IAS की नौकरी छोड़ दिव्या मित्तल ने किया बड़ा खुलासा, बताया यूपी में क्या होगा उनका अगला कदम

न्यूज तक डेस्क

• 12:24 PM • 29 Sep 2026

यूपी कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हुए बिना, आम जनता के सहयोग से एक नया स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने का ऐलान किया है.

दिव्या मित्तल
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उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित पूर्व प्रशासनिक अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा को अलविदा कहने के बाद अपने अगले कदम से पर्दा उठा दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह अब राजनीति के मैदान में उतरेंगी, लेकिन किसी भी स्थापित राजनीतिक दल का दामन नहीं थामेंगी. दिव्या मित्तल का लक्ष्य आम जनता के सहयोग से एक ऐसा स्वतंत्र राजनीतिक मंच तैयार करना है, जिसकी नींव सीधे लोगों की जमीनी समस्याओं और सवालों पर टिकी हो.

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15 सितंबर 2026 से अपना प्रशासनिक कार्यकाल आधिकारिक रूप से समाप्त करने के बाद, दिव्या ने अपने इस नए सफर की रूपरेखा देश के सामने रखी है.

उत्तर प्रदेश ही क्यों?

अपनी नई राजनीतिक पारी के लिए उत्तर प्रदेश को चुनने की वजह बताते हुए दिव्या मित्तल ने कहा कि यह राज्य उनके लिए सिर्फ काम करने की जगह नहीं रहा. यहाँ के लोगों ने उन्हें एक अधिकारी के बजाय परिवार की बेटी की तरह प्यार और सम्मान दिया है. उनका मानना है कि इतिहास गवाह है कि उत्तर प्रदेश ने हमेशा देश को नई दिशा दिखाई है.

उन्होंने लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति को 'मसीहा' मानकर इंतजार करने के बजाय, बदलाव की शुरुआत जनता को खुद अपने स्तर से करनी होगी.

व्यवस्था की कमियों पर उठाए सवाल

अपने 13 साल के प्रशासनिक अनुभव को साझा करते हुए दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि उनके लिए राजनीति किसी पद को पाने का जरिया नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज बनने का माध्यम है जिनकी फरियाद सरकारी दफ्तरों की फाइलों में दबकर रह जाती है. उन्होंने अपने कार्यकाल के दो प्रमुख किस्से साझा किए:

मिर्जापुर का स्कूल मामला: मिर्जापुर के लहुरियादह में जब वह पानी के प्रोजेक्ट का जायजा ले रही थीं, तब एक महिला ने उनसे कोई निजी मदद मांगने के बजाय गांव के 5वीं तक के स्कूल को आगे बढ़ाने की मांग की. दिव्या के प्रयासों से कागजी मंजूरी तो मिल गई, लेकिन 3 साल बीत जाने के बाद भी स्कूल की इमारत नहीं बन सकी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियम और बजट थे, तो काम क्यों रुका? कमी संसाधनों की नहीं, बल्कि प्रशासनिक नीयत की थी.

पन्नी में रखे पट्टे के कागज: राजस्व विभाग में तैनाती के दौरान एक व्यक्ति सरकारी जमीन के पट्टे के कागज लेकर सालों से भटक रहा था. जांच में अधिकारियों की गड़बड़ी सामने आई, जिसे ठीक भी किया गया. लेकिन जब जमीन पर कब्जा दिलाने की बात आई, तो उन्हें जवाब मिला कि 'ऊपर से मना है'. दिव्या ने सवाल दागा कि संविधान में जनता को सबसे ऊपर रखा गया है, तो फिर यह 'ऊपर' कौन है जिसकी वजह से आम नागरिक को अपने हक के लिए सिफारिशें लगानी पड़ती हैं?

इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण इलाकों की जर्जर सड़कों, बिना पुल के कटे हुए गांवों और सड़कों के गड्ढों के कारण होने वाली मौतों पर भी जवाबदेही तय करने की बात कही.

पेपर लीक और एआई (AI) को लेकर जताई चिंता

युवाओं और शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए दिव्या ने कहा कि एक सामान्य परिवार से आकर उन्होंने पढ़ाई के दम पर ही सफलता हासिल की. लेकिन आज का युवा पेपर लीक जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, जिससे सालों की मेहनत पर पानी फिर जाता है.

दो बेटियों की मां होने के नाते उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से भविष्य में रोजगार पर पड़ने वाले असर को लेकर भी गहरी चिंता जताई. उनका कहना था कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य और रोजगार जैसे गंभीर विषयों पर सार्वजनिक मंचों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है.

चार स्तंभों पर आधारित होगी नई राजनीति

दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीति के मूल में चार शब्द रखे हैं- इरादा, न्याय, फिक्र और सोच.

उन्होंने साफ किया कि पुरानी और पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था के भीतर रहकर सुधार करना संभव नहीं है, इसीलिए वह किसी दल में शामिल नहीं हो रही हैं. चुनाव में लगने वाले बेहिसाब पैसे, बाहुबल और जाति-धर्म के समीकरणों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा:

चुनाव में पानी की तरह बहाया जाने वाला पैसा कहीं न कहीं विकास के बजट से ही खींचकर आता है. प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने कभी किसी की जाति या धर्म देखकर काम नहीं किया और राजनीति में भी इसी सिद्धांत पर कायम रहेंगी. उनके पास कोई बड़ा आर्थिक फंड या बाहुबल नहीं है उनकी असली ताकत सिर्फ आम जनता का साथ है.

अफवाहों और सोशल मीडिया ट्रॉलिंग पर करारा जवाब

इस्तीफे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर उड़ी अफवाहों और एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता द्वारा किसी काल्पनिक मुलाकात के दावे पर दिव्या ने खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आने वाली महिलाओं को डराने या चरित्र हनन करने की ऐसी कोशिशों से वह डरने वाली नहीं हैं.

लंदन की कॉर्पोरेट जॉब छोड़कर बनी थीं IAS

लंदन में अपनी प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर देश सेवा के उद्देश्य से भारत लौटीं दिव्या मित्तल का अब तक का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है. IIT दिल्ली से बी.टेक और IIM बेंगलुरु से एमबीए करने के बाद उन्होंने UPSC परीक्षा पास की और 2013 बैच की यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी बनीं. अपने 13 साल के प्रशासनिक कार्यकाल में खासकर मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए, उन्होंने दूरदराज के पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में नल से जल पहुंचाने जैसे कई सराहनीय काम किए. 

30 अगस्त 2026 को उन्होंने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफे की घोषणा की, जो 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ। यद्यपि उनके इस फैसले के बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दलों की ओर से तरह-तरह की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बयान आए, लेकिन दिव्या मित्तल ने साफ कर दिया कि यह फैसला पूरी तरह सोच-समझकर लिया गया था और अब वह बिना किसी दलीय दबाव के स्वतंत्र रूप से जनता के बीच रहकर काम करेंगी.

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