यह बच्चों के पराक्रम और CJI की गुगली की जीत...धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान

न्यूज तक डेस्क

27 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 27 2026 10:30 AM)

Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे छात्रों के पराक्रम और CJI की दूरदर्शिता (गुगली) की जीत बताया.

शंकराचार्य और धर्मेंद्र प्रधान
शंकराचार्य और धर्मेंद्र प्रधान
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Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है. विपक्षी दलों के हमलों के बीच अब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान भी सुर्खियों में आ गया है. शंकराचार्य ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज कसते हुए इसे छात्रों के संघर्ष, देश की तरुणाई के पराक्रम और देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की दूरदर्शिता की जीत बताया है.

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CJI की गुगली ने पलट दी बाजी

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पूरी घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक मंत्री का इस्तीफा भर नहीं है. उन्होंने व्यंग्य कसते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) का जिक्र किया और कहा कि CJI पर सीधा दबाव रहता है, लेकिन उन्होंने बड़ी बुद्धिमत्ता से एक ऐसी 'गुगली' फेंकी जिससे मामला घूमकर वहीं आ गया.

शंकराचार्य ने कहा, "अगर CJI ने नौजवानों और बच्चों के संदर्भ में वह टिप्पणी (कॉकरोच) न की होती, तो बच्चों में आक्रोश न जागता और यह संगठन खड़ा न होता. संगठन न बनता तो धरना-प्रदर्शन न होता और न ही धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होता."

कम से कम सीनाजोरी तो टली

जब शंकराचार्य से सवाल पूछा गया कि क्या सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफा देने से पूरा सिस्टम सुधर जाएगा? इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा, "सिस्टम तुरंत सही होगा या नहीं, यह अलग बात है; लेकिन कुछ जवाबदेही तो तय होगी और सत्ता में डर पैदा होगा. यहां तो चोर सीनाजोरी कर रहा था, कम से कम सीनाजोरी कुछ दिनों के लिए तो टल गई, इतना क्या कम है?" 

छात्रों का आंदोलन और राजनीतिक हलचल

यह पूरा मामला छात्रों के लगातार चल रहे विरोध प्रदर्शन और उनकी मांगों को लेकर शुरू हुआ था. छात्र अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरे थे, जिससे सरकार पर चौतरफा दबाव बन रहा था.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा गरम है कि क्या यह फैसला केवल सरकार का प्रशासनिक कदम है या बढ़ते जनदबाव और छात्र आंदोलन का असर. फिलहाल शंकराचार्य के इस बयान ने इस पूरी राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ दे दिया है.

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