उत्तर प्रदेश की राजनीति में साल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है. राज्य की हॉट सीटों में शुमार गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट पर अभी से चुनावी सरगर्मी देखने को मिलने लगी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले की इस हाई-प्रोफाइल सीट पर जहां एक तरफ बीजेपी अपनी मौजूदा बढ़त को बरकरार रखने की जुगत में है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी (सपा) और इंडिया गठबंधन में टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त सामने आ रही है.
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विपिन सिंह की मजबूत पकड़ और गोरक्षपीठ का आशीर्वाद
गोरखपुर ग्रामीण सीट पर साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार विपिन सिंह ने जीत दर्ज की थी. विपिन सिंह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गोरखनाथ मंदिर का बेहद करीबी माना जाता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट पर गोरक्षपीठ के प्रभाव और आशीर्वाद के बिना जीत हासिल करना काफी मुश्किल होता है.
पिछली बार विपिन सिंह ने 24,000 से अधिक मतों के अंतर से यह चुनाव जीता था. पार्टी के भीतर सुधीर सैनी और पूर्व राज्यसभा सांसद जयप्रकाश निषाद समेत कई नेता दावेदारी पेश कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा विधायक और मुख्यमंत्री से अच्छे संबंधों के चलते विपिन सिंह का पलड़ा फिलहाल सबसे भारी माना जा रहा है.
सपा और इंडिया गठबंधन
समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए यह सीट खासी मंथन का विषय बनी हुई है. पिछले चुनाव में सपा की ओर से विजय बहादुर यादव मैदान में उतरे थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र में निषाद और सहनी समुदाय की आबादी अच्छी खासी है, जिसे देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि सपा इस बार किसी निषाद चेहरे पर दांव खेल सकती है.
सपा खेमे से टिकट की दावेदारी करने वालों में कई प्रमुख नाम चर्चा में हैं:
- काजल निषाद: जानी-मानी अभिनेत्री और चर्चित राजनीतिक चेहरा काजल निषाद भी सपा टिकट की दौड़ में शामिल हैं.
- अन्य प्रमुख नाम: रविंद्र निषाद, रामनगीना साहनी, और मनोरंजन यादव जैसे नेता भी लगातार सक्रिय हैं.
अंशुमान सिंह का विवाद: कुछ समय पहले सपा नेता अंशुमान सिंह और नगीना साहनी के बीच हुई आपसी झड़प के बाद अंशुमान सिंह को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था, जिससे उनकी उम्मीदवारी की संभावनाएं काफी क्षीण हो चुकी हैं. हालांकि, कुछ अन्य नेता सपा के टिकट के साथ-साथ बसपा से भी अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं.
बसपा और अन्य समीकरण
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी इस सीट पर हमेशा से ठीक-ठाक प्रदर्शन करती आई है. पिछले चुनाव में बसपा से दारा सिंह निषाद मैदान में उतरे थे, और इस बार भी चर्चा है कि पार्टी किसी निषाद उम्मीदवार या मुस्लिम चेहरे को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है.
अब देखना यह होगा कि सत्ताधारी दल बीजेपी क्या अपने मौजूदा विधायक पर फिर भरोसा जताती है, या फिर विपक्षी खेमा जातीय समीकरणों को साधते हुए किस नए चेहरे पर दांव खेलता है.
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