देवरिया: वेनेजुएला से आई मर्चेंट नेवी में काम करने वाले राकेश की बॉडी, शव की हालत देख परिवार के उड़ गए होश, जानें पूरा मामला

राम प्रताप सिंह

• 07:05 PM • 02 Jul 2026

Merchant Navy Employee Rakesh Chauhan Case: उत्तर प्रदेश के देवरिया के मर्चेंट नेवी कर्मी राकेश चौहान की वेनेजुएला में संदिग्ध मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. करीब एक महीने बाद जब उनका शव घर पहुंचा तो दोबारा पोस्टमार्टम में कई महत्वपूर्ण अंग गायब होने का दावा सामने आया. अब पत्नी ने हत्या, अंग तस्करी और फर्जी दस्तखत का आरोप लगाकर निष्पक्ष जांच की मांग की है.

कौन हैं देवरिया के राकेश चौहान
कौन हैं देवरिया के राकेश चौहान
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Rakesh Chauhan Death Case: उत्तर प्रदेश के देवरिया से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं और गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाए. देवरिया के रहने वाले मर्चेंट नेवी कर्मी राकेश चौहान की वेनेजुएला में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. परिवार ने लाखों रुपये का कर्ज लेकर उन्हें विदेश भेजा था ताकि घर के हालात सुधर सकें, लेकिन अचानक कंपनी से एक फोन आया जिसने हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया. पहले कंपनी ने कहा कि राकेश जहाज पर गिरकर घायल हो गए हैं, फिर कहा गया कि हालत गंभीर है और शाम होते-होते खबर आई कि हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई.

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राकेश चौहान कौन थे?

राकेश चौहान उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले एक 33 वर्षीय युवक थे, जो अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य और सहारा थे. उनके परिवार में उनके बूढ़े पिता, पत्नी रंजना चौहान और एक महज 6 महीने का मासूम बेटा है. घर की तंग आर्थिक स्थिति को सुधारने और अपने परिवार को एक बेहतर भविष्य देने के लिए राकेश के परिजनों ने लाखों रुपये का कर्ज लेकर उन्हें विदेश भेजा था. राकेश मर्चेंट नेवी में फिटर (Fitter) के पद पर तैनात होकर वेनेजुएला गए थे, जहां ड्यूटी के दौरान ही संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी जान चली गई.

शव देखकर डॉक्टरों ने किया पोस्टमार्टम से इनकार, खुला राज

परिजनों के मुताबिक, कंपनी ने एक हफ्ते में शव भेजने का वादा किया था, लेकिन लगभग एक महीने बाद राकेश का शव देवरिया पहुंचा. जब पुलिस की मौजूदगी में स्थानीय डॉक्टरों ने शव को देखा, तो उन्होंने पोस्टमार्टम करने से साफ इनकार कर दिया, क्योंकि शव का पहले ही विदेश में पोस्टमार्टम किया जा चुका था, जिसकी जानकारी परिवार को नहीं दी गई थी. इसके बाद जिलाधिकारी (DM) के आदेश पर एक मेडिकल बोर्ड का गठन कर दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया.

दिल, दिमाग, किडनी, लिवर... सब गायब!

मेडिकल बोर्ड के दोबारा किए गए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ने पूरे प्रशासनिक अमले और परिवार को हिलाकर रख दिया. आरोप है कि राकेश के शरीर के अंदर से दिल (Heart), दिमाग (Brain), दोनों फेफड़े, लिवर, किडनी, स्प्लीन, पैनक्रियाज, पेट, आंतें और थायरॉइड बोन समेत कई महत्वपूर्ण अंग गायब थे. शरीर के मुख्य अंग न होने के कारण स्थानीय स्तर पर मौत की असली वजह भी साफ नहीं हो सकी है.

फर्जी दस्तखत और मानव अंगों की तस्करी की आशंका

अब इस खौफनाक सच के सामने आने के बाद राकेश की पत्नी रंजना चौहान अकेले ही अरबों रुपये की कंपनी के खिलाफ न्याय की जंग लड़ रही हैं. रंजना का आरोप है कि उनके पति की सोची-समझी साजिश के तहत हत्या की गई है और उनके अंगों की तस्करी की गई है.

रंजना ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी के लोगों ने उन्हें धमकी दी थी कि 'बॉडी रिसीविंग पेपर' पर साइन कर दो, वरना लाश को कहीं फेंक देंगे. इतना ही नहीं, रंजना का दावा है कि कंपनी ने उनके नाम के फर्जी हस्ताक्षर भी किए हैं. रंजना हमेशा अंग्रेजी में साइन करती हैं, लेकिन दस्तावेजों में 'आर रंजना' लिखकर हिंदी में फर्जी साइन किए गए.

इंसाफ की गुहार, स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग

6 महीने के मासूम बच्चे और बूढ़े ससुर के साथ रंजना अब भारतीय दूतावास और सरकार को पत्र लिखकर न्याय की भीख मांग रही हैं. रंजना ने मांग की है कि इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से आपराधिक जांच कराई जाए ताकि इस अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी या हत्या के पीछे छिपे बड़े चेहरों को बेनकाब किया जा सके और पीड़ित परिवार को न्याय व उचित बीमा मुआवजा मिल सके.

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