसेना के एयर मार्शल पद तक पहुंचकर बड़े युद्धों में देश को विजय दिलाई. चाहे वो करगिल का युद्ध हो या फिर ऑपरेशन सिंदूर, फाइटर पायलट के रूप में ऐसे जांबाजी दिखाई कि कहीं युद्ध की बाजी पलट दी तो कहीं दुश्मनों के मंसूबों को एक झटके में नाकाम कर दिया. हम बात कर रहे हैं भारतीय वायुसेना के जांबाज रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्राा की. जितेंद्र मिश्राा को राम मंदिर ट्रस्ट का नया सीईओ बनाया गया है. इस नई जिम्मेदारी के साथ ही जितेंद्र मिश्रा चर्चा में आ गए हैं और चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में जानिए उनकी पूरी कहानी.
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39 साल से ज्यादा की सेवा, बने ऑपरेशन सिंदूर के हीरो
ऐसा पहली बार हुआ है कि राम मंदिर ट्रस्ट के लिए किसी को सीईओ नियुक्त किया गया हो. जितेंद्र मिश्रा के कंधों पर ये जिम्मेदारी दी गई है. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा एक पूर्व फाइटर पायल रहे जिन्होंने इंडियन एयर फोर्स में 39 साल से ज्यादा तक सेवा की. एयर मार्शल रहे जितेंद्र मिश्रा ने जनवरी 2025 में वेस्टर्न एयर कमांड की जिम्मेदारी संभाली थी, जो IAF के सबसे जरूरी ऑपरेशनल कमांड में से एक है. और उसके कुछ ही महीनों बाद, इन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कमांड को लीड किया.
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब पाकिस्तान ने भारत की S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की लोकेशन ट्रेस करने के लिए अपने स्लीपर सेल एक्टिव किए, तब जितेंद्र मिश्रा ने बेहद आक्रामक रणनीति अपनाते हुए दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम कर दिया था. पाकिस्तान ने भारत पर हवाई हमले की जो भी कोशिशें की, उसमें उसके हाथ सिर्फ नाकामी ही लगी. इसीलिए जितेंद्र मिश्रा को 'ऑपरेशन सिंदूर' के हीरोज में से एक कहा जा रहा है.
1999 के कारगिल युद्ध में लगाया था गजब का जुगाड़!
ये तो थी ऑपरेशन सिंदूर की बात इससे पहले 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान जितेंद्र मिश्रा उस टीम का एक बेहद अहम हिस्सा थे, जिसने मिराज-2000 फाइटर जेट्स पर लेजर गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था. उनके इसी तकनीकी "जुगाड़" और सूझबूझ की बदौलत भारतीय सेना ने टाइगर हिल और मुंथो ढालों पर दुश्मनों के बंकरों को पूरी तरह तबाह कर दिया, जिससे युद्ध की बाजी पलट गई थी.
जितेंद्र मिश्रा की जर्नी
जितेंद्र मिश्रा के पास अपने 43 साल के शानदार सैन्य करियर में 18 से ज्यादा तरह के लड़ाकू विमान उड़ाने और 3,000 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव है. रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्राा की कहानी बेहद प्रेरणादायक है.
जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से यूपी के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं. इनका जन्म एक साधारण पृष्ठभूमि में हुआ, लेकिन सपने बहुत ऊंचे और आसमान छूने वाले थे. इन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी खड़कवासला से ट्रेनिंग ली और दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में बतौर फाइटर पायलट कमीशन हासिल किया. ग्रुप कैप्टन रहे जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ब्रांच में पायलट के तौर पर शामिल हुए थे, वह एक फाइटर कॉम्बैट लीडर, टेस्ट पायलट और अमेरिका की एयर यूनिवर्सिटी के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के पूर्व छात्र भी रहे हैं.
जितेंद्र मिश्राा ने एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल में सीनियर टेस्ट फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर, मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के चीफ टेस्ट पायलट, एयरक्राफ्ट अपग्रेड के लिए प्रोजेक्ट डायरेक्टर और Su-30 MKI एयरबेस के चीफ ऑपरेशन्स ऑफिसर जैसे पदों पर काम किया है.
क्या होगी जितेंद्र मिश्रा की जिम्मेदारी?
अब आपको बताते हैं राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के पास क्या जिम्मेदारियां होंगी. ट्रस्ट के पहले सीईओ के रूप में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्राा के पास मंदिर की सभी प्रशासनिक, वित्तीय और सुरक्षा प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी. वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता कि जिम्मेदारी के तहत मंदिर में आने वाले रोज के नकद चढ़ावे, ऑनलाइन डोनेशन और सोने-चांदी के गुप्त दानों का पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड रखना.
हाल ही में लगे वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बाद, ट्रस्ट के पूरे अकाउंट्स का नियमित और कड़ा वित्तीय ऑडिट सुनिश्चित करना और राम मंदिर परिसर में चल रहे अरबों रुपये के निर्माण कामों के बजट को मंजूरी देना और खर्चों पर नजर रखना होगा. इसके अलावा भी नए सीईओ के पास कई जिम्मेदारियां होंगी.
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर गरमाई सियासत!
अब इस नई नियुक्ति पर सियासत भी शुरू हो गई है. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि पूजा-पाठ और मंदिर का प्रबंधन साधु-संतों की जिम्मेदारी है. RSS और बीजेपी ने एक पूर्व सैन्य अधिकारी को ऐसे काम में फंसा दिया है जो उनके कार्यक्षेत्र का नहीं है.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े पिछले विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिर में हुई पुरानी घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता. इन सियासी विवादों के बीच अब राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ की नियुक्ति के साथ ही नया सिस्टम बन गया है. इसके अलावा ट्रस्ट में 3 नए सदस्यों को शामिल किया गया है. इनमें अयोध्या से मदन मोहन पांडेय, दिल्ली से महेश भागचन्दका और शिकोहाबाद से निर्मला यादव का नाम शामिल है. उम्मीद यही की जा रही है कि इस नए सिस्टम के साथ राम मंदिर ट्रस्ट का संचालन बेहतर तरीके से हो पाएगा.
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