टीवी डिबेट्स और सोशल मीडिया पर बेबाकी और मुखर होकर अपनी राय रखने वाले समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी अक्सर चर्चा में रहते हैं. इनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. लेकिन अबकी बार राजकुमार भाटी ने ऐसा कुछ किया है जिसे लेकर चर्चा बहुत तेज है और सियायत गरमाई हुई है. राजकुमार भाटी को लेकर दो विवाद हैं. एक तो खबर ये कि उन्होंने हिंदू देवी देवताओं को भगवान नहीं मानने की शपथ ली है. दूसरा सोशल मीडिया पर ये दावा किया जा रहा है कि राजकुमार भाटी ने हिंदू धर्म छोडकर बौद्ध धर्म अपना लिया है. क्या है इस दावे की सच्चाई? कौन हैं राजकुमार भाटी और क्या है इनका सियासी सफर? चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में जानिए पूरी बात.
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कैसे चर्चा में आए राजकुमार भाटी?
14 अक्तूबर 1956 को डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपने लाखों समर्थकों के साथ हिंदू धर्म का त्याग कर बौद्ध धर्म अपनाया था. उस दौरान अंबेडकर ने अपने अनुयायियों को 22 प्रतिज्ञाएं दिलाई थीं. इनमें से शुरुआती 3 प्रतिज्ञाएं सीधे तौर पर हिंदू देवी-देवताओं की पूजा और मान्यताओं को नहीं मानने से संबंधित थीं. अंबेडकर को मानने वाले और बौद्ध धर्म को मानने वाले कई लोग आज भी इस शपथ को अक्सर दोहराते रहते हैं. इसी कड़ी में 20 अक्टूबर को दिल्ली के अंबेडकर भवन में भारतीय बौद्ध महासभा ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. राजकुमार भाटी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और शपथ ले रहे अंबेडकर समर्थकों के साथ उन्होंने भी सामूहिक तौर पर हिंदू देवी देवताओं को भगवान नहीं मानने की शपथ ले ली. ये वीडियो वायरल होने के बाद राजकुमार भाटी चर्चा में आ गए.
क्या राजकुमार भाटी ने अपना लिया बौद्ध धर्म?
दूसरी तरफ राजकुमार भाटी को लेकर ये चर्चा होने लगी कि उन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया है. हालांकि इस पर राजकुमार भाटी ने एक वीडियो जारी करके सफाई दी है. भाटी ने अपने वीडियो में कहा कि वह हिंदू धर्म में पैदा हुए थे और आज भी हिंदू हैं. बौद्ध धर्म के प्रति उनके मन में सम्मान है, लेकिन धर्म बदलने का न तो कोई इरादा है और न ही वह इसकी जरूरत समझते हैं.
राजकुमार भाटी ने कार्यक्रम के दौरान सामूहिक रूप से दोहराई जा रही प्रतिज्ञाओं को पढ़ा जरूर था, लेकिन उन्होंने खुद धर्म परिवर्तन की व्यक्तिगत शपथ नहीं ली थी. मंच पर राजकुमार भाटी को दूसरे लोगों के साथ शपथ को दोहराते हुए सुना जा सकता है.
सपा और बीजेपी में छिड़ी सोशल वॉर!
यूपी में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजकुमार भाटी को लेकर सामने आई इस खबर से सियासत गरमा गई है. बीजेपी नेताओं और उनके आईटी सेल ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करते हुए सवाल उठाया है कि क्या समाजवादी पार्टी आधिकारिक तौर पर हिंदू सनातन धर्म की मान्यताओं का विरोध करती है? इस पर भाटी ने कहा कि बीजेपी आईटी सेल उनके खिलाफ गलत नैरेटिव चला रहा है. उन्होंने कोई धर्म परिवर्तन नहीं किया है और वो हिंदू ही रहेंगे.
रामचरितमानस और मनुस्मृति पर भी उठाया है सवाल
राजकुमार भाटी अक्सर रामचरितमानस की चौपाइयों और मनुस्मृति को लेकर भी अक्सर सवाल उठाते रहे हैं. उनका कहना है कि ग्रंथ के कुछ हिस्सों में वंचित समाजों और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं, जिनका वे विरोध करते हैं. भाटी अक्सर रामचरितमानस की उन चौपाइयों पर खुलकर सवाल उठाते रहे हैं जहां इनके मुताबिक महिलाओं या दलित समाज को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां की गई हैं. भाटी सोशल मीडिया और पॉडकास्ट में ये भी सवाल उठा चुके हैं कि रामचरितमानस में कई जगह बिना वजह सिर्फ जन्म के आधार पर एक विशेष वर्ग खासकर ब्राह्मणों की तारीफ की गई है और उन्हें ज्यादा ऊंचा दिखाया गया है. भाटी के मुताबिक ये सामाजिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ है.
कौन हैं राजकुमार भाटी?
किसान पृष्ठभूमि से आने वाले राजकुमार भाटी यूपी के दादरी के रहने वाले हैं. 1965 में जन्मे भाटी की उम्र करीब 61 साल है. छात्र राजनीति और किसान आंदोलनों के जरिए अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले राजकुमार भाटी चुनाव भी लड़ चुके हैं. साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इन्हें इन्हीं के क्षेत्र दादरी सीट से उम्मीदवार बनाया था.
हालांकि तब भाटी चुनाव जीत नहीं पाए थे. राजकुमार भाटी को BJP के उम्मीदवार तेजपाल सिंह नागर ने हराया था. तब राजकुमार भाटी को 79,850 वोट मिले थे. जबकि जीतने वाले बीजेपी उम्मीदवार को 2,18,068 वोट मिले थे. जीत का अंतर अच्छा खासा था बीजेपी उम्मीदवार की करीब 1 लाख 38 हजार वोटों से जीत हुई थी. राजकुमार भाटी ने 3 बार विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन किसी भी चुनाव में उनके हाथ सफलता नहीं लग पाई. 2012 और 2017 के चुनाव में भी समाजवादी पार्टी ने इन्हें दादरी से ही उम्मीदवार बनाया था, लेकिन भाटी के हाथ सफलता नहीं लग पाई.
लगातार चुनाव हारने के बावजूद सपा ने दी बड़ी जिम्मेदारी!
लगातार 3 चुनाव हारने के बावजूद, किसान आंदोलनों में उनकी सक्रियता, छात्र राजनीति के समय से जमीनी जुड़ाव और टीवी डिबेट्स में दमदार तरीके से पक्ष रखने की वजह से पार्टी ने इन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की बड़ी जिम्मेदारी दे रखी है.
राजकुमार भाटी ने MA और LLB की है और राजनीति में आने से पहले पेशे से पत्रकार और लेखक भी रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने मिहिर भोज पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में भी सेवा दी है. भाटी के परिवार की बात करें तो इनकी पत्नी गृहिणी हैं और 4 बच्चे, तीन बेटियां और एक बेटा हैं. इनके माता-पिता किसान हैं.
विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा हाई!
यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे लेकर सियासी बयानबाजी और वाद-विवाद का दौर लगातार तेज होता जा रहा है. यूपी की राजनीति में भाटी वाला ये विवाद इसलिए बड़ा रूप ले रहा है क्योंकि एक तरफ जहां बीजेपी इसे बहुसंख्यक समाज की आस्था से जोड़कर समाजवादी पार्टी को घेर रही है, तो दूसरी तरफ सपा इसे दलित-पिछड़ा PDA की राजनीति के तहत बाबा साहब आंबेडकर के विचारों का सम्मान बताकर बीजेपी पर दुष्प्रचार का आरोप लगा रही है. दोनों तरफ से अपने-अपने वोट बैंक को रिझाने के लिए दांव खेले जा रहे हैं. देखना होगा भाटी का ये विवाद यूपी की सियासत में आगे कहां तक जाता है.
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