'टिकट मिलने में हुई देरी और कम समय बना हार का कारण', वाराणसी में बीजेपी प्रत्याशी रहे केदार नाथ सिंह ने गिनाई कमियां
Varanasi MLC Election Result: वाराणसी स्नातक MLC चुनाव में हार के बाद बीजेपी प्रत्याशी केदार नाथ सिंह ने इसकी वजह बताई. उन्होंने टिकट मिलने में देरी, प्रचार के लिए कम समय और वोटिंग में हुई तकनीकी गलतियों को हार का कारण बताया. साथ ही भविष्य के चुनावों के लिए पार्टी को सुझाव भी दिया.
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उत्तर प्रदेश के वाराणसी खंड के स्नातक एमएलसी चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा ने जीत दर्ज कर इस सीट पर कब्जा जमा लिया है. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार रहे केदार नाथ सिंह ने हार के बाद खुलकर अपनी बात रखी है और हार के कारणों का विश्लेषण किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पार्टी को मिली इस हार के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. विस्तार से जानिए पूरी बात.
टिकट मिलने में देरी और कम समय को बताया हार की मुख्य वजह
यूपी तक के साथ बातचीत करते हुए केदार नाथ सिंह ने बताया कि पार्टी ने वोटर बनाने के लिए कार्यकर्ताओं से अपेक्षा की थी, लेकिन उस वक्त तक कोई प्रत्याशी घोषित नहीं हुआ था. नामांकन से ठीक एक दिन पहले 29 तारीख को उन्हें पार्टी प्रत्याशी के रूप में घोषित किया गया, जिससे चुनाव प्रचार और जनसंपर्क के लिए बहुत कम समय मिला. उन्होंने कहा कि आठ अलग-अलग जनपदों में फैले इस बड़े क्षेत्र में अकेले या कम समय में व्यक्तिगत जनसंपर्क करना बेहद कठिन काम था. इसके विपरीत, सपा प्रत्याशी को एक साल पहले ही मैदान में उतरने का पूरा मौका मिल चुका था.
मतदाताओं में भ्रम और वोटिंग की तकनीकी खामी
केदार नाथ सिंह ने यह भी खुलासा किया कि चुनाव के दौरान लगभग 5,000 ऐसे वोट अमान्य या गलत हो गए, जहां मतदाताओं को वरीयता क्रम (Preference) की जानकारी न होने के कारण उन्होंने सही तरीके से वोट नहीं डाला. मतदाताओं ने केदार नाथ सिंह का नाम दूसरे नंबर पर होने के कारण उनके आगे '2' लिखने के बजाय दो जगह वोट अंकित कर दिया, जिससे मिसअंडरस्टैंडिंग के कारण हजारों वोट प्रभावित हुए. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं की तरफ से कोई भीतरघात नहीं हुआ और सभी ने पूरी मेहनत से चुनाव लड़ा.
पार्टी के लिए भविष्य का सुझाव
हार की समीक्षा करते हुए केदार नाथ सिंह ने सुझाव दिया कि इस तरह के विधान परिषद चुनावों में पार्टी को कम से कम 6 महीने पहले उम्मीदवार की घोषणा कर देनी चाहिए. इससे प्रत्याशी को मतदाताओं के बीच जाने, संपर्क साधने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का भरपूर अवसर मिल सकेगा.
