पापा… मेरी कार नाले में गिर गई है. मैं पानी में फंसा हुआ हूं, मुझे बचा लो…
ग्रेटर नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के ये आखिरी शब्द थे जो उसने दुनिया छोड़ने से कुछ ही देर पहले अपने पिता से फोन पर कहे थे. यह बात जब पिता ने मीडिया के सामने बताई, तो उनकी आवाज भर्रा गई और आंखों में गहरी बेबसी साफ झलक रही थी.
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एक पिता, जो आधी रात को बेटे की पुकार सुनकर बदहवास हालत में मौके पर पहुंचा, अपनी आंखों के सामने अपने जवान बेटे को जिंदगी से जूझते और फिर हारते हुए देखता रहा. वह कुछ नहीं कर सका, सिवाय मदद की गुहार लगाने के. अब वही पिता टूटे हुए दिल और भारी दर्द के साथ इंसाफ की मांग कर रहा है. उनका कहना है कि अगर समय पर मदद मिल जाती और जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती तो आज उसका बेटा जिंदा होता.
क्या है मामला
ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है. कल यानी 18 जनवरी को सेक्टर-150 के टी-प्वाइंट के पास बने एक बेसमेंट में भरे पानी में कार गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई. इस मामले में पुलिस ने दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है.
नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने युवराज के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर एमजेड विशटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड और लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ बीएनएस की धारा 105, 106(1) और 125 के तहत एफआईआर दर्ज की है. पुलिस का कहना है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
पापा ने बताया किया हुआ था
युवराज के पिता ने बताया कि हादसे वाली रात करीब 12 बजे उनके बेटे का फोन आया. उसने कहा कि उसकी कार नाले में गिर गई है और वह पानी में फंसा हुआ है. पिता तुरंत बेटे को ढूंढते हुए मौके पर पहुंचे लेकिन घना कोहरा होने की कारण उन्हें कुछ भी नजर नहीं आ रहा था. उसी दौरान युवराज ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर पिता को अपनी मौजूदगी का संकेत दिया.
मौके पर पहुंचे बचाव दल
पिता ने बताया कि उन्होंने बेटे को इस हाल में देखकर तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं. लेकिन आरोप है कि उनके पास युवराज को बचाने के लिए जरूरी संसाधन नहीं थे.
पिता ने बताया कि दमकल विभाग ने रस्सी फेंकी, लेकिन वह युवराज तक नहीं पहुंची. इतना ही नहीं क्रेन भी इतना छोटा था कि वो कार तक नहीं पहुंच पाई. इस पूरे मामले में हैरानी की बात ये है कि पानी ठंडा होने और अंदर लोहे के सरिए होने का हवाला देकर टीमें भी पानी में उतरने से हिचकती रहीं. इस बीच समय बीतता गया और युवराज अपने पिता की आंखों के सामने ही कार समेत डूब गया.
50 फुट गहरा गड्ढा
पिता ने पुलिस को बताया कि जिस प्लॉट में हादसा हुआ वहां लगभग 50 फुट गहरा गड्ढा खोदा गया था जिसमें हमेशा पानी भरा रहता है. यह जमीन पहले लोटस ग्रीन्स की थी और बाद में एमजेड विशटाउन प्लानर्स से जुड़ी बताई जा रही है. सबसे गंभीर बात यह रही कि वहां न तो कोई बैरिकेडिंग थी, न रिफ्लेक्टर और न ही चेतावनी बोर्ड.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी कोहरे के दौरान एक ट्रक इसी जगह फंस चुका था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
सोसाइटी के लोगों ने निकाला कैंडल मार्च
घटना के बाद सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के निवासियों में भारी आक्रोश है. सोसाइटी के लोगों ने रविवार को कैंडल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया और बिल्डरों के साथ-साथ प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की.
पुलिस का बयान
ज्वाइंट सीपी गौतम बुद्ध नगर राजीव नारायण मिश्रा ने कहा कि यह बेहद दुखद घटना है. सूचना मिलते ही फायर विभाग के जरिए लैडर, सर्च लाइट और बोट की व्यवस्था की गई और बाद में एसडीआरएफ को भी जोड़ा गया. उस वक्त विजिबिलिटी लगभग शून्य थी जिससे रेस्क्यू में दिक्कत आई. पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है.
हादसे के बाद हरकत में प्रशासन
घटना के बाद प्राधिकरण ने मौके पर मिट्टी का ढेर लगवाया है लोहे की करीब 10 फीट चौड़ी और 7 फीट ऊंची बैरिकेडिंग कराई गई है और जर्सी बैरियर भी लगाए गए हैं, ताकि आगे कोई और हादसा न हो.
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