उत्तर प्रदेश के गोरखपुर खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद राजनीतिक पारा पूरी तरह गरमा गया है. चुनाव परिणाम घोषित होने के दौरान ही मतगणना का बहिष्कार कर बाहर निकले प्रमुख नेता संजययन त्रिपाठी ने स्थानीय प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर मिलकर चुनाव में बड़ी धांधली कराने का सनसनीखेज आरोप लगाया है. उनका कहना है कि 17 जनपदों के शिक्षक मतदाताओं का मन पूरी तरह समाजवादी पार्टी के पक्ष में था, लेकिन सत्ता का दुरुपयोग कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को हाईजैक कर लिया गया.
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'पोलिंग से 4 दिन पहले बनी थी रणनीति, काउंटिंग में खुला खेल'
संजययन त्रिपाठी ने खुलासा करते हुए दावा किया कि मतदान (23 तारीख) से चार दिन पहले ही उन्हें भाजपा खेमे से सूचना मिल गई थी कि फर्जी मतदान कराने की योजना बनाई गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि वोटिंग के अंतिम दौर में गाड़ियों में भरकर आए लोगों ने बूथों पर 25 से 40 अतिरिक्त फर्जी वोट डाले, जिससे भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में 3 से 5 हजार मतों की फर्जी बढ़ोतरी दर्ज की गई. मतगणना हॉल में गड्डियां बनते वक्त यह रणनीति साफ नजर आ रही थी.
चौथे चक्र की मतगणना और 1,621 वोटों पर उठाया सवाल
संजययन त्रिपाठी ने मतगणना के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि तीसरे चक्र तक सपा-समर्थित प्रत्याशी राजीव यादव 400 वोटों के अंतर से आगे चल रहे थे. लेकिन तीसरे चक्र का अंतिम परिणाम घोषित किए बिना ही अचानक 4 बूथों पर खाली स्थान बनाकर चौथे चक्र के 1,621 मतों की गिनती शुरू करा दी गई. इस चौथे चक्र में अचानक 90 से 95 प्रतिशत मत एकतरफा सत्ताधारी पक्ष की ओर चले गए और करीब 1,100 वोट दिलाकर भाजपा उम्मीदवार को 400-500 वोटों से आगे कर दिया गया. इसी एकतरफा और संदिग्ध कार्रवाई के विरोध में उन्होंने मतगणना केंद्र का बहिष्कार किया.
'यह केवल मेरी हार नहीं, शिक्षकों के हक और पुरानी पेंशन की हार है'
व्यक्तिगत हार से ज्यादा अफसोस जताते हुए संजययन त्रिपाठी ने कहा कि पिछले 18 वर्षों के इतिहास में यह पहला चुनाव था जो शिक्षकों की पुरानी पेंशन बहाली (OPS), वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय और सेवा सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर लड़ा गया था. उन्होंने कहा कि 9 हजार से अधिक शिक्षकों ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसके लिए वे हमेशा आभारी रहेंगे. साथ ही उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से अपील की कि भविष्य में सरकार बनने पर वे शिक्षकों की पुरानी पेंशन और मानदेय का वादा जरूर पूरा करें.
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