Ghazipur Kamlesh Bind Encounter News: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए एक लाख के इनामी बदमाश कमलेश बिंद का मामला अब गरमा गया है. एक तरफ जहां पुलिस इसे अपनी बड़ी कामयाबी मान रही है, वहीं दूसरी तरफ कमलेश के परिवार ने पुलिस प्रशासन पर फर्जी एनकाउंटर का बेहद गंभीर आरोप लगाया है. शव के गांव पहुंचते ही ऐसा बवाल काटा कि ग्रामीणों और पुलिस में ठन गई. पथराव में सीओ सिटी समेत 6 पुलिसकर्मी लहूलुहान हो गए. हालांकि, भारी पुलिस बल और फ्लैग मार्च के बाद फिलहाल गांव में शांति है लेकिन तनाव साफ महसूस किया जा सकता है.
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बिलख रही है नई नवेली दुल्हन
इस पूरे मामले में सबसे भावुक और चौंकाने वाला पहलू कमलेश की शादी का है. अभी बीते 27 अप्रैल 2026 को ही बिहार की रहने वाली मनीषा कुमारी से कमलेश का ब्याह हुआ था. घर में शादी की खुशियां ठीक से ठंडी भी नहीं हुई थीं कि मनीषा का सुहाग उजड़ गया.
हाथों में शादी का कार्ड लिए रोते-बिलखते मनीषा ने कहा, "मेरे पति पूरी तरह निर्दोष थे. पुलिस ने उन्हें गलत तरीके से फंसाया और फिर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर मार डाला. सरकार हमें इंसाफ दे और इसकी निष्पक्ष जांच कराए."
कमलेश की भाभी और ग्राम प्रधान अनीता कुमारी ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि होटल व्यवसायी विनीत राय की हत्या से कमलेश का कोई लेना-देना नहीं था. परिजनों का दावा है कि कमलेश होटल में होने वाले गलत कामों का विरोध करता था, इसलिए साजिश के तहत उसे रास्ते से हटा दिया गया. कमलेश के बड़े भाई सोनू बिंद ने साफ कहा है कि वे हार नहीं मानेंगे और न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे.
शव आते ही भड़का गुस्सा
बुधवार यानी 3 जून की रात हुए एनकाउंटर के बाद, गुरुवार शाम को जैसे ही कमलेश का शव कोतवाली थाना क्षेत्र के गोंडा ग्रामसभा के गौसाबाद इलाके में पहुंचा, ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. देखते ही देखते बहसबाजी पथराव में बदल गई. उग्र भीड़ ने पुलिस टीम पर पत्थरों की बारिश कर दी जिसमें सीओ सिटी समेत छह जवान जख्मी हो गए.
मामले की गंभीरता को देखते हुए देर रात डीआईजी वैभव कृष्ण खुद मौके पर पहुंचे. उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और भारी पुलिस बल के साथ इलाके में फ्लैग मार्च किया. पुलिस अधीक्षक ने साफ चेतावनी दी है कि कानून हाथ में लेने वाले और पथराव करने वाले उपद्रवियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.
क्या है ये पूरा मामला
मामले की जड़ें 29 मई की रात से जुड़ी हैं, जब गाजीपुर में चार बदमाशों ने होटल कारोबारी आलोक राय के बेटे विनीत राय की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी थी. इस मामले में विनीत के पिता ने कटरा गैंग के सरगना शंकर पांडेय, सोनू यादव, मोनू त्रिपाठी और कमलेश बिंद के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था.
पुलिस का दावा है कि कमलेश बिंद इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी था. 3 जून की रात पुलिस ने घेराबंदी की, तो मुठभेड़ के दौरान कमलेश ढेर हो गया. उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था. इस मामले में शामिल बाकी तीन आरोपी- शंकर पांडेय (1 लाख का इनामी), सोनू यादव (50 हजार का इनामी) और मोनू त्रिपाठी (50 हजार का इनामी) फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं और फरार चल रहे हैं.
कमलेश बिंद का क्या है आपराधिक इतिहास?
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुठभेड़ में मारा गया कमलेश बिंद कोई सीधा-साधा इंसान नहीं था. साल 2017 से लेकर 2026 तक उस पर आबकारी अधिनियम, मारपीट, बलवा और जानलेवा हमले (हत्या के प्रयास) समेत कुल 7 गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे.
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